CAA, CAB का क्या मतलब होता है



इस समय देश भर में CAA और NRC को लेकर कोहराम मचा हुआ है | मोदी सरकार और उसके समर्थक जहां इसे ऐतिहासिक कदम बताते हुए इसका स्वागत कर रहे हैं, वहीं विपक्ष और मुस्लिम संगठन और कई कैंपसों में छात्र इसका विरोध कर रहे हैं | जबकि सरकार का कहना है, कि इसका एक भी प्रावधान संविधान के किसी भी हिस्से की किसी भी तरह से अवहेलना नहीं करता है।

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संशोधित नागरिकता कानून के खिलाफ प्रदर्शन पर लगी रोक के बावजूद सड़कों पर उतरने के चलते सैकड़ों छात्रों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और विपक्षी नेताओं को हिरासत में लिया गया, जबकि कई इलाकों में मोबाइल इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी गईं। कई मेट्रो स्टेशनों को भी बंद कर दिया गया, जिससे शहर में यातायात प्रभावित हुआ। तो आइए विस्तार से जानते हैं कि CAB, CAA क्या है?

एनआरसी (NRC) क्या होता है

सीएए, सीएबी फुल फार्म (CAA, CAB Full Form)

सीएए को सिटीजनशिप अमेंडमेंट एक्ट अर्थात नागरिकता संशोधन अधिनियम कहते है | इसे अंग्रेजी में Citizenship Amendment Act कहते है, जिस समय Citizenship Amendment Bill पास होनें से पहले सीएबी था| संसद में पास होने और राष्ट्रपति की मुहर लगने के बाद यह बिल नागरिक संशोधन कानून (CAA, Citizenship Amendment Act) एक्ट बन गया है | सिटीजनशिप अमेंडमेंट एक्ट की मदद से पाकिस्तान, अफगानिस्तान, बांग्लादेश में धार्मिक उत्पीड़न के कारण वहां से भागकर आए हिंदू, ईसाई, सिख, पारसी, जैन और बौद्ध धर्म के लोगों को भारत की नागरिकता दी जाएगी |



सीएए क्या है (CAA Kya Hai)

सीएए अर्थात सिटीजनशिप अमेंडमेंट एक्ट की सहायता से अब पाकिस्तान, अफगानिस्तान, बांग्लादेश के हिंदू, ईसाई, सिख, पारसी, जैन और बौद्ध धर्म के लोग जिन्होंने 31 दिसंबर 2014 की निर्णायक तारीख तक भारत में प्रवेश कर लिया था, वे सभी भारत की नागरिकता के लिए पात्र होंगे |

सीएबी क्या है  (CAB Kya Hai)

सीएबी अर्थात सिटीजनशिप अमेंडमेंट एक्ट (Citizenship Amendment Bill) संसद में पास होकर राष्ट्रपति की मुहर लगने के बाद अब कानून बन गया है | इस कानून से असम के आदिवासी इलाके और मेघालय, मिजोरम या त्रिपुरा के अलावा अरुणाचल प्रदेश, मिजोरम व नागालैंड को बाहर रखा गया है |

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देश में विरोध का कारण

इस एक्ट की सहायता से पाकिस्तान, अफगानिस्तान, बांग्लादेश से आये हिंदू, ईसाई, सिख, पारसी, जैन और बौद्ध धर्म के लोगों को भारत की नागरिकता दी जाएगी, परन्तु इस एक्ट में इस्लाम धर्म के लोगों को शामिल नहीं किया गया है | नागरिकता संशोधन बिल के कानून बनने के बाद अब पाकिस्तान, अफगानिस्तान, बांग्लादेश के हिंदू, ईसाई, सिख, पारसी, जैन और बौद्ध धर्म के वो लोग जिन्होंने 31 दिसंबर 2014 तक भारत में प्रवेश कर लिया था, वह सभी भारत की नागरिकता के लिए आवेदन कर सकेंगे | इस कानून के विरोधियों का कहना है, कि इसमें सिर्फ गैर मुस्लिम लोगों को नागरिकता देने की बात कही गई है, इसलिए यह  धार्मिक भेदभाव वाला कानून है, जो कि संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लंघन है |

सीएए पर सुप्रीम कोर्ट में क्या हुआ (Supreme Court on CAA)

नागरिकता संशोधन कानून, 2019 की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली सभी 59 याचिकाओं पर कोर्ट ने संज्ञान लिया| कोर्ट ने नागरिकता कानून पर स्टे लगाने से स्पष्ट रूप से मना कर दिया है | कोर्ट ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया है, अब मामले की सुनवाई 22 जनवरी 2020 को होगी |

अवैध प्रवासी कौन है  (Who is Illegal Migrant)

वैध पासपोर्ट या यात्रा दस्तावेजों के बिना भारत में प्रवेश करने वाले लोग या वैध दस्तावेजों के साथ प्रवेश करने वाले ऐसे लोग जो स्वीकृत अवधि के बाद भी वापस नहीं गए हैं, वह सभी अवैध प्रवासी हैं|

सूचना का अधिकार अधिनियम (RTI)

नए कानून के अनुसार अवैध प्रवासी (Illegal Migrants According To New Law)

अफगानिस्तान, बांग्लादेश या पाकिस्तान से आने वाले सभी हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी या ईसाई जो दिसंबर 2014 से पहले भारत में प्रवेश कर चुके हैं, उन्हें अवैध प्रवासी नहीं माना जाएगा| उनके अलावा वैध पासपोर्ट या यात्रा दस्तावेजों के बिना भारत में प्रवेश करने वाले लोग या वैध दस्तावेजों के साथ प्रवेश करने वाले वो लोग जो स्वीकृत अवधि के बाद भी वापस नहीं गए हैं, वह  सभी अवैध प्रवासी हैं |

एनआरसी और सीएए (NRC & CAA)

अभी एनआरसी सिर्फ असम में लागू है, जबकि सीएए देशभर में लागू होगा। एनआरसी अभी तक राज्य विशेष में लागू है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर नस्ली विशिष्टता को बनाए रखने के लिए एनआरसी असम में लागू किया गया है, जिसके अंतर्गत राज्य से अवैध अप्रवासियों को बाहर करने के लिए कहा गया है। असम के अतिरिक्त यह किसी भी लागू नहीं है ।

जबकी सीएए CAA (नागरिकता संशोधन कानून) राष्ट्रव्यापी है, और यह पूरे भारत में लागू किया गया है । हालांकि कई राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने इसका विरोध करते हुए उनके राज्य में इस कानून को लागू नहीं करने की बात कही है, परन्तु संविधान के अनुसार इसे लागू किए जाने पर अंतिम निर्णय केंद्र सरकार का है।

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