गोधन न्याय योजना क्या है

भारत के कई स्थानों में गायों की अत्याधिक संख्या पायी गई है, जिसके तहत भारत सरकार द्वारा कई योजनाओं की शुरुआत की गई है, जिससे गायों को एक स्थान पर रखकर उनकी सेवा की जाए, जिसके लिए सरकार द्वारा गौपालन करने वाले लोगों को पैसे की रकम भी प्रदान की जाती है | इसी तरह अब छत्तीसगढ़ में गौपालन को आर्थिक रूप से लाभदायी बनाने और खुले में पशु चराने की प्रथा पर पूरी तरह से रोक लगाने के लिए प्रदेश सरकार ने एक नई योजना की शुरुआत कर दी है | इस योजना का नाम गोधन न्याय योजना है |

इस योजना की शुरुआत कर देने के बाद अब सड़कों और शहरों में आवारा पशुओं पर रोक लगाई जा सकेगी और पर्यावरण की रक्षा की जा सके | इसलिए यदि आपको गोधन न्याय योजना के विषय में अधिक जानकारी नहीं प्राप्त है और आप इसके विषय में जानना चाहते है, तो यहाँ पर आपको गोधन न्याय योजना क्या है? | Chattisgarh Godhan Nyay Yojana Explained in Hindi | इसकी पूरी जानकारी प्रदान की जा रही है | 

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गोधन न्याय योजना का क्या मतलब है ? 

यह एक ऐसी योजना है, जिसके तहत पशुपालन को बढ़ावा देने के अलावा कृषि लागत में कमी और भूमि की उर्वरा में बढ़ोत्तरी  की जा सकेगी | इस योजना की शुरुआत हो जाने से अब छत्तीसगढ़ में गौपालन को आर्थिक रूप से लाभकारी बनाया जाएगा और खुले में पशु चराने की प्रथा पर रोक लगाई जा सकेगी | यह योजना भी सभी योजनाओं की तरह एक महत्वपूर्ण योजना है, क्योंकि अब इस योजना के तहत राज्य सरकार पशुपालकों से दो रुपए प्रति किलो की दर से गोबर की खरीद करेगी, जिससे जैविक खाद तैयार किया जाएगा।  गोधन न्याय योजना की शुरूआत हरेली पर्व के दिन से कर दी जाएगी | राज्य सरकार की इस योजना की जानकारी मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने  दी है

सीएम भूपेश बघेल ने गोधन न्याय योजना के बारे में क्या कहा है ?

सीएम भूपेश बघेल ने गोधन न्याय योजना के बारे में कहा कि, “इस योजना का उद्देश्य प्रदेश में गौपालन को बढ़ावा देने के साथ ही उनकी सुरक्षा और उसके माध्यम से पशुपालकों को आर्थिक रूप से लाभ पहुंचाना है |”  सीएम ने बताया कि, “पिछले डेढ़ साल में छत्तीसगढ़ की चार चिन्हारी नरवा, गरूवा, घुरूवा, बाड़ी के माध्यम से राज्य की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करने चारों चिन्हारियों को बढ़ावा देने का प्रयास किया गया है |”

उन्होंने कहा, “गांवों में पशुधन के संरक्षण और संवर्धन के लिए गौठान का निर्माण किया गया है | राज्य के 2200 गांवों में गौठान का निर्माण हो चुका है | इसके साथ ही 2800 गांव में गौठान का निर्माण किया जा रहा है | आने वाले दो-तीन महीने में लगभग 5,000 गांव में गौठान बन जाएंगे | इन गौठान को हम ग्रामीण के लिए आजीविका केन्द्र के रूप में विकसित कर रहे हैं | यहां बड़ी मात्रा में वर्मी कम्पोस्ट का निर्माण भी महिला स्व-सहायता समूहों के माध्यम से शुरू किया गया है |”

किसानों से गोबर खरीदने की दर के निर्धारण के लिए कृषि एवं जल संसाधन मंत्री रविन्द्र चौबे की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय मंत्री मण्डलीय उप समिति का गठन किया गया है, जिसमें मुख्यमंत्री ने कहा कि, “गोबर खरीदी से लेकर उसके वित्तीय प्रबंधन एवं वर्मी कम्पोस्ट के उत्पादन से लेकर उसके विक्रय तक की प्रक्रिया के निर्धारण के लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता में प्रमुख सचिव एवं उप सचिव की एक समिति गठित की गई है | इसी के साथ सीएम बघेल ने कहा, “गोधन न्याय योजना के माध्यम से गांव में रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे | मैं किसानों, पशुपालकों एवं बुद्धिजीवियों से राज्य में गोबर खरीदी के दर निर्धारण के संबंध में सुझाव देने का आग्रह करता हूं |”

इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने प्रदेश वासियों को नए साल के पहले त्योहार की बधाई दी और कहा कि, “यह योजना संकट के समय किसानों और पशुपालकों के लिए वरदान साबित होगी और यह ग्रामीण अर्थव्यवस्था के संजीवनी बनेगी।”

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