भगवान विष्णु के अवतार कितने हैं ?



त्रिदेवों में गिने जाने वाले भगवान श्री विष्णु कभी धरती पर श्री कृष्ण बनकर आते हैं तो कभी रावण जैसे अहंकारी का संहार करने के लिए श्री राम बनकर आते हैं, तो कभी लोगों को ज्ञान देने के लिए कपिल मुनि बनकर आते हैं। 

इस प्रकार समय-समय पर विष्णु जी के द्वारा अलग-अलग अवतार लिए जाते रहे हैं, जिनका प्रमुख उद्देश्य है धरती पर धर्म की स्थापना और ज्ञानियों को ज्ञान देना। इस आर्टिकल में आज हम Bhagwan Vishnu Ke Avatar Naam जानेंगे। 

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भगवान श्री विष्णु के कितने अवतार हैं ? 

Incarnation Of Lord Vishnu: शास्त्रों द्वारा भगवान् विष्णु के 24 अवतार माने जाते है, जिसमे से 23 अवतारों का अवतरण हो चुका है और 24वें अवतार के रूप में भगवान् विष्णु कल्कि अवतार में अवतरित होगे |  समय पर पापियों का सर्वनाश करने के लिए और धरती पर फिर से धर्म की स्थापना करने के भगान श्री विष्णु जी के द्वारा अलग-अलग नामों से अवतार लिया जाता रहता है। भगवान श्री विष्णु के सबसे प्रसिद्ध अवतार श्री राम, श्री कृष्ण, नर नारायण, भगवान नरसिंह इत्यादि हैं। 

इन सभी अवतारों के अलावा भगवान ने अलग-अलग कालखंड में अलग-अलग नामों से भी अवतार लिए हैं। इनका सबसे प्रसिद्ध अवतार कल्कि अवतार है जो कि अभी हुआ नहीं है और इसीलिए इसकी काफी अधिक चर्चा हो रही है। कहा जाता है कि कल्कि अवतार कलयुग के अंत में होगा और भगवान फिर से पापियों का सर्वनाश कर के कलयुग में धर्म की स्थापना करेंगे। 

भगवान विष्णु जी के सभी अवतारों के नाम |  Lord Vishnu Avatar in Hindi (List) 

Bhagwan Vishnu Ke 24 Avtar ke Naam: श्रीमद्भागवत के अनुसार भगवान विष्णु के चौबीस अवतारों की सूची नीचे दी गयी है : –

  • श्री सनकादि मुनि |
  • वराह अवतार |
  • नारद अवतार |
  • नर नारायण अवतार |
  • कपिल मुनि अवतार | 
  • दत्तात्रेय अवतार | 
  • यज्ञ |
  • भगवान ऋषभदेव  |
  • आदिराज पृथु |
  • मत्स्य अवतार |
  • कूर्म अवतार |
  • भगवान धन्वंतरि | 
  • मोहिनी अवतार |  
  • नरसिंह अवतार |
  • वामन अवतार | 
  • हयग्रीव अवतार |
  • श्रीहरि अवतार |
  • परशुराम अवतार |
  • महर्षि वेदव्यास |
  • हंस अवतार |
  • श्रीराम अवतार |
  • श्री कृष्ण अवतार |
  • बुद्ध अवतार |
  • कल्कि अवतार |

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श्री सनकादि मुनि  

हिंदू धार्मिक ग्रंथों के अनुसार जब सृष्टि की शुरुआत हुई थी तो लोक पितामह ब्रह्मा जी के द्वारा अनेक लोको की रचना करने के लिए घोर तपस्या की गई थी। 

और उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर के भगवान श्री विष्णु ने तब अर्थ वाले नाम से युक्त होकर के सनत, सनातन और सनतकुमार नाम के 4 मुनियों के तौर पर अवतार लिया और आगे चलकर के यह चारों ही मोक्ष के मार्ग बने।  

इस प्रकार से श्री सनकादि मुनि भगवान श्री विष्णु के पहले अवतार माने जाते हैं जिनकी महिमा अपरंपार है। 

वराह अवतार 

भगवान श्री विष्णु के द्वारा जो दूसरा अवतार लिया गया था उसे वराह अवतार का नाम दिया गया।  प्राचीन काल में जब हिरण्याक्ष नाम के भयंकर राक्षस के द्वारा पृथ्वी को ले जाकर के समुद्र की गहराई में छुपा दिया गया था तब त्रिदेव में से एक ब्रह्मा जी की नाक से भगवान विष्णु ने वराह अवतार लिया और प्रकट हुए। 

नारद अवतार 

हिंदू धार्मिक ग्रंथों के नजरिए से देखा जाए तो  देवर्षि नारद जी को भी भगवान श्री विष्णु जी का अवतार माना जाता है। शास्त्रों के अनुसार ब्रह्मा भगवान के 7 मानस पुत्रों में से एक मुनि हैं और नारद जी के द्वारा की गई कठिन तपस्या से प्रसन्न होकर के ब्रह्मा जी के द्वारा उन्हें देवर्षि का पद दिया गया था। भगवान श्री विष्णु के नारद अवतार का प्रमुख कारण तीनों लोको की खबर लेना और खबर को यहां से वहां करना था। 

नर-नारायण  

बता दे कि दुनिया की शुरुआत होने पर भगवान विष्णु जी के द्वारा धर्म की स्थापना करने के उद्देश्य से दो रूप में अवतार लिया गया था। अपने इस अवतार में भगवान विष्णु जी के मस्तक पर जटा और उनके हाथों में हंस तथा पैरों में चक्र और वक्ष स्थल में श्रीवत्स के निशान बने हुए थे। हिंदू ग्रंथों के अनुसार इस प्रकार का जो अवतार था उसे नर नारायण का अवतार कहा गया। 

कपिल मुनि 

भगवान श्री विष्णु के द्वारा कपिल मुनि के तौर पर पांचवा अवतार लिया गया था। कपिल मुनि के पिता जी का नाम महर्षि कर्दम और इनकी माता जी का नाम देवहूती था।  

जब भीष्म पितामह अपने प्राण त्याग करने के लिए बाड़ की शैया पर लेटे हुए थे तब वहां पर उपस्थित अन्य लोगों में कपिल मुनि भी मौजूद थे। 

दत्तात्रेय अवतार 

प्राचीन शास्त्रों में दत्तात्रेय अवतार को भी भगवान श्री विष्णु का ही अवतार कहा गया है। बता दे कि ब्रह्मा भगवान के अंश से चंद्रमा, शंकर भगवान के अंश से दुर्वासा और विष्णु भगवान के अंश से दत्तात्रेय अवतार का जन्म हुआ था। 

यज्ञ  

भगवान श्री विष्णु ने जो सातवां अवतार लिया था उसे यज्ञ अवतार कहा गया। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार यज्ञ का जन्म स्वयंभू मन्वंतर में हुआ था। 

भगवान ऋषभदेव 

भगवान श्री विष्णु के आठवें अवतार को ऋषभदेव अवतार कहा गया। 

आदिराज पृथु  

भगवान श्री विष्णु के द्वारा लिए गए सभी अवतार में से एक अवतार आदिराज भी था। भगवान श्री विष्णु का यह अवतार उनका नौवा अवतार माना जाता है। 

मत्स्य अवतार  

धरती को प्रलय से बचाने के लिए भगवान विष्णु के द्वारा मत्स्य अवतार लिया गया था। इस अवतार को लेने के पश्चात विष्णु जी के द्वारा राजा सत्यव्रत को तत्व ज्ञान का उपदेश दिया गया था जिसका उल्लेख मत्स्य पुराण में मौजूद है।  

मत्स्य अवतार में भगवान श्री विष्णु जी की नाभि के नीचे का शरीर मछली का था और ऊपर का शरीर बिल्कुल देवता की तरह था। इसलिए इसे मत्स्य अवतार कहा गया। मत्स्य का हिंदी में मतलब मछली होता है। 

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कूर्म अवतार  

भगवान श्री विष्णु के द्वारा जो कूर्म अवतार लिया गया था, उसे कछुए का अवतार कहा जाता है। विष्णु जी के द्वारा यह अवतार समुद्र मंथन में सहायता के लिए लिया गया था।  

इस अवतार को कच्छप अवतार भी कहते हैं। विष्णु भगवान के द्वारा इस अवतार को लेने के पश्चात कछुए की पीठ पर मंदराचल तेजी से घूमने लगा और इस प्रकार से समुद्र मंथन की प्रक्रिया संपूर्ण हुई और निकले हुए अमृत का देवताओं ने पान किया। 

भगवान धन्वन्तरि 

देवताओं और असुरों के द्वारा जब मिलकर के समुद्र का मंथन किया जा रहा था तो समुद्र मंथन में से सबसे पहली बार जो चीज निकली वह भयंकर जहर था। इस भयंकर जहर को ग्रहण करने की क्षमता सिर्फ भगवान भोलेनाथ मे थी। इसलिए उन्होंने इस जहर को पी लिया। 

इसके पश्चात समुद्र मंथन करने से उच्चैश्रवा घोड़ा, देवी लक्ष्मी, एरावत हाथी, कल्पवृक्ष अप्सराएं और अन्य कई प्रकार के कीमती रत्न निकले। सबसे अंत में समुद्र मंथन से भगवान धन्वंतरी अमृत कलश लेकर के बाहर निकले। 

कहा जाता है कि यही धन्वंतरी भगवान, भगवान विष्णु जी के अवतार हैं। धन्वंतरी भगवान को औषधियों का स्वामी भी कहा जाता है और दीपावली के आसपास इनकी पूजा पूरे विधि विधान से की जाती है और इनसे दुख बीमारी को दूर भगाने की उम्मीद की जाती है। 

मोहिनी अवतार 

भगवान विष्णु जी के द्वारा मोहिनी अवतार भी लिया गया था ताकि वह देवताओं का भला कर सके।  

वर्तमान के समय में कई तांत्रिक व्यक्तियों के द्वारा मोहिनी सिद्धि की गई है। हालांकि वह मोहिनी भगवान श्री विष्णु का अवतार ही है या फिर अन्य कोई, इसके बारे में अभी संदेह है। 

भगवान नरसिंह  

असुरों के राजा हिरण्यकशिपु के द्वारा प्रहलाद की जान लेने का प्रयास किया जा रहा था तो उसी समय एक खंभे में से भगवान नरसिंह का अवतार पैदा हुआ था। और भगवान श्री नरसिंह ने अपने भक्त प्रहलाद के प्राणों की रक्षा करने के लिए असुरो के राजा हिरण्यकशिपु का पेट फाडकर उसका वध कर दिया और अपने भक्त प्रहलाद की रक्षा की। 

भगवान के इस अवतार में भगवान का स्वरूप शेर जैसा है। इस अवतार में भगवान के गले के नीचे का हिस्सा बिल्कुल इंसानों जैसा ही है परंतु भगवान का सिर शेर का है। यह बहुत ही उग्र और प्रचंड भगवान श्री विष्णु का अवतार था। यह अवतार इतना शक्तिशाली था कि इन्हें एक बार रोकने के लिए भगवान भोलेनाथ को माता काली, हनुमान जी, काल भैरव तथा अन्य कई देवी-देवताओं की शक्ति लगानी पड़ी थी तब जाकर भगवान नरसिंह शांत हुए थे। 

वामन अवतार  

भगवान श्री विष्णु ने वामन अवतार धरकर राजा बली से तीन वचन लिए, जिसके अंतर्गत उन्होंने पहले पग में सारी धरती और दूसरे पग में सारा आकाश पाताल और अन्य चीजे नाप ली और जब तीसरा पैर धरने की बात आई तो राजा बली ने वामन अवतार वाले भगवान श्री विष्णु से कहा कि आप मेरे सिर पर पैर रखे। 

इस पर भगवान विष्णु ने राजा बलि के सर पर पैर रखा और इस प्रकार राजा बलि ने अपने तीनों वचन पूर्ण किए। बाद में भगवान श्री विष्णु ने अपना असली स्वरूप राजा बलि को दिखाया। कहा जाता है कि आज भी राजा बलि जिस जगह के राजा थे वहां पर वह हर साल अपनी प्रजा की खुशहाली देखने के लिए आते हैं। 

हयग्रीव अवतार  

भगवान के इस अवतार में विष्णु जी का स्वरूप बहुत ही अलग था। इस अवतार में विष्णु जी की गर्दन और उनका मुंह घोड़े के जैसा था।  

इस अवतार को ग्रहण करने के पश्चात भगवान विष्णु जी के द्वारा मधु कैटभ नाम के राक्षसों का संहार किया गया और उनसे वेद ला करके फिर से ब्रह्मा जी को दिया गया। 

श्रीहरि अवतार  

धार्मिक ग्रंथों के अनुसार गजेंद्र द्वारा की जाने वाली स्तुति से खुश होकर के भगवान श्री हरि प्रकट हुए और उन्होंने अपने चक्र के द्वारा सभी मगरमच्छों का संहार कर दिया। 

और भगवान श्री हरि के द्वारा गजेंद्र का उद्धार किया गया और उसे फिर से पार्षद बनाया गया। इस प्रकार से श्री हरि अवतार भगवान विष्णु जी का 17 वां अवतार है। 

परशुराम अवतार 

परशुराम अवतार को भगवान विष्णु के प्रमुख अवतारों में गिना जाता है। कहानी के अनुसार परशुराम ने अपने समय में बड़े-बड़े राक्षसों का संहार किया था और उनके द्वारा कई अत्याचारी लोगों को भी खत्म किया गया था।  

हालांकि परशुराम जब अत्याधिक उग्र हो गए तब उनकी भेंट भगवान श्रीराम से हुई और भगवान श्री राम को देख कर के उन्हें भगवान श्री विष्णु की याद आई। 

महर्षि वेदव्यास  

हिंदू पुराणों में यह भी कहा गया है कि महर्षि वेदव्यास भी भगवान श्री विष्णु जी के ही अंश है।महर्षि वेदव्यास के द्वारा ही महाभारत जैसे महान ग्रंथ की रचना की गई थी। इसके अलावा इन्हें नारायण के कलावतार भी कहा जाता है। 

हंस अवतार 

विष्णु भगवान ने अपना 20वां अवतार हंस अवतार के तौर पर लिया और इनके द्वारा सनकादि मुनियों के संदेह का निवारण किया गया। इसके पश्चात सभी देवताओं ने मिलकर के हंस अवतार की पूजा की। 

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श्रीराम अवतार 

विष्णु भगवान ने भगवान श्री राम का अवतार त्रेता युग में लिया था। त्रेता युग में रावण नाम के एक अहंकारी ब्राह्मण का आतंक काफी अधिक बढ़ गया था। इसी अहंकारी रावण का खात्मा करने के लिए और उसके अहंकार को तोड़ने के लिए राजा दशरथ की पत्नी कौशल्या के गर्भ से भगवान श्री राम के तौर पर भगवान श्री विष्णु ने अवतार लिया। 

और बड़े होकर के उन्होंने कई राक्षसों का संहार किया तथा रावण जैसे अत्याचारी का भी उसकी संपूर्ण राक्षस जाति के साथ वध किया और पुनः राम राज्य की स्थापना की। 

श्रीकृष्ण अवतार 

भगवान विष्णु जी ने श्री कृष्ण के तौर पर द्वापर युग में अवतार लिया और विभिन्न अधर्मीयों का खात्मा किया। कंस जैसे अधर्मी का सर्वनाश भी भगवान श्री विष्णु के श्री कृष्ण अवतार के द्वारा ही संपूर्ण हुआ। 

इसके अलावा श्री कृष्ण भगवान महाभारत जैसे भयंकर युद्ध में अर्जुन के सारथी भी बने और दुनिया को गीता का उपदेश दिया। इसके अलावा उन्होंने धर्मराज युधिष्ठिर को राजा बना करके द्वापर युग में धर्म की स्थापना की।  

भगवान श्री विष्णु के इस अवतार को नटखट अवतार भी कहा जाता है, क्योंकि कृष्ण भगवान बचपन में अत्याधिक नटखट थे और इनकी बाल लीलाओं से अक्सर ही लोग आनंदित होते थे। 

बुद्ध अवतार  

बौद्ध धर्म के प्रसिद्ध प्रवर्तक गौतम बुद्ध भी भगवान विष्णु जी के ही अवतार थे। 

कल्कि अवतार  

हिंदू धर्म ग्रंथों के अनुसार यह कहा गया है कि भगवान श्री विष्णु अपना 24 वां अवतार कल्कि अवतार के तौर पर लेंगे। यह अवतार तब होगा जब धरती पर कलयुग अपनी चरम सीमा पर आ जाएगा और लोग धर्म संस्कृति का नाश करने पर आमादा हो जाएंगे। 

पौराणिक कथा के अनुसार भगवान श्री विष्णु कल्कि अवतार के तौर पर उत्तर प्रदेश राज्य के मुरादाबाद जिले के संभल नाम के एक जगह पर विष्णुयशा नाम के एक तपस्वी ब्राह्मण के घर पैदा होंगे।  

भगवान श्री विष्णु का यह अवतार देवदत्त नाम के घोड़े पर सवारी करेगा और कलयुग में संसार के सभी पापियों का सर्वनाश कर के फिर से एक बार संसार में धर्म की स्थापना करेंगे। 

विष्णु भगवान कौन है ? (Who is Lord Vishnu in Hindi)

विष्णु भगवान हिंदू धर्म के प्रमुख देवता है। इनकी गिनती त्रिदेव में होती है। त्रिदेव अर्थात ब्रह्मा, विष्णु और महेश। विष्णु जी को हरी, चक्रधारी, वासुदेव,नारायण, श्रीकांत, पितांबर, सत्यनारायण, जगदीश,जनार्द, दामोदर और जगन्नाथ जैसे नामों से भी जानते हैं।  

विष्णु जी का निवास स्थान वैकुंठधाम को कहा जाता है।‌ इनका मंत्र ओम नमो भगवते वासुदेवाय है। इसके अलावा इनका मंत्र ओम नमो नारायणाय भी है। 

भगवान श्री विष्णु शंख, सुदर्शन चक्र, गदा, धनुष,तलवार जैसे अस्त्र-शस्त्र से सुसज्जित है। इनकार प्रतीक आंवले का पेड़ और शालिग्राम है। इनका दिन गुरुवार को कहा जाता है। रंग रूप में यह पीले रंग के हैं।  

इनकी पत्नी मां लक्ष्मी देवी और वृंदा देवी है। इनकी संतान कामदेव है और यह गरुड़ पक्षी पर सवारी करते हैं। श्रीमद्भागवत महापुराण, विष्णु पुराण, गरुड़ पुराण, मत्स्य पुराण, नरसिंह पुराण, वामन पुराण, महाभारत और रामायण जैसे ग्रंथ इनके साथ जुड़े हुए हैं। अनंत चतुर्दशी, सभी एकादशी, सभी पूर्णिमा और अवतार जयंतीया इनके प्रसिद्ध त्योहार हैं। 

FAQ 

विष्णु के 12 अवतार कौन कौन से हैं ? 

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विष्णु के 7 अवतार कौन थे ? 

श्री सनकादि मुनि,वराह अवतार,नारद अवतार ,नर नारायण अवतार,कपिल मुनि अवतार,दत्तात्रेय अवतार,यज्ञ |

विष्णु के 10 अवतार का नाम क्या है ? 

श्री सनकादि मुनि,वराह अवतार,नारद अवतार ,नर नारायण अवतार,कपिल मुनि अवतार,दत्तात्रेय अवतार,यज्ञ ,भगवान ऋषभदेव,आदिराज पृथु ,मत्स्य अवतार |

भगवान विष्णु के 8 अवतार कौन कौन से हैं ? 

श्री सनकादि मुनि,वराह अवतार,नारद अवतार ,नर नारायण अवतार,कपिल मुनि अवतार,दत्तात्रेय अवतार,यज्ञ ,भगवान ऋषभदेव |

भारत के प्रसिद्ध मंदिरों की सूची हिंदी में

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