वेंटिलेटर क्या होता है

मेडिकल डेपार्टमेंट में वेंटिलेटर एक मशीन का नाम है जिसके द्वारा मरीजों की जिंदगी बचाई जाती है | इसका कार्य जिन लोगों को सांस लेने में समस्या आती है या स्वयं सांस नहीं ले पाते हैं। किसी समय बीमारी में यदि किसी कारणवश फेफड़े अपना कार्य करने में सक्षम नहीं होते हैं तब यह प्रक्रिया वेंटिलेटर द्वारा सांस लेने की समस्या में मददगार सिद्ध होते हैं। इस सबके बीच डॉक्टर फेफड़ों का इलाज करके दोबारा काम करने लायक बना देते हैं। इसलिए वेंटिलेटर का चिकित्सा के क्षेत्र में विशेष महत्व है | देश के लगभग सभी बड़े अस्पतालों में वेंटिलेटर की सुविधा जरूर उपलब्ध रहती है | यदि आप भी वेंटिलेटर क्या होता है, Ventilator कैसे काम करता है, बाजार में वेंटिलेटर की कीमत कितनी है, इसके बारे में जानकारी प्राप्त करना चाहते है, तो पूरी जानकारी दी जा रही है |

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वेंटिलेटर के प्रकार

चिकित्सा विभाग में वेंटिलेटर मुख्यतः दो प्रकार के होते हैं, पहला मेकेनिकल वेंटिलेशन और दूसरा नॉन इनवेसिव वेंटिलेशन होता है। मेकेनिकल वेंटिलेटर के ट्यूब को बीमार व्यक्ति की सांस नली से जोड़ दिया जाता है, जो फेफड़े तक ऑक्सीजन पहुंचाने का कार्य करता है। वेंटिलेटर का कार्य मरीज के शरीर से कार्बन डाइ ऑक्साइड को बाहर निकालना होता है और ऑक्सीजन को अंदर भेजने का कार्य होता है। नॉन इनवेसिव वेंटिलेटर को सांस नली से नहीं जोड़ा जाता है, बल्कि उससे मुंह और नाक को मास्क की तरह पूरी तरह कवर कर दिया जाता है जिसके द्वारा यह प्रक्रिया सम्पन्न होती है।

कार कंपनियां क्यों बना रही है वेंटिलेटर

दुनिया की दिग्गज कार कंपनी जनरल मोटर्स ने वेंटिलेटर बनाना आरम्भ कर चुकी है। वहीं, अब भारत की दिग्गज कंपनी महिंद्रा, मारुति, रिलायंस भी वेंटिलेटर का उत्पादन कर रही हैं। अभी तक देश में कोरोना संक्रमितों की संख्या 2 हजार से भी कम है, परन्तु वायरस और अधिक फैलता है तो वेंटिलेटर्स की जरूरत बढ़ सकती है। अभी भारत कोरोना वायरस भारत में विदेश से लौटे लोग और उनके संपर्क में आए लोगों तक पहुँच चुका है। परन्तु भारत अपनी तैयारी में जुटा है, कि वायरस समाज में और अधिक न फैल पाए, यदि और फैलता है तो उसके लिए पर्याप्त वेंटिलेटर की व्यवस्था की जाए । देश में कोरोना वायरस के पहले इतने वेंटिलेटर्स की मांग नहीं थी। अब अचानक से इसकी मांग अधिक हो गई है, जिससे इसके उत्पादन में बढ़ोत्तरी की गई। ऐसी स्थिति में कार कंपनियां भी अपने संसाधनों का उपयोग करके वेंटिलेटर बनाने की शुरआत कर रही हैं।

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Ventilator कैसे काम करता है

कभी भी वेंटिलेटर पर ले जाने से पूर्व मरीज को एनेस्थीसिया दिया जाता है। अन्य मामलों में यह प्रक्रिया आम होती है परन्तु कोरोना संक्रमण में अधिक सावधानी बरती जाती है क्योंकि अगर ऐसा नहीं किया जाता है तो मेडिकल स्टाफ में इंफेक्शन फैलने का खतरा बढ़ जाता है। इस प्रक्रिया मरीज के शरीर में ऑक्सीजन देने के लिए नली लगाई जाती है और सांस नली को वेंटिलेटर से जोड़ दिया जाता है फिर समय-समय पर जरूरत के अनुसार मेडिकल स्टाफ एयर का लेवल बढ़ाता है ताकि ऑक्सीजन फेफड़ों तक पहुँच पाए।

बाजार में वेंटिलेटर की कीमत कितनी है

भारत के अस्पतालों में वेंटिलेटर की कमी का एक कारण इसकी कीमत भी है। वेंटिलेटर की भारत में कीमत बहुत अधिक होती है। भारत में वेंटिलेटर की कीमत 5 से 10 लाख रुपये तक हो सकती हैं। हालांकि, भारत की महिंद्रा एंड महिंद्रा कम्पनी ने हाल ही में दावा किया है कि कंपनी महज 7500 रुपये में वेंटिलेटर का निर्माण करेगी, जिससे देश के हॉस्पिटल्स में वेंटिलेटर की समस्या का निवारण किया जा सके।  

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