धनतेरस (Dhanteras) क्या होता है ?



धनतेरस हिन्दू धर्म में मनाये जाने वाले प्रसिद्ध त्योहारो में एक प्रमुख त्यौहार है | धनतेरस का त्योहार दीपावली की शुरूआत माना जाता है। कार्तिक कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि के दिन भगवान धन्वन्तरि का जन्म हुआ था | जिसके कारण इस तिथि को ‘धनत्रयोदशी’ या ‘धनतेरस’ के नाम से जाना जाता है | धनतेरस के दिन मां लक्ष्मी, कुबेर और धनवंतरी की पूजा की जाती है | धनतेरस का दिन बहुत ही शुभ माना जाता है, हिन्दू धर्म की मान्यता के अनुसार धनतेरस का दिन अपनें धन को  तेरह गुना वृद्धि करनें का दिन होता है |



धनतेरस का दिन खरीदारी करने के लिए सबसे अच्छा और शुभ दिन माना जाता है | इस दिन झाडू, गहने, बर्तन, सोना-चांदी आदि चीज़े खरीदनें की प्रथा है | धनतेरस (Dhanteras) क्या होता है ?  इसके बारें में जानकारी देने के साथ ही आपको यहाँ धनतेरस का त्यौहार क्यों मनाया जाता है और इसके महत्व के बारें में जानकारी प्रदान की जा रही है | 

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धनतेरस क्या होता है (What is Dhanteras)

Dhanteras Kya Hota Hai: धनतेरस को धनत्रयोदशी (Dhantrayodashi) और धन्वंतरि जयंती (Dhanwantri Jayanti) के नाम से भी जाना जाता है | धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, दीपावली से 2 दिन पहले धनतेरस को भगवान धन्वंतरि के जन्म दिवस को धनतेरस के रूप में मनाया जाता है | जब भगवान धन्वंतरि प्रकट हुए थे तब उनके हाथ में अमृत से भरा कलश था | भगवान धन्वंतरि को आयुर्वेद का देवता (God of Ayurveda) माना जाता है, और इस दिन भगवान धन्वंतरि की पूजा करना बहुत ही शुभ माना जाता है | नाम के अनुरूप धनतेरस का त्यौहार कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को मनाया जाता है। इस दिन से दीपावली के 5 दिन के उत्सव की शुरूआत मानी जाती है। इस साल धनतेरस का त्योहार 23 अक्टूबर, दिन रविवार को मनया जाएगा ।



धनतेरस का त्यौहार क्यों मनाया जाता है (Why is The Festival of Dhanteras Celebrated)

Dhanteras Kyu Manaya Jata Hai: कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी को धनतेरस का त्योहार मनाया जाता है | इस बार धनतेरस का त्यौहार 2 नवंबर 2021 दिन मंगलवार को मनाया जायेगा | धनतेरस के शुभ दिन लोग झाड़ू से लेकर सोना-चांदी, बर्तन आदि की खरीदारी की जाती है। शास्त्रों के अनुसार, समुंद्र मंथन के दौरान भगवान धन्वंतरि हाथों में कलश लिए समुंद्र से प्रकट हुए थे।

दरअसल भगवान धन्वंतरि को भगवान विष्णु का रूप माना जाता है | भगवान धन्वंतरि के प्रकट होने के उपलक्ष्य में धनतेरस का पर्व मनाया जाता है। चूँकि भगवान धन्वंतरि को आयुर्वेद का देवता माना जाता है इसलिए यह पर्व धन के साथ-साथ स्वास्थ्य से भी जुड़ा हुआ है।

धन की प्राप्ति के लिए इस दिन कुबेर की पूजा-अर्चना की जाती है जबकि आरोग्य रहनें के लिए भगवान धनवन्तरि की पूजा की जाती है। इस दिननए बर्तन, सोने-चांदी के आभूषण आदि की खरीदारी करनें की प्रथा है | खासकर धनतेरस के दिन वाहन,कपड़े, संपत्ति,झाड़ूबर्तन आदि खरीदने का विशेष महत्व माना जाता है।

धनतेरस का महत्व (Importance of Dhanteras)

Dhanteras Ka Mahatva in Hindi: हिंदू धर्म में धनतेरस के दिन की पूजा और नई चीज़े खरीदनें को अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है | लोगो का ऐसा मानना है, कि इस दिन कोई नई वस्तु खरीदने से उसमें तेरह गुना की वृद्धि होती है। खासकर धनतेरस के दिन बर्तन खरीदनें पर अधिक महत्व दिया जाता है | इसका मुख्य कारण यह है, कि जब भगवान धन्वंतरि प्रकट हुए तो उनके हाथ में कलश रुपी एक बर्तन था |  भगवान धन्वंतरि को तांबे की धातु के साथ ही उन्हें पीला रंग पसंद है, जिसके कारण लोग इस दिन तांबे या चांदी के बर्तन खरीदने पर अधिक महत्व देते है।

इसके साथ ही इस दिन यमराज की पूजा करनें के साथ ही उनके नाम से दीपक भी जलाया जाता है । लोगो को ऐसी मान्यता है, कि यमराज की पूजा करनें और दीप जलाने से घर में कभी किसी को अकाल मृत्यु नहीं आती है | धनतेरस के दिन व्यापारी वर्ग अपने गल्ले में धन रखते हैं, क्योंकि ऐसा माना जाता है कि इस दिन लक्ष्मी जी प्रकट हुई थीं और उस समय उनके हाथों में एक पैसा था। ऐसा माना जाता है, कि गल्ले को खुला रखने से व्यवसाय में कभी भी हानि नहीं होती है।

धनतेरस का त्यौहार कैसे मनाया जाता है (How is Dhanteras Celebrated)

Dhanteras Kaise Manaya Jata Hai: धनतेरस के दिन लोग अपनी आर्थिक स्थिति के अनुसार नए-नए बर्तन खरीदते हैं। यहाँ तक कि लोग इस दिन लोग वाहन, सोना या चांदी का सामान खरीदते हैं। इसके साथ ही धनतेरस के दिन लोग दीपावली की पूजा के लिए सामग्री जैसे- लक्ष्मी-गणेश की मूर्तियाँ, नारियल, कपड़े, दीपक, झाड़ू आदि खरीदते है | 

धनतेरस के दिन सायं काल में लोग अपनें घरों में पूरे विधि-विधान के साथ भगवान धन्वंतरि, लक्ष्मी-गणेश, कुबेर, यमराज की पूजा करनें के साथ ही सभी देवतागणों को मिठाई और पुष्प चढ़ाए जाते हैं | इसके साथ ही सभी देवताओं के नाम से दीप प्रज्जवलित किये जाते है | धनतेरस को मुख्य रूप से दीपावली की शुरुआत माना जाता है, इसीलिए इस दिन कई लोग पटाखे भी जलाते हैं।

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धनतेरस की पूजा विधि (Dhanteras Worship Method)

धनतेरस के दिन शाम को पूजा करने का समय अत्यधिक उत्तम माना जाता है | इस दिन भगवान धन्वंतरि और भगवान कुबेर की मूर्तियों को उत्तर दिशा की ओर पूजा स्थल में स्थापित करनें के साथ ही भगवान गणेश और लक्ष्मी जी की मूर्ति स्थापित की जाती है |  दरअसल ऐसी मान्यता है, कि धनतेरस के दिन दक्षिण दिशा में दीपक जलाने से अकाल मृत्यु का भय नहीं रहता है।

ऐसी मान्यता है, कि भगवान धन्वंतरि को पीला रंग अत्यधिक पसंद है | इस वजह से भगवान धन्वंतरि को पीली मिठाई और भगवान कुबेर को सफेद मिठाई का भोग लगाया जाता है | लोगो का मानना है, कि पूजा में फल और फूलों के अलावा चावल, दाल, रोली, चंदन, धूप आदि का इस्तेमाल करना अत्यंत लाभाकरी होता है | धनतेरस के दिन भगवान यमराज को श्रद्धा पूर्वक प्रणाम करना चाहिए और उनके नाम से एक दीपक अवश्य जलाना चाहिये |  

धनतेरस की पूजा के लिए सबसे पहले आपको चौकी परलाल रंग का कपड़ा बिछाकर उसमें पवित्र गंगाजल छिड़क कर भगवान धन्वंतरि, माता लक्ष्मी और भगवान कुबेर की मूर्तियाँ स्थापित करे | सभी देवताओं के सामने घी का दीपक जलाने के साथ ही धूप और अगरबत्ती भी जलाये | इसके पश्चात भगवान को पुष्प अर्पित करने के साथ ही आपने जो भी नया बर्तन, ज्वेलरी आदि की खरीददारी की है उन्हें चौकी पर रखें | पूजा के दौरान “ॐ ह्रीं कुबेराय नमः” का जाप करें | इसके पश्चात धनवंतरि स्तोत्र का पाठ करनें के बाद लक्ष्मी स्तोत्र और लक्ष्मी चालीसा का पाठ करें |

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