शरीर के अंगों के नाम और उनके कार्य

हमारे शरीर के विभिन्न अंगो का निर्माण नाना प्रकार के ऊतकों द्वारा किया जाता है | अनेक प्रकार के अंग तंत्रो से मिलकर मानव शरीर की रचना होती है | शरीर के विभन्न अंगो को अलग-अलग नामों से जाना जाता है, जिनसे उन अंगो की पहचान की जाती है |

इन नामों से ही उनके अंगो को पहचानने में आसानी होती है | सभी अंगो का अपना अलग कार्य होता है, जिन्हे वो भली – भाँति पूर्ण करते है | इस पोस्ट में आपको शरीर के अंगों के नाम (Body Parts Name in Hindi) और उनके कार्य के बारे में जानकारी दी जा रही है |

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मानव शरीर के विभिन्न तंत्र एवं उनके कार्य (Human Body Different Systems and their Functions)

मानव कंकाल तंत्र (Human Skeletal System)

यह मानव शरीर की आंतरिक संरचना होती है, इसमें आपको हड्डियों की संरचना के बारे में बताया जा रहा है | मनुष्य के जन्म के समय शिशु अवस्था में 270 हड्डियां पाई जाती है | इसके बाद बाल्यावस्था में उसकी हड्डियों की जनसँख्या 270 से बढ़कर 350 तक हो जाती है | मनुष्य के किशोरावस्था व प्रौढ़ावस्था के दौरान कुछ हड्डियों के संगलित होने पर यह केवल 206 हड्डियों तक ही सीमित रह जाती है | हड्डियां हमारे शरीर की माशपेशियों को एक रूप देती है, और उन्हें किसी भी तरह से कार्य को करने में सहायता प्रदान करती है |

अन्य प्रजातियो की तुलना में मानव कंकाल समान लैंगिक द्विरूपता नहीं स्थापित करता है,किन्तु दंत विन्यास, मस्तिष्क, लम्बी हड्डियों और श्रोणियों में कुछ अंतर पाया जाता है | इस तरह से महिला कंकाल पुरुष हड्डियों की तुलना में छोटे और कम मजबूत होते है | मानव कंकाल द्वारा किये जाने वाले छः कार्य गति, रक्षण, रुधिर कणिकाओं का निर्माण, आयनो का भंडार, उपजीवन और अंत: स्रावी विनियमन |

संधि संरचना (Treaty Structure)

संधि यानि हड्डियों का जोड़ यह शरीर के उन स्थानों को दर्शाता है, जहां पर दो हड्डियां आपस में एक दूसरे से मिलती है, जैसे :- कुहनी, कूल्हे और कुहनी आदि | यह शरीर में गति पहुंचाने और यांत्रिक आधार का कार्य करती है |

पेशीतन्त्र (Muscular System)

यह मानव शरीर का मस्क्युलर सिस्टम होता है, जो इच्छाधीन पेशियों की गणना करता है | यह पेशिया अस्थियो पर लगी होती है | इन पेशियों के संकुचन से अंगो में गति उत्पन्न होती है, जिससे शरीर हिल-डुल और चलने जैसी क्रियाओ को करता है |

परिसंचरण तंत्र (Circulatory System)

परिसंचरण तंत्र या वाहिकातंत्र मानव शरीर का वह संगठन होता है, जो शरीर की कोशिकाओं तक पोषक तत्वों को पहुंचाने का कार्य करता है | यह वाहिकातंत्र शरीर के ताप, P.H. मान की स्थिरता और शरीर से रोगो की रक्षा करता है | शरीर में गैसें, हार्मोन, अमिनो अम्ल, रक्त कोशिकाएँ तथा नाइट्रोजन के अपशिष्ट, विद्युत अपघट्य आदि उत्पाद के यातायात का कार्य परिसंचरण तंत्र द्वारा ही किया जाता है |

आशय तंत्र (Intent Mechanism)

इस आशय के अंतर्गत श्वसन तंत्र, पाचन तंत्र, मूत्र तथा जनन तंत्र आते है |

श्वसन तंत्र (Respiratory System)

श्वासोच्छ्वास के कार्यो करने वाले समस्त अंगो की रचना का वर्णन इस तंत्र द्वारा किया जाता है | इस तंत्र में श्वसनिका फुप्फुस, नासा,  श्वासनली, कंठ, फुप्फुसावरण, स्वरयंत्र तथा श्वासोच्छ्वास का कार्य करने वाली पेशियों का वर्णन किया जाता है | रक्त का सोधन इस तंत्र द्वारा किया जाता है, इसमें मनुष्य एक मिनट में तक़रीबन 16-20 बार सांस लेता है |

पाचन तंत्र (Digestive System)

यह मनुष्य की पाचन क्रिया होती है, जिसमे अवशोषण, भोजन के पाचन और चयोपचय से संबंधित कार्य को करने के लिए दाँत, कंठ, ओष्ठ, मलाशय, जिह्वा, पक्वाशय, आंत्र, बृहत्, अन्ननलिका, आमाशय, यकृत अग्न्याशय, लघु और लालाग्रंथियाँ पाई जाती है | इसमें 25 से 30 फुट लंबी पाचक नाल और आहार नाल पाई जाती है | यह मुँह से आरम्भ होकर मलाशय/गुदा के अंत तक होती है | इसमें आहार मुँह से प्रवेश के बाद आमाशय, क्षुद्रांत्र, ग्रासनाल, बृहदांत्र, ग्रहणी, मलाशय और गुदाद्वार द्वारा मल के रूप में बाहर निकलता है |

मूत्रतंत्र (Genitourinary System)

मूत्रतंत्र के अंतर्गत मूत्रनली,  प्रॉस्टेटग्रंथि, मूत्राशय तथा रुधिर वाहिनियाँ आदि तंत्र आते है | इस तंत्र में रूधिर को मूत्र से पृथक कर गविनियों द्वारा मूत्रालय में एकत्रित किया जाता है, जो मनुष्य की इच्छानुसार बाहर निकाला जाता है | 

जनन तंत्र (Reproductive System)

पुरुष एवं महिलाओ में भिन्न-भिन्न जनन तंत्र पाए जाते है | पुरुषो में अंडकोष की दो अंड ग्रंथियाँ पाई जाती है, जिनमे शुक्राणुओं का निर्माण होता है | पुरुषो में शुक्राशय मूत्रनली के दोनों भाग पुरस्थ में खुलते है, जिसे मनुष्य मैथुन क्रिया द्वारा अपने शुक्राणुओं का त्याग मूत्रनली से करता है | इसके विपरीत स्त्रियों में भगास्थि का द्वार मूत्राशय के पीछे स्थित लम्बा ऊध्र्व गर्भाशय है | स्त्रियों में प्रति माह होने वाले मासिक रुधिरस्राव के द्वारा अप्रफलित डिंब को बाहर निकाल दिया जाता है |

तन्त्रिका तन्त्र (Nervous System)

तन्त्रिका तंत्र एक ऐसा तंत्र होता है, जिसके द्वारा सभी विभिन्न अंगो का नियंत्रण और सामंजस्य स्थापित को स्थापित किया जाता है | इस तंत्र में मस्तिष्क, मेरुरज्जु से निकलने वाली तंत्रिकाओं की गणना का कार्य  किया जाता है | तंत्रिका कोशिकाओं द्वारा अन्य कोशिकाओं के साथ मिलकर तन्त्रिका तन्त्र के कार्यो को संपन्न किया जाता है |

ज्ञानेन्द्रियाँ (Sense Organs)

ज्ञानेन्द्रियाँ मनुष्य के शरीर के वह अंग होते है, जिनसे सुनने, महसूस करने, देखने, और स्वाद-ताप-रंग आदि का कार्य किया जाता है | इन कार्यो को कान, नाक, आँख, त्वचा और जीभ जैसी ज्ञानेन्द्रियो द्वारा किया जाता है | इसमें जीभ स्वाद का, आँखे देखने का, त्वचा महसूस करने का, नाक गंध पता करने का और कान सुनने का कार्य करती है |

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मानव शरीर के अंगो के नाम (Human Body Parts Names)

  • दिमाग (Brain)
  • चेहरा (Face)
  • भौहें (Eyebrows)
  • पलकें (Eyelid)
  • आंखें (Eyes)
  • कमर (Waist)
  • कोख (Womb)
  • नाखून (Nails)
  • नाड़ी (Pulse)
  • नाक (Nose)
  • नथना (Nostril)
  • कान (Ears)
  • केश (Hair)
  • होंठ (Lips)
  • जुबान (Tongue)
  • मुंह (Mouth)
  • लार (Saliva)
  • गाल (Cheek)
  • जबड़ा (Jaw)
  • ठोड़ी (Chin)
  • मुट्ठी (Fist)
  • त्वचा (Skin)
  • जांघों (Thighs)
  • पैर (Legs)
  • मूंछ (Whiskers)
  • पैर (Foot)
  • टेंपल (Temple)
  • कंधा (Shoulder)
  • गरदन (Neck)
  • गला (Throat)
  • छाती (Chest)
  • स्तन (Breast)
  • निपल्स (Nipples)
  • हाथ (Hands)
  • कलाई (Wrist)
  • बाहें (Arms)
  • हथेलियाँ (Palms)
  • फिंगर्स (Fingers)

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