उत्तर प्रदेश गो-वध निवारण अध्यादेश क्या है

उत्तर प्रदेश सरकार राज्य में बढ़ती गौ – हत्या के मामलें देखते हुए नया कानून लेकर आयी है | जिससे अब गौ हत्या अब बड़ा अपराध माना जायेगा | अभी तक प्रदेश में गौ – हत्या के काफी मामलें सामने आये थे, अब गौ – हत्या करने पर नियंत्रण पाया जा सकेगा | इसके लिए योगी सरकार अध्यादेश लेकर आयी है | अभी तक राज्य में गायों को नुकसान पहुंचाने वालों पर सजा का कोई प्रावधान नहीं था। लेकिन अब इसमें एक वर्ष से लेकर सात वर्ष तक की सजा का नियम लागू किया गया है। सरकार द्वारा इसके लिए लाये गए अध्यादेश से अब गोवंशीय पशुओं को हानि पहुंचाने व उनके गैरकानूनी व अनियमित परिवहन पर अंकुश लग सकेगा, जिससे हत्या करने वालों पर लगाम लगेगी। इसके लिए सूबे की उत्तर प्रदेश सरकार गो-वध निवारण (संशोधन) अध्यादेश-2020 लाने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में कैबिनेट बैठक में इसके लिए मंजूरी प्रदान कर दी है। अब जल्द ही विधानमंडल सत्र के शुरू होने पर इसे विधेयक के रूप में दोनों सदनों में पास करवाया जाएगा। यदि आप भी उत्तर प्रदेश गो-वध निवारण (संशोधन) अध्यादेश क्या है, सज़ा और जुर्माना के प्रावधान क्या रखा गया है, इसके विषय में जानना चाहते है तो यहाँ पर पूरी विस्तृत जानकारी दी जा रही है |

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गोकशी पर सजा का प्रावधान

यदि उत्तर प्रदेश राज्य में कोई भी व्यक्ति या संस्था धारा -3, धारा-5 या धारा-5 ‘क’ के उपबन्धों का उल्लंघन करते हुए पाया जाता है या फिर इसके उल्लंघन का प्रयास करता है, इसके अलावा यदि उल्लंघन करने के लिए उकसाने का प्रयास करता है, तो उसे 3 साल से 10 साल की सजा दिए जाने का प्रावधान बनाया गया है। इसके लिए जुर्माना भी रखा गया है जिसके लिए राशि तीन लाख से पांच लाख तक की निर्धारित की गई है। यदि एक बार वह दोषी हो जाता है और उसके बाद भी पुन: अपराध करते पाया जाता है तो उसके लिए दोहरा दंड विधान लागू किया जाएगा। ऐसा अपराध करने वाले अपराधियों का नाम, फोटोग्राफ, उसका निवास स्थल है, इस प्रकार की सभी जानकारी प्रकाशित की जाएँगी।

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सरकार द्वारा मिली जानकारी

मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक उत्तर प्रदेश के अपर मुख्य सचिव अवनीश कुमार अवस्थी से मिली जानकारी अनुसार बताया गया कि “राज्य कैबिनेट ने साल 1955 के इस क़ानून में संशोधन के प्रस्ताव को मंज़ूरी दे दी है. राज्य विधानमंडल का सत्र न होने की वजह से उत्तर प्रदेश गोवध निवारण (संशोधन) अध्यादेश, 2020 लाने का फ़ैसला लिया गया है” |

इसके अलावा बताया कि अध्यादेश का मक़सद उत्तर प्रदेश गोवध निवारण क़ानून, 1955 को और अधिक संगठित और प्रभावी बनाना तथा गोवंशीय पशुओं की रक्षा और गोकशी की घटनाओं से संबंधित अपराधों पर पूरी तरह से लगाम लगाना है |

इसके अतरिक्त जानकारी दी कि “उत्तर प्रदेश गोवध निवारण अधिनियम, 1955 दिनांक 6 जनवरी, 1956 को राज्य में लागू हुआ था और उसी साल इसकी नियमावली बनी थी. इस क़ानून में अब तक चार बार और नियमावली में दो बार संशोधन हो चुका है ” |

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गोमांस निकलने पर होगी कार्रवाई

यदि सक्षम प्राधिकारी या प्राधिकृत प्रयोगशाला में गोमांस पाया जाता है तो चालक, वाहन मालिक व आपरेटर पर अधिनियम के प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जाएगी। यदि इस दौरान पुष्टि हुई कि  परिवहन के साधन की समस्त सावधानियों के होते हुए, उसकी संज्ञान के बिना अपराध में प्रयुक्त परिवहन के साधन का प्रयोग अपराध करने में किसी अन्य व्यक्ति द्वारा किया जाता है तो उसे इस दायरे से बाहर रखा जायेगा ।

गाय बरामद होने पर नियम

यदि किसी के पास गलत गतिविधियों के लिए गाय बरामद होती है तो वह गाय के स्वामी को लौटाकर अपराधी को गोवंश के भरण-पोषण पर व्यय के लिए एक वर्ष की अवधि तक का खर्च देना होगा |

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यहाँ आपको उत्तर प्रदेश गो-वध निवारण (संशोधन) अध्यादेश के विषय में जानकारी उपलब्ध कराई है | यदि इस जानकारी से संतुष्ट है, या फिर इससे समबन्धित अन्य जानकारी प्राप्त करना चाहते है तो कमेंट करके अपना सुझाव दे सकते है, आपकी प्रतिक्रिया का जल्द ही उत्तर दिया जायेगा | अधिक जानकारी के लिए hindiraj.com पोर्टल पर विजिट करते रहे |

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