एफपीआई (FPI) क्या है

भारत में अनेक ऐसी विदेशी कम्पनियां है, जो भारत में उत्पादन करनें के साथ ही उच्च स्तर पर व्यापार कर रही है | इसके लिए उन्हें भारत सरकार की शर्तो को मानना होता है, जिसके पश्चात ही वह भारत में अपने उद्योग धंधे स्थापित कर सकते है | अमेजन, फ्लिप्कार्ट, वालमार्ट आदि कम्पनियाँ इसका उदाहरण है | भारत सरकार की दूरदर्शी आर्थिक नीतियों की वजह से देश में कारोबारी माहौल अच्छा हुआ है और पूंजी बाजार में देश के ही नहीं, विदेश के निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ती जा रही है। वैश्विक मंदी के इस दौर में फरवरी महीने में अब तक विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) ने घरेलू बाजार में 23,102 करोड़ रुपये विदेशी निवेश किया है। आईये जानते है, कि एफपीआई (FPI) क्या है?

एफडीआई (FDI) क्या होता है

विदेशी निवेश के प्रकार (Types Of Foreign Investment)

विदेशी निवेशक दो प्रकार से निवेश कर सकते है, जो इस प्रकार है-

  • प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआइ)
  • विदेशी पोर्टफोलियो निवेश (एफपीआइ)

एफपीआई क्या होता है

एफपीआइ को हिंदी में विदेशी पोर्टफोलियो निवेश (Foreign Portfolio Investment) कहते है | किसी विदेशी व्यक्ति या कंपनी द्वारा किसी भारतीय कंपनी में लगने वाले पैसे को विदेशी निवेश कहा जाता है। विदेशी निवेशक उस कंपनी के शेयर, बांड खरीद सकता है इसके साथ ही वह स्वयं का नया कारखाना लगा सकता है। लेकिन, यह पूंजी निवेश ‘रिपार्टिएबल बेसिस’ पर होता है। इसका मतलब यह है कि विदेशी निवेशक ने यहां जो भी पूंजी निवेश किया है, उसे वह निकालकर स्वदेश वापस ले जा सकता है।

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 एफडीआइ और एफपीआई का मतलब (Meaning of FDI and FPI)

यदि कोई भी विदेशी निवेशक शेयर मार्केट में सूचीबद्ध भारतीय कंपनी के शेयर खरीदता है, परन्तु उसकी हिस्सेदारी 10 प्रतिशत से कम होती है, तो उसे एफपीआइ अर्थात विदेशी पोर्टफोलियो निवेश कहते हैं। यह निवेश शेयरो और बांड के रूप में होता है।

जब कोई विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक दस प्रतिशत से अधिक हिस्सेदारी खरीदता है, तो उसे FDI (प्रत्यक्ष विदेशी निवेश) माना जाता है। विदेश पोर्टफोलियो निवेश आम तौर पर कम समय के लिए होता है। एक पोर्टफोलियो निवेशक अपने लाभ और हानि को देखते हुए अचानक भारतीय कंपनी के शेयर या बांड बेचकर यहां से निकल सकता है, इसलिए इसे धन सृजन के रूप में भी जानते है।

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गवर्नमेंट रूट या ऑटोमेटिक रूट (Government Route or Automatic Route)

ऑटोमेटिक रूट और गवर्नमेंट रूट यह दो ऐसे रास्ते है, जिसके माध्यम से विदेशी निवेशक भारतीय कंपनियों में निवेश कर सकते है | ऑटोमेटिक रूट के अंतर्गत विदेशी निवेशकों को निवेश करने के लिए भारत सरकार या भारतीय रिजर्व बैंक की अनुमति नहीं लेनी होती है। इसमें सिर्फ उन्हीं क्षेत्रों में निवेश किया जा सकता है जिनका उल्लेख विदेशी मुद्रा प्रबंधन कानून के नियमों के तहत किया गया है। दूसरी ओर जो क्षेत्र ऑटोमेटिक रूट के दायरे में नहीं आते, उनमें निवेश के लिए सरकार की अनुमति आवश्यक होती है|

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वर्ष 2019 में एफपीआई निवेश का आकड़ा (FPI Investment Data In 2019)

वर्ष 2019एफपीआई (विदेशी पोर्टफोलियो निवेश) काफी अच्छा रहा है। इस वर्ष देश में 82,575 करोड़ रुपए का एफपीआई निवेश हुआ। इससे यह स्पष्ट होता है, कि भारत सरकार नें  विदेशी निवेशकों का विश्वास जीतनें में सफल हुई है। मीडिया से प्राप्त जानकारी के अनुसार2019 में भारत में सबसे अधिक धन लगाया है। हांगकांग में विरोध प्रदर्शनों के चलते भी विदेशी निवेशकों का भारत की ओर आकर्षण बढ़ा है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा कॉरपोरेट टैक्स की दरो मे कटौती से भी विदेश निवेश में वृद्धि हुई है।

एफडीआई हासिल करने के मामले में भारत 20 वर्षो में पहली बार चीन से आगे निकल गया। वर्ष 2018 में वालमार्ट, यूनीलीवर जैसी कंपनियों से भारत में आए निवेश के चलते यह संभव हो सका। इस दौरान भारत में 38 अरब डॉलर का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश हुआ, जबकि चीन सिर्फ 32 अरब डॉलर ही जुटा सका।

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