पाचन तंत्र के अंगों के नाम [चित्र सहित]

हमारी बॉडी को काम करने के लिए साथ ही बॉडी के अंगों को पोषण पाने के लिए भोजन की आवश्यकता होती है। जब हम खाना खाते हैं तो उसके अंदर मौजूद अलग-अलग प्रकार के पोषक तत्व हमारी बॉडी को जरूरी प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, विटामिन, मिनरल और फैट की पूर्ति करते हैं, जिसकी वजह से हमारी बॉडी के अलग-अलग अंगों को पोषण मिलता है और हम अपने आप को ऊर्जावान महसूस करते हैं। अधिकतर लोगों को यह लगता है कि हमारे खाने का पाचन करने में मुख्य तौर पर मुंह और पेट की महत्वपूर्ण भूमिका है, जबकि ऐसा नहीं है।

मुंह और पेट के अलावा बॉडी में कुछ ऐसे पाचक अंग है जो खाने का पाचन सही प्रकार से हो, इसके लिए जिम्मेदार है। इसलिए अगर आप यह जानना चाहते हैं कि हमारी बॉडी में पाचक अंग कौन कौन से हैं, तो इस आर्टिकल को पूरा अवश्य पढ़ें, क्योंकि इस आर्टिकल में आपको पाचन तंत्र के अंगों के नाम फोटो सहित जानने को मिलेंगे।

शरीर के अंगों के नाम और उनके कार्य

पाचन तंत्र के अंगों के नाम [List of Human Digestive System Organs]

वैसे तो हमारी बॉडी में कई अंग होते हैं परंतु बात यहां जब मानव पाचन तंत्र के अंगों की हो रही है तो नीचे आपके समक्ष हमने digestive system में शामिल महत्वपूर्ण इंसानी अंगों के नाम प्रस्तुत किए हैं। देखा जाए तो मुख्य तौर पर मानव पाचन तंत्र के 8 प्रमुख अंग है, जो खाने का पाचन सही प्रकार से करने के लिए जिम्मेदार होते हैं।

  1. मुख (Mouth)
  2. ग्रसनी (Pharynx)
  3. ग्रासनली (Oesophagus)
  4. आमाशय (Stomuch)
  5. छोटी ऑत (Small Intestine)
  6. बड़ी ऑत (Large Intesine)
  7. मलाशय (Rectum)
  8. गुदा (Anus)

मुख (mouth)

अंग्रेजी में मुंह को माउथ कहा जाता है। यह इंसानी शरीर के पाचन तंत्र का प्रमुख अंग माना जाता है। जब हम भोजन ग्रहण करना चालू करते हैं तब उसके पाचन का सबसे पहली बार काम हमारे मुंह के द्वारा ही चालू होता है। हमारे मुंह के अंदर जो दांत मौजूद होते हैं वह खाने को सबसे पहले छोटे-छोटे टुकड़े में डिवाइड करते हैं। हमारे मुंह के अंदर खाने को कूचने के लिए लार भी मौजूद होती है, जो खाने को सही प्रकार से आपस में मिक्स करती है।

ग्रसनी (Pharynx)

जो भाग मुख गुहा पश्चभाग की ओर से खुलता है उस भाग को ग्रसनी कहा जाता है। यहीं से हमारी सांस और खाने का रास्ता आरंभ हो जाता है। जब हम खाना अपने मुंह में डालते हैं और जब हम खाना चबाना चालू करते हैं, तो वह ग्रसनी के द्वारा ही ग्रास नली में जाता है और सांस हमारे फेफड़े तक पहुंचती है। देखा जाए तो ग्रसनी के मुख्य तौर पर 3 भाग होते हैं जो इस प्रकार हैं।

नासाग्रसनी (Nasopharynx)

ग्रसनी का जो यह वाला भाग होता है उसमें ऊपर की साइड में नासा द्वारा खुला होता हैं।

• मुख ग्रसनी (Oropharynx)

गल द्वार से मुखगुहिका ग्रसनी के जिस भाग में खुलती है उसे मुख्य ग्रसनी कहते हैं।

• कण्ठग्रसनी (Laryngopharynx)

ग्रसनी का जो पीछे वाला भाग होता है, उसे कंठ ग्रसनी कहा जाता है, जिसमें कुल दो छेद होते हैं। इसमें जो आगे वाला छेद होता है, उसे 

कणंठद्वार कहा जाता है और जो पीछे वाला छेद होता है उसे निगल द्वार कहा जाता है।

ग्रासनली (Oesophagus)

हमारे द्वारा खाया गया भोजन ग्रास नली के द्वारा ही अमाशय में जाता है। बता दें कि ग्रास नली की साइज लगभग 25 सेंटीमीटर के आसपास में होती है और इसकी रचना नलाकार होती है। ग्रास नली ग्रसनी से स्टार्ट होती है और यह अमाशय में जाकर के ओपन होती है। इसका निर्माण झिल्लियों से और मांसपेशियों से हुआ होता है। ग्रास नली की जो भित्ति होती है उसकी परतें निम्न है।

  • श्लेश्मिक कला (Mucosa)
  • अवश्लेश्मिक परत (Submucosa)
  • पेशीय परत (Muscularis Externaa)

आमाशय (Stomach)

अमाशय हमारी बॉडी के बाई ओर मौजूद उदरीय गुहा के ऊपर वाले भाग में स्थित होता है, जिसकी लंबाई तकरीबन 30 सेंटीमीटर के आसपास में होती है। अमाशय का एक भाग ग्रास नली और इसका दूसरा भाग छोटी आत के पहले भाग ग्रहणी पर ओपन होता है। आमाशय के अंदर जाने के बाद ही हमारा भोजन स्टोर होता है, साथ ही इसी में खाने का यांत्रिक और रसायनिक पाचन स्टार्ट होता है। 

अमाशय में खाने को पचाने वाले एसिड का स्त्राव होता है। इसी एसिड की वजह से खाने का पाचन सही प्रकार से होता है। तकरीबन 24 घंटे में 5 से 6 लीटर रस आमाशय के द्वारा निकाला जाता है और सामान्य तौर पर अमाशय में 4 घंटे तक खाना रहता है। अमाशय में एक बार में डेढ़ किलो तक भोजन आ सकता है। हालांकि कुछ लोगों में यह कैपेसिटी और भी अधिक होती है।

छोटी आँत (Small Intestine)

छोटी आंत को अंग्रेजी में स्मॉल इंटेस्टाइन भी कहा जाता है और अमाशय के बाद जो आहार नाल का बचा हुआ भाग होता है उसे ही आँत कहां जाता है, जिसकी लंबाई तकरीबन 25 फीट के आसपास होती है और यह छोटी आंत और बड़ी आंत इस प्रकार के दो पार्ट में डिवाइड होती है। जो छोटी आंत होती है उसकी लंबाई लगभग 20 फुट के आसपास में होती है जिसकी रचना अतिकुण्डलित नलिका के समान होती है और यह बड़ी आँत के द्वारा ढकी हुई रहती है।

बड़ी आँत (Large Intestine)

बड़ी आत की लंबाई लगभग 5 फीट के आसपास में होती है और इसकी मोटाई छोटी आत से अधिक होती है। बड़ी आत में सीकम, वृहदान्त्र और मलाशय इस प्रकार के तीन महत्वपूर्ण भाग होते हैं। छोटी आंत से जो भी आहार रस आता है, उसका शोषण बड़ी आत में होता है। 

इसके अलावा बड़ी आंत में तकरीबन 95 परसेंट तक पानी रहता है, साथ ही साथ बड़ी आंत के अंदर कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन और फैट का भी कुछ भाग होता है। बड़ी आंत में इन सभी चीजों का ऑक्सीकरण होता है और इस प्रकार से पानी के काफी भाग को यहां पर सोख लिया जाता है। यहां से भोजन के रस का पानी वाला भाग खून में चला जाता है और जो एक्स्ट्रा खराब भाग बचता है वह मलाशय के द्वारा होते हुए मलद्वार से हमारी बॉडी से बाहर निकल जाता है।

मलाशय (Rectum)

बड़ी आँत के नीचे मलाशय मौजूद होता है, जिसकी लंबाई तकरीबन 15 सेंटीमीटर से लेकर के 20 सेंटीमीटर के आसपास में होती है। इसमें मौजूद शिराओं का जाल जब फूलता है तो इसमें से खून निकलने लगता है और सामान्य तौर पर जब ऐसी अवस्था पैदा होती है तब उसे बवासीर की समस्या कहा जाता है।

गुदा (Anus)

यह हमारी इंसानी बॉडी के पाचन तंत्र का सबसे आखरी वाला भाग होता है और यहीं से हमारी बॉडी के अंदर मौजूद खराब चीजें जैसे कि मल बाहर निकलता है। बता दे कि पाचन तंत्र में अन्य कई सहायक अंग भी होते हैं। जैसे कि दांत, जीभ, गाल, लार ग्रंथियां, अग्नाशय और लीवर इत्यादि।

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पाचन किसे कहते हैं ?

पाचन शब्द का सबसे आसान मतलब होता है टुकड़े टुकड़े करना। इसका अर्थ यह होता है कि जब हम कोई खाना खाते हैं तो वह यांत्रिक और रासायनिक प्रक्रिया के द्वारा छोटे-छोटे भाग में विभाजित हो जाता है। इस प्रकार से उस खाने का पाचन होता है। खाना खाने के पश्चात हमारी बॉडी के अंदर मौजूद पाचक अंगों को खाना पचाने में काफी लंबी प्रक्रिया करनी पड़ती है। 

खाने का पाचन हमारे मुंह से ही शुरू हो जाता है और उसके बाद खाना बड़ी आत तक होते हुए जो फालतू की चीजें होती हैं वह लैट्रिंग के जरिए हमारी बॉडी से बाहर निकल जाती है। खाने के पाचन में सबसे पहले हमारा मुंह महत्वपूर्ण भूमिका अदा करता है। उसके बाद बॉडी के अंदर मौजूद छोटी आत, बड़ी आत, अग्नाशय, जटरागनी जैसी चीजें भी खाने के पाचन को करने में महत्वपूर्ण किरदार अदा करती हैं।

हम इंसानों की बॉडी में दो प्रकार का पाचन होता है जिसमें पहला प्रकार है मैकेनिकल और दूसरा प्रकार है केमिकल। जब हम अपने दांतो के द्वारा खाने को तोड़कर, चबाकर या फिर पीसकर खाते हैं तो उसे मेकेनिकल प्रोसेस कहा जाता है। 

इस प्रकार से जब भोजन हमारे पेट में जाता है तब भोजन को पचाने के लिए केमिकल प्रोसेस स्टार्ट होती है। दांतो के द्वारा पीसे गए भोजन जब हमारी बॉडी में मौजूद पाचन तंत्र तक पहुंचते हैं तो उस भोजन को एंजाइम छोटे-छोटे मॉलिक्यूल मे चेंज कर देता है और फिर इन्हीं मॉलिक्यूल से एनर्जी का प्रोडक्शन होता है।

पाचन में सबसे अधिक काम करने वाला पाचन अंग

जब खाना हमारे पेट में चला जाता है तब उसे पचाने का सबसे ज्यादा काम छोटी आत के ऊपर ही होता है। आपको यह जानकर भी आश्चर्य होगा कि अगर हमारे डाइजेस्टिव सिस्टम से जुड़े हुए सभी अंगों को आपस में मिलाया जाए तो इनकी लंबाई तकरीबन 30 किलोमीटर के आसपास में हो जाएगी जो कि हैरान करने वाली बात है। 

छोटी आत के द्वारा ही हमारी बॉडी में सबसे ज्यादा पोषक तत्वो को अवशोषित किया जाता है, ताकि हमारी बॉडी हेल्दी बनी रहे। यानी की आप यह समझ सकते हैं कि बड़ी आत से भी काफी महत्वपूर्ण काम छोटी आत करती है।

पाचन तंत्र कैसे काम करता है? (Function of Digestive System in Hindi)

खाने को जब मुंह में डाला जाता है तो डाइजेस्टिव सिस्टम की क्रिया चालू हो जाती है और उसके बाद खाने का पाचन एक पूरी प्रोसेस के अंतर्गत होता है, जिसे हम आपको नीचे स्टेप वाइज समझाने का प्रयास कर रहे हैं।

  • मुंह: जब खाने को मुंह में डाला जाता है, तब पाचन की प्रोसेस स्टार्ट हो जाती है। हमारे मुंह के अंदर मौजूद लार हमारे भोजन को नरम बनाती है और भोजन को मिक्स करना चालू करती है और इसी लार की वजह से आसानी से खाना ग्रसिका नली से पेट में जा पाता है।
  • ग्रासनली: मुंह के अंदर लार मिलने के पश्चात साथ ही भोजन को चबाने के पश्चात जो चबाया हुआ खाना होता है, वह ग्रास नली से होते हुए पेट की ओर आगे बढ़ता है।
  • पेट: पेट के अंदर जो ग्रंथियां होती है, वह खाने के पाचन के लिए जरूरी एसिड और एंजाइम को मिक्स करती हैं।
  • अग्नाशय: अग्नाशय पाचन रस बनाते हैं, साथ ही साथ प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट और फैट को अलग अलग करना स्टार्ट कर देते हैं। इस प्रकार से जो पाचन रस मिलता है वह छोटी आत में भेजा जाता है।
  • यकृत: यहां पर पाचन रस बनता है जिसे पित्त रस भी कहा जाता है। इसी की वजह से फैट को डाइजेस्ट करने में सहायता मिलती है। यकृत से पित्त रस पित्त की नलिका में जाता है और फिर वह पित्ताशय में जा करके जमा हो जाता है और जरूरत पड़ने पर छोटी आत में भी जाता है।
  • पित्ताशय: जब खाने को खाया जाता है, तब पित्ताशय में पित्त रस जमा होना चालू हो जाता है और उसके पश्चात पित्ताशय से पित्त रस छोटी आंत में जाता है।
  • छोटी आंत: पाचन रस को भोजन में मिलाने का काम छोटी आंत करती है।
  • बड़ी आंत: बड़ी आंत खाने के अंदर मौजूद सभी पोषक तत्वों को निकालती हैं, साथ ही यह विटामिन के भी बनाती हैं। उसके बाद जो बची हुई चीज होती है वह मल होता है जो की मलाशय में जाता है।
  • मलाशय: यहां से हमारी बॉडी का जो मल होता है वह बॉडी में से बाहर निकल जाता है।

पाचन तंत्र मजबूत करने के लिए क्या करें? [Strong Digestive System Tips in Hindi]

जब कभी भी आप खाना खाए तब आपको खाने को अच्छी तरह से चबा चबाकर खाना है। इससे होगा यह की खाने का पाचन आपके पेट में सही प्रकार से होगा जिससे पाचन शक्ति मजबूत बनेगी और आपको पेट से संबंधित समस्याएं भी नहीं होगी। इसके अलावा खाना खाने के पश्चात आपको पर्याप्त मात्रा में पानी अवश्य पीना है और हो सके तो आपको गुनगुना पानी पीना है। इससे भी पाचन शक्ति स्ट्रांग बनती है। 

आप चाहे तो नींबू पानी भी ट्राई कर सकते हैं। पाचन शक्ति स्ट्रांग करने के लिए आपको विटामिन सी से भरपूर आहार लेना है, जैसे कि स्ट्रौबरी, संतरा, ब्रोकली, कीवी इत्यादि। इसके अलावा आपको एक ही बार अधिक खाना नहीं खाना है, बल्कि आपको दिन भर में 4 से 5 बार खाना, खाना है  ऐसा करने से खाने को डाइजेस्ट होने में आसानी होती है।

Human Digestive System Diagram [Hindi]

दिए गए चित्र द्वारा आपको मानव पाचन तंत्र का वर्णन नामांकन के साथ किया गया है |

FAQ:

पाचन तंत्र का दूसरा नाम क्या है?

डाइजेस्टिव सिस्टम

पाचन तंत्र के मुख्य अंग कौन कौन से हैं?

मुख,ग्रसनी ,ग्रासनली,आमाशय,छोटी ऑत,बड़ी ऑत, मलाशय, गुदा

पाचन तंत्र कितने प्रकार के होते हैं?

मैकेनिकल और केमिकल

हाथ की उंगलियों के नाम

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