सिविल इंजीनियर (Civil Engineer) कैसे बने ?

हर विद्यार्थी चाहता है कि उसका उज्जवल करियर हो और अपने करियर में बनाए लक्ष्य को हासिल करने हेतु वह कक्षा 10वीं से ही सोच विचार करना चालू कर देता है। और फिर अपने लक्ष्य के आधार पर ही वह 12वीं कक्षा में अपने पसंदीदा सब्जेक्ट का चयन करता है।

यही सब्जेक्ट आगे चलकर के उसे अपने लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए उचित कोर्स का सिलेक्शन करने में काफी काम आते हैं। अगर आपको सिविल इंजीनियर बनने में इंटरेस्ट है और आपको यह जानना है कि सिविल इंजीनियर बनने की प्रक्रिया क्या है, तो हमारा यह आर्टिकल आपके लिए सहायक साबित होगा।

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सिविल (Civil Engineer) इंजीनियर क्या है?

जो अभ्यर्थी सिविल इंजीनियरिंग से संबंधित किसी भी प्रकार की डिग्री को हासिल कर लेता है उसे सिविल इंजीनियर कहा जाता है, कंस्ट्रक्शन से संबंधित कामों को देखना या फिर करवाना सिविल इंजीनियर का प्रमुख कार्य होता है। वे सड़क, इमारत, पुल बांध इत्यादि ना सिर्फ इन सभी चीजों का निर्माण करवाने में सहायक साबित होते हैं, बल्कि यह इनके रखरखाव को भी सुनिश्चित करते हैं।

सिविल इंजीनियर पर ऐसे निर्माण काम को अंजाम देने की जिम्मेदारी होती है, जो मजबूत हो और जो जल्दी से धराशाई ना हो। लोगों की सिक्योरिटी से संबंधित काफी जिम्मेदारी एक सिविल इंजीनियर के ऊपर होती है। यही वजह है कि सिविल इंजीनियरिंग करने के लिए स्पेशल योग्यता और कौशल की आवश्यकता पड़ती है। हमारा कहने का मतलब है कि सिविल इंजीनियर एक ऐसा पेशा है जिसके ऊपर समाज का शहरीकरण करने की जिम्मेदारी होती है।

सिविल इंजीनियर बनने के लिए योग्यता

ऐसे अभ्यर्थी जो सिविल इंजीनियर बनना चाहते हैं उन्हें सिविल इंजीनियरिंग का डिप्लोमा सर्टिफिकेट हासिल करना पड़ेगा या फिर सिविल इंजीनियरिंग में कोई डिग्री हासिल करनी पड़ेगी। यह सभी कोर्स सामान्य तौर पर 12वीं कक्षा को पास करने के बाद अभ्यर्थी कर सकते हैं।

हालांकि यह ध्यान रखें कि 12वीं कक्षा में आपको साइंस का सब्जेक्ट ही लेना है, तभी आपको सिविल इंजीनियरिंग डिप्लोमा या फिर डिग्री कोर्स में एडमिशन मिलेगा। हालांकि कुछ डिप्लोमा कोर्स ऐसे भी होते हैं जिसमें दसवीं पास अभ्यर्थी भी अप्लाई कर सकते हैं। नीचे आपको सिविल इंजीनियर की पोस्ट प्राप्त करने के लिए मापदंड के पैमाने की डिटेल दी गई है।

  • विद्यार्थियों के किए फिजिक्स, केमिस्ट्री और गणित के सब्जेक्ट के साथ 12वीं कक्षा को कम से कम 55% अंकों के साथ पास करना आवश्यक है।
  • सिविल इंजीनियरिंग की डिप्लोमा या फिर डिग्री कोर्स में एडमिशन पाने के लिए आपको IITJEE, AIEEE, BITSAT जैसी एंट्रेंस एग्जाम भी देनी पड़ सकती है जो कि नेशनल/स्टेट लेवल पर आयोजित होती हैं।
  • मास्टर ऑफ टेक्नोलॉजी के कोर्स में एडमिशन पाने के लिए विद्यार्थियों को GATE एंट्रेंस एग्जाम को पास करना आवश्यक है।
  • दसवीं के बाद भी कुछ ऐसे डिप्लोमा कोर्सेज है, जिसे करके विद्यार्थी चाहे तो जूनियर इंजीनियर बन सकते हैं।

सिविल इंजीनियर बनने के लिए कोर्स

डिग्री, डिप्लोमा और सर्टिफिकेट यह 3 प्रकार के कोर्स  सिविल इंजीनियर बनने के लिए करवाए जाते हैं और भारत में कई ऐसे शिक्षण संस्थान है जो इन कोर्स को ऑफर करते हैं। नीचे इनके बारे में आपको इंफॉर्मेशन प्रोवाइड करवाई गई है।

डिग्री कोर्स

  • बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग इन सिविल इंजीनियरिंग |
  • बैचलर ऑफ़ टेक्नोलॉजी इन सिविल इंजीनियरिंग |
  • मास्टर ऑफ़ इंजीनियरिंग इन सिविल इंजीनियरिंग |
  • मास्टर ऑफ़ टेक्नोलॉजी इन सिविल इंजीनियरिंग |
  • डॉक्टर ऑफ़ फिलोसोफी इन सिविल इंजीनियरिंग |

डिप्लोमा कोर्स

  • डिप्लोमा इन सिविल इंजीनियरिंग |
  • एडवांस डिप्लोमा इन सिविल इंजीनियरिंग |
  • डिप्लोमा इन सिविल एंड रूरल इंजीनियरिंग |

पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा इन सिविल इंजीनियरिंग 

बता दें कि इंडिया में ऐसे बहुत सारे प्राइवेट और गवर्नमेंट इंस्टिट्यूट है, जो सिविल इंजीनियर से संबंधित सर्टिफिकेट कोर्स ऑफर करते हैं। अभ्यर्थी चाहे तो सर्टिफिकेट कोर्स को करके भी सिविल इंजीनियर बन सकते हैं परंतु अधिक प्राथमिकता उन्हें ही दी जाती है, जिन्होंने डिप्लोमा या फिर डिग्री प्राप्त करके सिविल इंजीनियर की पोस्ट प्राप्त की होती है।

सिविल इंजीनियर कैसे बनें?

वे छात्र जिन्होंने हाई स्कूल एवम इंटर की परीक्षा को पास कर लिया है और वह यह जानना चाहते हैं कि सिविल इंजीनियर दसवीं क्लास के बाद कैसे बना जाता है? तो आपके लिए निम्नलिखित प्रक्रिया का पालन करना जरूरी हो जाता है।

दसवीं के बाद सिविल इंजीनियर बनने का तरीका

जिन विद्यार्थियों ने दसवीं क्लास को पास कर लिया है और उसके बाद वह सिविल इंजीनियर की पोस्ट को प्राप्त करना चाहते हैं, वह दसवीं क्लास के बाद कोई डिप्लोमा कोर्स कर सकते हैं। नीचे जाने कैसे आप दसवीं क्लास के बाद सिविल इंजीनियर बन सकते हैं।

चरण 1:

  • दसवीं कक्षा पास करने के बाद विद्यार्थियों को टेक्निकल डिपार्टमेंट के द्वारा करवाए जाने वाले एंट्रेंस एग्जाम को पास करने की आवश्यकता होती है। इस एंट्रेंस एग्जाम को पास करने के बाद विद्यार्थियों का चयन राज्य में ही स्थित किसी डिप्लोमा कॉलेज में हो जाता है।
  • याद रखे कि कुछ कॉलेज ऐसे हैं, जो एंट्रेंस एग्जाम में प्राप्त अंकों के आधार पर एडमिशन देते हैं, वहीं कुछ पॉलिटेक्निक कॉलेज ऐसे होते हैं, जो विद्यार्थियों के दसवीं में परफॉर्मेंस के आधार पर उन्हें एडमिशन देते हैं।

चरण 2:

  • जब विद्यार्थियों को कॉलेज में एडमिशन मिल जाता है तब उन्हें डिप्लोमा इन सिविल इंजीनियरिंग नाम का एक कोर्स करना पड़ता है, जिसे करने में कुल 3 साल का समय विद्यार्थियों को देना पड़ता है क्योंकि यह कोर्स टोटल 3 साल का होता है।
  • जब विद्यार्थी इस कोर्स को पूरा कर लेते हैं तब वह चाहे तो अपनी इच्छा के अनुसार कोई डिग्री कोर्स भी सिविल इंजीनियरिंग में कर सकते हैं अथवा वह चाहे तो कहीं पर जूनियर इंजीनियर की पोस्ट के लिए भी अप्लाई कर सकते हैं। आपको हम यहां पर यह भी बता दें कि अगर कोई विद्यार्थी डिप्लोमा का कोर्स कर लेता है, तो वह पूरी तरह से सिविल इंजीनियर नहीं बन जाता है।
  • यही वजह है कि वह चाहे तो नौकरी करने के दरमियान एसोसिएट मेंबरशिप ऑफ़ इंस्टिट्यूशन ऑफ इंजीनियर के द्वारा अपनी आगे की पढ़ाई भी कर सकता है, जोकि इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल करने का वैकल्पिक ऑप्शन ऐसे लोगों के लिए होता है, जिनके पास सिविल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा की डिग्री होती है।
  • एसोसिएट मेंबरशिप ऑफ़ इंस्टिट्यूशन ऑफ इंजीनियर से जब अभ्यर्थी को डिग्री प्राप्त हो जाती है तो वह उतने ही अवसर पाने का भागी होता है जितना कि बैचलर ऑफ इलेक्ट्रॉनिक या फिर बैचलर ऑफ़ टेक्नोलॉजी डिग्री धारकों को मिलता है।
  • इस फील्ड में अभ्यर्थी 7 साल का एक्सपीरियंस हासिल कर लेने के बाद चाहे तो अपने आपको इंजीनियरिंग काउंसिल ऑफ इंडिया में सिविल इंजीनियर के तहत रजिस्टर करवा सकता है।

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12वीं के बाद सिविल इंजीनियर बनने का तरीका

सिविल इंजीनियर बनने के लिए आपका फिजिक्स, केमिस्ट्री, गणित और अंग्रेजी के विषयों से 12वीं की कक्षा पास होना अनिवार्य है। क्योंकि कुछ कॉलेज ऐसे हैं, जो 12वीं में प्राप्त अंकों के आधार पर आपको एडमिशन देते हैं। नीचे हमने आपको 12वीं क्लास के बाद सिविल इंजीनियर कैसे बना जाता है, इसकी डिटेल्स दी है।

स्टेप 1:

जॉइंट एंट्रेंस एग्जाम को ऐसे विद्यार्थियों को पास करने की आवश्यकता पड़ेगी, जो 12वीं क्लास को फिजिक्स, केमिस्ट्री और मैथमेटिक्स के सब्जेक्ट के साथ पास कर चुके हैं और उसके बाद इंजीनियरिंग के कोर्स में एडमिशन लेना चाहते हैं। एंट्रेंस एग्जाम में जितने भी अंक विद्यार्थी को प्राप्त होंगे, उसके आधार पर ही उसे विभिन्न इंस्टिट्यूट एडमिशन देंगे।

स्टेप 2:

विद्यार्थियों को जब इंजीनियरिंग के कॉलेज में एडमिशन मिल जाएगा, तब उसके बाद उन्हें कुल 4 साल के डिग्री प्रोग्राम की पढ़ाई करनी पड़ेगी और पढ़ाई पूर्ण करने के बाद विद्यार्थियों को 1 साल की अथवा 6 महीने की इंटर्नशिप भी करनी पड़ेगी।

स्टेप 3:

इंटर्नशिप पूरी कर लेने के बाद आवेदक चाहे तो अपनी इच्छा के अनुसार किसी भी गवर्नमेंट या फिर प्राइवेट सेक्टर में असिस्टेंट इंजीनियर की पोस्ट पाने के लिए अप्लाई कर सकता है। और 7 साल का अनुभव हासिल कर लेने के बाद वह अपने आप को चाहे तो इंजीनियरिंग काउंसिल ऑफ इंडिया में सिविल इंजीनियर के तहत रजिस्टर करवा सकता है, साथ ही विद्यार्थी चाहे तो हायर एजुकेशन के तहत एम.ई, एम.टेक और पीएचडी की पढ़ाई भी कर सकते हैं।

सिविल इंजीनियरिंग कोर्स हेतु बेस्ट कॉलेज

नीचे हमने आपको सिविल इंजीनियरिंग करवाने वाले इंडिया के बेस्ट कॉलेज के नाम दिए हैं। हालांकि आप चाहे तो अपने राज्य या फिर अपने जिले में भी स्थित किसी भी सिविल इंजीनियरिंग का कोर्स ऑफर करने वाले कॉलेज में एडमिशन ले सकते हैं।

  • कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग, पुणे |
  • लवली प्रोफेशनल इंस्टीट्यूट, पंजाब |
  • मणिपाल प्रौद्योगिकी संस्थान |
  • इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड साइंस |
  • आरवी कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग, बैंगलोर |
  • वेल्लोर प्रौद्योगिकी संस्थान |
  • जामिया मिलिया इस्लामिया, नई दिल्ली |
  • दिल्ली तकनीकी विश्वविद्यालय |
  • आईआईटी बॉम्बे |
  • आईआईटी दिल्ली |
  • सिविल इंजीनियर की सैलरी |

सिविल इंजीनियर बनने के बाद अगर अभ्यर्थी की नौकरी प्राइवेट सेक्टर में लगती है तो आरंभ में उसे महीने में तकरीबन ₹25000 से लेकर के ₹30000 तक की तनख्वाह मिलेगी और एक्सपीरियंस प्राप्त हो जाने पर आगे चलकर के उसकी तनख्वाह महीने में 1 लाख तक भी जा सकती है‌। चाहे तो अभ्यर्थी अपना खुद का भी कोई बिजनेस चालू कर सकता है।

अगर अभ्यर्थी की सरकारी नौकरी लगती है, तो उसकी शुरुवाती तनख्वाह ₹60,000 से लेकर के ₹80,000 के आसपास में होगी और अनुभव बढ़ने पर उसकी सैलरी भी बढ़ेगी। अच्छा काम करने पर आगे चलकर के एक सिविल इंजीनियर, चीफ इंजीनियर की पोस्ट भी प्राप्त कर सकता है।

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