टाइम कैप्सूल क्या है

टाइम कैप्सूल एक गुप्त ऐतिहासिक दस्तावेज होता है | यह एक ऐसा ऐतिहासिक दस्तावेज होता है, जिससे प्रमुख रूप से बड़ी इमारतों के नीचे डाला जाता है | वहीं अब इस टाइम कैप्सूल को अयोध्या में राम मंदिर के 200 फीट नीचे एक कंटेनर के रूप में डाला गया है और इससे पहले भी टाइम कैप्सूल को लालकिले के नीचे डलवाया गया था | उस समय इंदिरा ने लालकिले के नीचे इस टाइम कैप्सूल को डलवाया  था | इस टाइम कैप्सूल को एक ऐसे ऐतिहासिक महत्व दस्तावेज के रूप में जाना जाता है, जिसमें किसी काल की सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक स्थिति का उल्लेख किया जाता है | भारत में पहले भी ऐसे टाइम कैप्सूल ऐतिहासिक महत्व की इमारतों की नींव में डाले जा चुके हैं। इसलिए यदि आपको टाइम कैप्सूल के विषय में अधिक जानकारी नहीं प्राप्त है और आप इसके विषय में जानना चाहते है, तो यहाँ पर आपको  टाइम कैप्सूल क्या है , What is Time Capsule Explained in Hindi ? इसकी विस्तृत जानकारी प्रदान की जा रही है | 

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टाइम कैप्सूल का क्या मतलब होता है ?

टाइम कैप्सूल देखने में एक कंटेनर की तरह होता है, जिसे विशिष्ट सामग्रियों से मिलकर बनाया जाता है। टाइम कैप्सूल हर तरह के मौसम का सामना आसानी के साथ कर सकता  है | इसलिए उसे जमीन के अंदर काफी गहराई में दफनाया जाता है। काफी गहराई में होने के बावजूद भी हजारों साल तक न तो उसको किसी भी प्रकार का कोई  भी नुकसान पहुंचता है और न ही उसमें किसी भी तरह की सड़न -गलन उत्पन्न होती है। 30 नवंबर, 2017 में स्पोन के बर्गोस में करीब 400 साल पुराना टाइम कैप्सूल मिला था। यह यीशू मसीह के मूर्ति के रूप में था। मूर्ति के अंदर एक दस्तावेज था, जिसमें 1777 के आसपास की आर्थिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक सूचना थी।

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टाइम कैप्सूल से सम्बंधित महत्वपूर्ण जानकारी 

जब 1973 में इंदिरा गांधी की सरकार थी | उस समय भी लालकिले की नींव में ऐसा ही एक टाइम कैप्सूल डाला गया था। उसी समय इस टाइम कैप्सूल का नाम कालपत्र रख दिया गया था। विपक्ष के लोगों ने आरोप लगाया था कि, इस कालपत्र में इंदिरा ने अपने परिवार का महिमामंडन किया है और अब इस टाइम कैप्सूल को अयोध्या में राम मंदिर के 200 फीट नीचे एक कंटेनर के रूप में डाला गया है, जिसे वर्तमान समय में अब नरेंद्र मोदी जी के कार्यकाल में डाला गया है |

इंदिरा गांधी की सरकार चाहती थी कि, आजादी के 25 साल बाद की स्थिति को बहुत ही अच्छे से संभालकर रखा जाए। इसके लिए टाइम कैप्सूल बनाने का आइडिया पर विचार -विमर्श किया गया | आजादी के बाद 25 सालों में देश की उपलब्धि और संघर्ष के बारे में उसमें उल्लेख किया जाना था। इंदिरा गांधी की सरकार ने उस टाइम कैप्सूल का नाम कालपात्र रख दिया था।  

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15 अगस्त 1973 को लाल किले में दफन किया

कहा जाता है कि, प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने 15 अगस्त, 1973 को इसे लाल किले के परिसर में दफन किया था। इसके बाद इस कालपात्र पर विवाद की स्थितियां बनने लगीं।

इंदिरा गांधी पर वंश का महिमामंडन करने का आरोप

इस कालपात्र को लेकर उस समय बहुत ही अधिक हंगामा मचाया गया था। विपक्ष का कहना था कि, इंदिरा गांधी ने टाइम कैप्सूल में अपना और अपने वंश का महिमामंडन किया है। ” वहीं, जनता पार्टी ने चुनाव से पहले लोगों से वादा किया कि, पार्टी कालपात्र को खोदकर निकालेगी और देखेगी कि इसमें क्या है।

PMO ने कहा- हमें टाइम कैप्सूल के बारे में पता नहीं

साल 2013 में इकनॉमिक्स टाइम्स में छपी एक खबर के मुताबिक, प्रधानमंत्री कार्यालय ने टाइम कैप्सूल के  विषय में जानकारी होने से साफ इनकार कर दिया गया था। लेखक मधु पूर्णिमा किश्वर ने इस संबंध में सूचना मांगी थी। पीएमओ के जवाब पर उस समय के मुख्य सूचना आयुक्त सत्यनंद मिश्रा ने भी हैरत का इजहार करते हुए  कहा था कि, टाइम कैप्सूल के बारे में जब दफनाने की बात कही जा रही है, उस दौरान अखबारों में इस बारे में काफी कुछ छपा था। उसके बावजूद पीएमओ का यह जवाब हैरान करने वाला है।  

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