मुद्रा विनिमय (Currency Swap) क्या होता है

मुद्रा विनिमय (Currency Swap)  दो पक्षों के मध्य एक मुद्रा में ऋण के विनिमय संबंधी पहलुओं (मतलब कि मूलधन और ब्याज के भुगतान) का किसी अन्य मुद्रा में ऋण के शुद्ध वर्त्तमान मान वाले समतुल्य पहलुओं हेतु एक विदेशी मुद्रा विनिमय अनुबंध होता है। विदेशी मुद्रा डेरिवेटिव. मुद्रा विनिमय तुलनात्मक लाभ के माध्यम से प्रेरित होते हैं। इसके अलावा मुद्रा विनिमय को केंद्रीय बैंक के नकदी विनिमय से अलग माना जाना चाहिए | अगर इसे सीधे शब्दों में कहा जाए तो पूरे विश्व में अदला-बदली का अर्थ ही विनिमय करना होता है। यदि आप भी मुद्रा विनिमय (Currency Swap) क्या होता है, इसके विषय में जानना चाहते है, तो यहाँ पर पूरी जानकारी दी जा रही है |

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मुद्रा विनिमय (Currency Swap) का इतिहास

मुद्रा विनिमय (Currency Swap) का निर्माण 1970 में यूनाइटेड किंगडम में विदेशी मुद्रा नियंत्रणों से बचने हेतु किया गया था । उस वक्त, ब्रिटेन की कंपनियों को अमेरिकी डॉलर का कर्ज प्राप्ति हेतु प्रीमियम (किस्त) का भुगतान करना होता था। इससे स्वयं को बचाने के लिए, ब्रिटेन की कंपनियों ने स्टर्लिंग चाहने वाली संयुक्त राज्य अमेरिका की कंपनियों के साथ कई ऋण समझौते किए | लेकिन अब मुद्रा विनिमय पर इस प्रकार के प्रतिबंध दुर्लभ हो चुके हैं, तुलनात्मक फायदे की वजह से ऋण से अभी भी बचत उपलब्ध हैं |

मुद्रा ब्याज दर विनिमय (Currency Swap) वर्ष 1981 में विश्व बैंक (World Bank) द्वारा आईबीएम (IBM) के साथ नकद प्रवाह का विनिमय कर स्विस फ़्रैंक और जर्मन मार्क प्राप्ति हेतु किया गया। इस सौदे के लिए सालोमन ब्रदर्स ने 210 मिलियन डॉलर्स की अनुमानित राशि एवं दस वर्षों से अधिक के लिए समझौते पर हस्ताक्षर किये।

मुद्रा विनिमय (CURRENCY SWAP) के कारण

  • ज्यादातर मामलों में इसका प्रयोग अस्थिर विदेशी मुद्रा बाजार और विनिमय दर के जोखिम से बचने हेतु करते है।
  • स्वदेशी मुद्राओं के मूल्यह्रास से विदेशी मुद्रा में कमी आती है, विनिमय समझौते की वजह इससे बचने में सहायता प्राप्त होती है और विदेशी मुद्रा की भण्डारण सुनिश्चित होता है।
  • यह अल्पावधि विदेशी मुद्रा चलनिधि आवश्यकताओं को पूरा करने में मदद करता है या तब तक पर्याप्त विदेशी मुद्रा सुनिश्चित करने के लिए भुगतान संतुलन (बीओपी) संकट से बचने के लिए जब तक कि व्यवस्था नहीं की जा सकती है।

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मुद्रा विनिमय (CURRENCY SWAP) की प्रणाली या नियम

  1. अगर कोई कंपनी पहले ही अपनी आवश्यकताओं के मुताबिक मूलधन वाली मुद्राओं में कर्ज (ऋण) ले लिया है, तो जोखिम को केवल नकद प्रवाह के विनिमय से ही कम किया जा सकता है, जिससे कि सभी कंपनी की वित्तीय लागत उस कंपनी की घरेलू मुद्रा में हो |
  2. यह भी विकल्प दिया जाता है कि, कंपनियां अपने स्वयं के घरेलू मुद्राओं में कर्ज (ऋण) प्राप्त कर सकती हैं अर्थात ऐसा करने में प्रत्येक का तुलनात्मक लाभ मिल सकता है और ऐसी स्थिति में मूलधन के विनिमय के से अपनी वांछित मुद्रा में मूलधन मिल सकता है।

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