यहूदी धर्म (Judaism) क्या है



वर्तमान समय में इजराइल और फिलीस्तीन के बीच चल रहे युद्ध को लेकर यहूदी धर्म की चर्चा सुर्ख़ियों में है |  दरअसल यह जंग कुछ धार्मिक स्थलों को लेकर छिड़ी हुई है और इजराइल की वजह से पूरी दुनिया के लोग यहूदी धर्म के बारे में जाननें के लिए काफी उत्सुक हैं | इसी वजह से लोग यहूदी धर्म को लेकर इसे इन्टरनेट पर सर्च किया जा रहा है | 



आपको बता दें, कि यहूदी धर्म इजराइल राजधर्म है और यह धर्म लगभग 4 हजार वर्ष पुराना है | यह धर्म दुसरे धर्मों की अपेक्षा बिल्कुल अलग है, इस धर्म में सिर्फ एक ही ईश्वर को माना जाता है और इसमें मूर्ति पूजा नहीं की जाती है | यदि आप भी यहूदी धर्म के बारें में जाननें के इच्छुक है, तो आईये जानते है कि यहूदी धर्म (Judaism) क्या है, संस्थापक, यहूदी धर्म का पूरा इतिहास के बारे में जानकारी |

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यहूदी धर्म का क्या मतलब होता है ?

यहूदी धर्म दुनिया के सबसे प्राचीन धर्मों में से एक है और यह धर्म लगभग चार हजार वर्ष पुराना है और वर्तमान समय में यहूदी धर्म को माननें वाले लोगो की सबसे अधिक संख्या इजराइल में है। यहूदी धर्म के लोगो का मानना है, कि ईश्वर एक है और इस्लाम की भांति इस धर्म के लोग मूर्ति पूजा को पाप समझते है | यहूदियों के धर्मग्रन्थ का नाम ‘तनख’ है, जो इब्रानी में लिखा गया है | आपको बता दें, कि इनकी धार्मिक भाषा ‘इब्रानी’ (हिब्रू) है |  यहूदी धर्म का जन्म पैगंबर अब्राहम या इब्राहिम से माना जाता है, जो ईसा से लगभग 2000 वर्ष पहले हुए थे |




पैगंबर अब्राहम की दो पत्नियाँ थी और उनकी पहली पत्नी का नाम सराह और दूसरी पत्नी का नाम हाजरा था | दोनों पत्नियों से उन्हें हजरत इसहाक और हजरत इस्माईल नामक दो बेटे हुए | पैगंबर अब्राहम के बेटे के बेटे अर्थात पोते का नाम हजरत याकूब था और याकूब का दूसरा नाम इजरायल था | याकूब ने ही यहूदियों की 12 जातियों को मिलाकर इजराइल राष्ट्र का निर्माण किया था | याकूब के एक पुत्र का नाम यहूदा (जूदा) था, इन्ही के नाम पर इनके वंशज यहूदी कहलाए और उनका धर्म यहूदी धर्म कहलाया |

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यहूदी धर्म का संस्थापक किसे माना जाता है (Founder Of Judaism)

ईसा से लगभग 1 हजार 500 वर्ष पूर्व अब्राहम अलै के बाद यहूदियों की हिस्ट्री में सबसे बड़ा नाम पैगंबर मूसा का माना जाता है | पहले से चली आ रही परम्पराओं को स्थापित करनें के कारण मूसा को ही यहूदी धर्म का संस्थापक माना जाता है। मूसा का जन्म मिस्र के फराओ के समय में हुआ था |  ऐसा माना जाता है, कि मूसा की माताजी नें उन्हें नील नदी में बहा दिया था और वह फराओं की पत्नी को मिले | उन्होंने ने ही इनका पालन पोषण किया और बड़े होनें पर इन्हें मिस्र के राजकुमार बनाया गया | कुछ समय पश्चात इन्हें किसी तरह से ज्ञात हुआ, कि वह एक यहूदी है | हालाँकि उस समय यह धर्म गुलाम था और यहूदियों पर अत्याचार हो रहा था | मूसा नें सभी यहूदियों को एकत्र कर उनमें जीवन के प्रति उत्साह बढ़ाया |

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यहूदी धर्म का पूरा इतिहास (History Of Judaism)

यहूदी धर्म दुनिया से सबसे प्राचीन धर्मों में से एक है और इस धर्म का इतिहास लगभग 4 हजार वर्ष प्राचीन माना जाता है | यहूदी धर्म की शुरुआत पैगंबर अब्राहम द्वारा की गयी थी, हालाँकि पैगंबर अब्राहम को मुस्लिम और ईसाई भी भगवान का दूत मानते है | अब्राहम के पोते का नाम याकूब और इनका दूसरा नाम इजराइल था |  याकूब के कुल 13 संतानें थी, जिसमें 12 पुत्र और एक पुत्री थी |

याकूब के सभी बेटों नें 12 यहूदी कबीले बनाए और सभी यहूदियों को एकत्र कर एक नए राज्य इजराइल का निर्माण किया| चूँकि याकूब के बेटे का नाम यहूदा था, जिसकी वजह से इनके वंशजों को यहूदी कहा गया | यह सभी लोग येरूशलम और यूदा में रहते थे | आज से लगभग 2 हजार 2 सौ वर्ष पूर्व पहला यहूदी राज्य अस्तित्व में आया, जिसमें सोलोमन, इशबाल, साउल और डेविड जैसे कई प्रसिद्द राजा हुए | लगभग 931 ई०पू० में  सोलोमन की मृत्यु के पश्चात इस राज्य का पतन होनें शुरू गया और यह दो भागों में इजरायल और युदा में विभाजित हो गया |    

असीरियाई साम्राज्य नें लगभग 7 सौ ई०पू० येरूशलम पर आक्रमण कर दिया, इस हमले में यहूदियों के दस कबीले निस्तो-नाबूत हो गये|  इसके पश्चात 72 ईसा पूर्व रोमन साम्राज्य ने आक्रमण कर दिया, जिसके कारण सभी यहूदी दुनियाभर के अलग-अलग देशों में जाकर रहनें लगे| रोमन साम्राज्य के इस हमले में किंग डेविड के मंदिर को भी नष्ट कर दिया, हालाँकि इस मंदिर की सिर्फ एक दीवार शेष रही गयी थी, जिसे यहूदी आज भी अपना पवित्र स्थान मानते है | इस दीवार को वेस्टर्न वॉल के नाम से भी जाना जाता है |       

इस घटना के बाद यहूदी पूरी दुनिया में फ़ैल गये | हालाँकि कुछ समय पश्चात दुनिया में यहूदियों को लेकर एक ऐसी अफवाह फैली कि यहूदी इस संसार की सबसे चालाक और धोखेबाज कौम है, यह किसी को भी धोखा दे सकती है | इसके पश्चात अधिकांश यहूदी अमेरिका और यूरोप में बस गए परन्तु यहाँ इन्हें अपनी पहचान सार्वजनिक कर रखनी होती थी | यदि यह लोग अपनी पहचान छुपाने या गलत जानकारी देने पर सजा का प्रावधान रखा गया था |    

इस प्रकार यह सिलसिला थियोडोर हर्जल के जमाने तक चलता रहा | थियोडोर हर्जल को इज़राइल में ठीक उसी तरह माना जाता है, जिस प्रकार भारत में महात्मा गाँधी को |  1860 में जन्में हर्जल एक सोशल वर्कर थे और वह फ़्रांस में पत्रकारिता करते थे | इसी बीच फ्रांस और रूस के बीच युद्ध हुआ जिसमें फ़्रांस की हार हुई और इस हार की पूरी जिम्मेदारी एक यहूदी अधिकारी एल्फर्ड ड्रेफस पर डाल दी गई | हर्जल ने इस घटना को कवर करते हुए यहूदियों के लिए अन्याय बताया और उन्होंने सभी यहूदियों को एकत्र कर नया देश या राज्य बनानें का संकल्प किया| इसके बाद उन्होंने 1897 में स्विटजरलैंड में वर्ल्ड जायनिस्ट कांग्रेस नाम से एक संस्था बनायीं |   

संस्था के बननें के बाद दुनियाभर के यहूदी चंदा देने के साथ ही एकत्र होनें लगे और वह प्रतिवर्ष एक सम्मेलन करनें लगे | इसी बीच वर्ष 1904 में हर्जल की मृत्यु हो गयी परन्तु संस्था का प्रभाव दुनियाभर के यहूदियों तक फ़ैल चुका था |  

तुर्की और उसके निकटवर्ती क्षेत्रो में ऑटोमन साम्राज्य का अधिकार था | वर्ष 1914 में प्रथम विश्वयुद्ध छिड़ गया और इसी दौरान 2 नवंबर 1917 को ब्रिटेन और यहूदियों के बीच बालफोर समझौता हुआ| इस समझौते के अनुसार यदि ब्रिटेन युद्ध में ऑटोमन पराजित कर देता है, तो फलीस्तीन के इलाके में यहूदियों के लिए एक स्वतंत्र देश दिया जाएगा | इस प्रकार दुनिया में फैले यहूदी येरूशलम में एकत्र होनें लगे, परन्तु ब्रिटेन नें अपना वादा पूरा नहीं किया | इस प्रकार यह समझौता लगभग बीस वर्षों तक लागू नहीं हुआ |      

इस दौरान द्वितीय विश्वयुद्ध की शुरुआत हो गयी, जिसमें जर्मनी के मुखिया अडोल्फ हिटलर ने लगभग 60 लाख यहूदियों की योजना बनाकर हत्या कर दी | हालाँकि युद्ध समाप्त होनें पर जब यह बात पूरी दुनिया में सामनें आई, तो पूरी दुनिया की संवेदना यहूदियों के साथ हो गई और 1947 में संयुक्त राष्ट्र संघ ने यहूदियों की वर्षों पुरानी मांग को पूरा किया | संयुक्त राष्ट्र ने कहा कि फलीस्तीन को भागो में विभाजित कर एक भाग यहूदियों को और दूसरा भाग मुस्लिमों को दे दिया जाए और येरूशलम को एक अंतरराष्ट्रीय शहर के रूप में रखा जाए | यहूदी इससे सहमत थे परन्तु मुस्लिम कौम को यह रास नहीं आया | इसी बंटवारे के साथ इज़राइल और फलीस्तीन विवाद शुरू हुआ, जो आज तक जारी है |  

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