सर्दियों (शीत ऋतु) के फूलों के नाम

मानव जीवन में प्रकृति का बहुत ही अधिक योगदान है, प्रकृति ने मानव और जीव-जंतुओं के लिए पेड़-पौधें और पुष्पों का निर्माण किया है, इन पुष्पों का रंग अपने बीज के अनुरूप होता है | भारत में लगभग सभी प्रकार की ऋतुएँ पायी जाती है | ऋतुओं के अनुरूप ही पुष्प भी पाएं जाते है | शीत ऋतु में सबसे अधिक फूल के पौधें लगाएं जाते है | यह ऋतु इन पौधों के लिए अनुकूल पायी जाती है | यहां पर आपको शीत ऋतु में लगायें जाने वाले फूल के पौधों के विषय में जानकारी दी जा रही है |

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सर्दियों (शीत ऋतु) के फूलों के नाम (Names of Winter Flowers)

शीत ऋतु में अन्य ऋतुओं की अपेक्षा अधिक फूल पाएं जाते है | इनके पौधें सितंबर से अक्टूबर के महीने तक लगाएं जाते है | भारत में कई फूल राज्यों में पायी जाने वाली मिट्टी के अनुसार होते है, कुछ विशेष फूलों के नाम इस प्रकार है-

स्वीट एलाइसमएंटरहिनमकैलेंडुला
एस्टरकार्न फ्लावरस्वीट सुलतान
क्राईसेंथेमसकॉसमासडहलिया
लार्कस्परडायन्थसकार्नेशन
स्वीट विलियमकैलिफोर्निया पॉपीकैन्डीटफ्ट
स्वीटपीपेटूनियापॉपी

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शीत ऋतु में कौन से फूल के पौधे (Flower Plants) लगाए

आप शीत ऋतु के समय इस प्रकार के पौधें लगा सकते है-

फूल का नामप्रसारण विधिफूल लगने का समय
एक्रोक्लाईनमबीज3
हॉली हॉकबीज3-4
स्वीट एलाईसमबीज/बिचड़ा1.5-2
एन्टरहिनमबिचड़ा2.5-4
आर्कटोटिसबिचड़ा3-4
कैलेन्डुलाबिचड़ा2-3
एस्टरबिचड़ा3-4
कार्नफ्लावरबिचड़ा/बीज3.3.5
स्वीट सुल्तान या कार्नफ्लावरबिचड़ा/बीज3-3.5
एनुअल क्राईसैन्थेममबिचड़ा/बीज3
कॉसमॉसबिचड़ा/बीज2-3
डहलियाबीज, कर्त्तन एवं कंद3.3.5
लार्कस्परबिचड़ा/बीज3.3.5
डायंथसबिचड़ा/बीज3-4
कार्नेशनबिचड़ा/बीज3-4
हेलिक्राईसमबीज3-3.5
कैंडीटफ्टबीज2-2.5
स्वीट पीबीज3
लाईनेरीयाबीज3
मेसेम्व्रेन्थम (आइस प्लान्ट)बिचड़ा/बीज3
पिटुनियाबीज/बिचड़ा3
फ्लाक्सबीज/बिचड़ा3-3.5
कैलिफोर्निया पॉपीबीज/बिचड़ा3-3.5
शार्ली पॉपीबीज/बिचड़ा2-2.5
अफ़्रीकी गेंदाबीज/बिचड़ा3
फ्रेंच गेंदाबीज/बिचड़ा2.5.-3
सालवियाबीज/बिचड़ा3
नास्टरशियमबीज2.5.-3
वरबीनाबीज2.5.-3
पैन्जीबीज/बिचड़ा2.5.-3
गजेनियाबिचड़ा3
क्लीयोमबिचड़ा2-3
सिनरेरियाबिचड़ा2-3
एजरेटमबिचड़ा2
डाइमाफोर्थिकाबिचड़ा3
ल्यूपिनबिचड़ा2-3
पोटुलाकाबीज2

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पौधों की देखभाल (Plant Care)

पौधों को लगाने के बाद इनकी उचित देखभाल करने की आवश्यकता होती है, जिससे पौधों को सही समय पर पोषक तत्व मिल सके | पौधे लगाने के पश्चात क्यारियों में समय-समय पर निकलने वाली घास को बाहर निकालते रहना चाहिए | पौधें अपना पोषक तत्व धूप, मिट्टी और पानी से प्राप्त करते है अतः इन सभी की पूर्ति करना अत्यंत आवश्यक है |

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