हिंदी की प्रमुख लोकोक्तियाँ व उनके अर्थ



आपने अपने बचपन के दरमियान ऐसे कई बुजुर्ग या फिर लोगों को देखा होगा जो अपनी बात को बिल्कुल अलग ही अंदाज में कहते थे, उस अलग अंदाज में जो बात कही जाती थी उसे लोकोक्ति कहते हैं।

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लोकोक्ति का निर्माण किसने किया इसके बारे में कोई भी जानकारी नहीं है परंतु कहा जाता है कि बहुत पुराने समय से ही लोकोक्ति का इस्तेमाल किसी बात को समझाने के लिए शॉर्ट में किया जाता है। इस आर्टिकल में हम आपको “हिंदी की प्रमुख लोकोक्तियां और उनके अर्थ” बता रहे हैं।

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LokoktiyanIn Hindi

सामान्यतया मुहावरे पूरी तरह से स्वतंत्र नहीं होते हैं, अतः किसी विशेष मुहावरे से पूरा वाक्य भी नहीं होता है परंतु जो लोकोक्ति होती है वह पूरे वाक्य का निर्माण करने में सक्षम होती हैं।



मुहावरा किसी भी भाषा में एक अलग प्रकार का चमत्कार पैदा करता है जबकि लोकोक्ति वाक्य में स्थिरता को लाती है। मुहावरे की तुलना में लोकोक्ति बड़ी होती है साथ ही लोकोक्ति भावपूर्ण भी होती है।

लोकोक्तियाँ किसे कहते हैं ?

किसी वाक्य को पूरी तरह से स्पष्ट करने वाली चीज को ही लोकोक्ति कहा जाता है। इसे सामान्य भाषा में कहावत कहते हैं। यह कहावतें किसी बात को कहने के दरमियान उसके समर्थन में कही जाती है।

लोकोक्ति काफी लंबे समय से लोगों के द्वारा इस्तेमाल की जा रही है। यहां तक कि पहले जो साधु संत होते थे वह भी अपनी बात को लोकोक्ति के जरिए ही कहते थे। जितनी भी लोकोक्तियां आज तक बनी हुई है उनके पीछे कोई ना कोई घटना या फिर कहानी मौजूद है।

हिंदी की प्रमुख लोकोक्तियाँ व उनके अर्थ [Example]

उधरे अन्त न होहिं निबाह । कालनेमि जिमि रावण राहू।।

किसी होशियार आदमी की चालाकी जब सबके सामने आ जाती है तब उस पर अनेक प्रकार के संकट आ जाते हैं।

उत्तम विद्या लीजिए, जदपि नीच पै होय

अगर किसी छोटे व्यक्ति के पास कोई जानकारी है तो उसे अवश्य ही ग्रहण करना चाहिए।

उतर गई लोई तो क्या करेगा कोई

जब मान सम्मान ही नहीं है तो फिर डर किस बात का।

उधार का खाना और फूस का तापना बराबर है

अधिक दिनों तक उधार ले करके अपना खर्च नहीं चलाया जा सकता क्योंकि फूस की आग ज्यादा देर तक नहीं ठहर पाती।

उमादास जोतिष की नाई, सबहिं नचावत राम गोसाई

इंसान के करने से कुछ नहीं होता है। इंसान भगवान की इच्छा के अनुसार ही काम करता है।

उल्टा चोर कोतवाल को डांटे

अपनी गलती को स्वीकार न करके उल्टा गलती बताने वाले व्यक्ति को ही डांटना,फटकारना अथवा उसे दोषी करार देना।

उसी की जूती उसी का सिर

सामने वाले किसी व्यक्ति को उसी की वस्तु से बेवकूफ बनाना।

ऊंची दुकान फीके पकवान

जिसका नाम तो काफी ज्यादा चर्चित हो परंतु उसके गुण कम हो।

ऊंट के गले में बित्ली

बेमेल संबंध विवाह

ऊंट के मुंह में जीरा

अधिक मात्रा में भोजन करने वाले को थोड़ी मात्रा में ही खाने के लिए वस्तु देना।

ऊंट-घोड़े बहे जाए, गधा कहे कितना पानी

किसी काम को जब दमदार लोग भी पूरा ना कर सके परंतु कोई कमजोर आदमी उसे करने की इच्छा रखता हो तब यह लोकोक्ति कही जाती है।

ऊंट दूल्हा गधा पुरोहित

जब कोई मूर्ख आदमी किसी दूसरे मूर्ख आदमी की प्रशंसा करता है तब यह लोकोक्ति कही जाती है।

ऊंट बर्राता ही लदता है

काम करने की इच्छा ना होने के बावजूद भी सिर्फ डर के मारे काम करना और बड़बड़ाते जाना।

ऊंट बिलाई ले गई, हां जी, हां जी कहना

किसी दमदार आदमी के द्वारा जब कोई बात कही जाए जो कि असंभव हो फिर भी उसकी हां में हां मिलाना।

एक अंडा वह भी गंदा

एक ही बेटा परंतु वह भी निकम्मा

एक आंख से रोना और एक आंख से हंसना

खुशी और गम दोनों का एक साथ होना।

एक और एक ग्यारह होते हैं

मेल मिलाप अथवा जोड़ी में अधिक पावर होती है।

एक जिन्दगी हजार नियामत है

जिंदगी बहुत ही कीमती है।

एक तवे की रोटी, क्या पतली क्या मोटी

किसी एक ही परिवार में रहने वाले सदस्यों में या फिर एक ही पदार्थों के कई भागों में बहुत ही कम अंतर होता है।

एक तो करेला (कड़वा) दूसरे नीम चढ़ा

खराब और गंदी नियत वाले व्यक्ति कुसंगति में पडकर और भी खराब हो जाते हैं।

एक (ही) थैले के चट्टे-बट्टे

सभी लोग एक ही प्रकार के।

एक न शुद, दो शुद

पहले से ही एक परेशानी है एक परेशानी और सही।

एक पथ दो काज

एक ही वस्तु या फिर एक ही साधन से 2 कामों को पूरा करना।

एक मछली सारे तालाब को गंदा करती है

किसी परिवार में या फिर किसी ग्रुप में अगर एक व्यक्ति खराब चरित्र वाला है तो उसकी वजह से उसके पूरे घर या फिर उसके पूरे ग्रुप की बदनामी होती है।

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एक लख पूत सवा लख नाती, तो रावण घर दीया न बाती

किसी दमदार व्यक्ति का जब पूरी तरह से सर्वनाश हो जाता है तो इस प्रकार की लोकोक्ति का इस्तेमाल किया जाता है।

ओठों निकली कोठोंचढ़ी

मुंह से निकलने वाली बातें कभी ना कभी हर जगह फैल ही जाती है।

ओखली में सिर दिया तो मूसलों का क्या डर

दुख दर्द सहने पर उतारू हो जाने के पश्चात कष्ट होने का कोई भी डर नहीं रहता है।

और बात खोटी, सही दाल-रोटी

दुनिया की सभी चीजों में से खाना ही मुख्य चीज है।

अंधों में काना राजा

कुछ मूर्ख लोगों में एक समझदार अथवा पढ़ा लिखा व्यक्ति

अकेला चना भाड़ नहीं फोड़ सकता

अकेला आदमी असहाय हो जाता है।

अधजल गगरी छलकत जाय

बड़ी-बड़ी बातें कहना।

आँख का अँधा नाम नयनसुख

जैसा गुण हैं उसके ठीक विपरीत नाम होना।

आँख के अंधे गाँठ के पूरे

बेवकूफ परंतु पैसे वाला

आग लागंते झोपड़ा, जो निकले सो लाभ

नुकसान होते होते जो भी बचा रह जाए वही फायदा है।

आगे नाथ न पीछे पगही

किसी भी प्रकार की जिम्मेदारी नहीं होना।

आम के आम गुठलियों के दाम

ज्यादा फायदा

ओखली में सर दिया तो मूसलों से क्या डरे

काम करने की सनक

ऊँची दुकान फीका पकवान

अत्याधिक नाम परंतु काम बेकार

एक पंथ दो काज

एक ही काम करने पर दूसरा काम भी हो जाना

कहाँ राजा भोज कहाँ गंगू तेली

दमदार और निर्बल की कैसी तुलना

घर का जोगी जोगड़ा, आन गाँव का सिद्ध

पास का व्यक्ति कम सम्मान प्राप्त करता है परंतु दूर का व्यक्ति अधिक सम्मान प्राप्त करता है।

चिराग तले अँधेरा

किसी को अपने अंदर की खराबी नहीं दिखती।

जिन ढूंढ़ा तिन पाइयाँ गहरे पानीपैठ

मेहनत का फल अवश्य प्राप्त होता है।

नाच न जाने आँगन टेढ़ा

काम ना पता होना और बहाने बनाना

न रहेगा बाँस, न बजेगी बाँसुरी

ना कोई वजह होगी ना ही काम होगा।

होनहार बिरवान के होत चीकने पात

प्रतिभावान व्यक्ति के लक्षण पहले ही दिखाई दे जाते हैं।

जंगल में मोर नाचा किसने देखा

किसी गुण की कदर तभी होती है जब उसे सभी लोग जानें अथवा देखें।

कोयल होय न उजली, सौ मन साबुनलाई

कितनी भी कोशिश कर ली जाए परंतु स्वभाव ना बदले।

चील के घोसले में माँस कहाँ

ऐसी जगह जहां कुछ भी बचने की संभावना बिल्कुल भी ना हो।

चोर लाठी दो जने और हम बाप पूतअकेले

ताकतवर आदमी से दो व्यक्ति भी हार जाते हैं।

चंदन की चुटकी भरी, गाड़ी भरा न काठ

जो अच्छी चीज होती है वह कम होने पर भी अधिक श्रेष्ठ होती है। परंतु मामूली चीज ज्यादा होने पर भी उसकी कीमत ज्यादा नहीं होती है।

छप्पर पर फूंस नहीं, ड्योढ़ी पर नाच

राजा जैसा ठाठ बाट का दिखावा करना परंतु वास्तविकता उससे अलग

छछूंदर के सर पर चमेली का तेल

अयोग्य व्यक्ति के पास अच्छी अथवा योग्य वस्तु होना

जिसके हाथ डोई, उसका सब कोई

पैसे वाले व्यक्ति के सभी लोग मित्र होते हैं।

सूखी तलाईया म मेंढक करय टर-टर

जब कोई व्यक्ति जागते हुए अपनी आंखों से सपने देख कर खुश होता है तो इस लोकोक्ति का इस्तेमाल होता है।

जिसकी बंदरी वही नचावे और नचावे तो काटन धावे

जो काम जिसका होता है उसे वही सही प्रकार से कर पाता है।

जिसकी बिल्ली उसी से म्याऊँ करे

जब किसी का पाला हुआ व्यक्ति अपने पाले हुए व्यक्ति को ही काटने के लिए दौड़े।

जिसकी लाठी उसकी भैंस

जिस व्यक्ति के पास ताकत होती है वही हमेशा विजेता बनता है।

जिसके पास नहीं पैसा, वह भलामानस कैसा

जो व्यक्ति पैसे से मजबूत होता है उसे ही लोग अच्छा आदमी समझते हैं और जिस व्यक्ति के पास पैसा नहीं होता उसे लोग अच्छा आदमी नहीं समझते।

जिसके राम धनी, उसे कौनकमी

भगवान के भरोसे रहने वाले व्यक्ति को कभी भी किसी भी चीज की तंगी नहीं झेलनी पड़ती ना ही उसे किसी चीज की कमी होती है।

जिसके हाथ डोई (करछी) उसका सब कोई

पैसे वाले व्यक्ति का सभी लोग साथ देते हैं और सभी उसकी आवभगत में लगे रहते हैं।

जिसे पिया चाहे वही सुहागिन

उसी व्यक्ति का सम्मान होता है और उसी व्यक्ति की उन्नति होती है जिस पर मालिक कृपा बरसाते हैं।

जी कहो जी कहलाओ

अगर हम किसी व्यक्ति को सम्मान देंगे तो हमें भी सम्मान की प्राप्ति होगी।

जीभ और थैली को बंद ही रखना अच्छा है

कम बोलने से अधिक फायदा होता है साथ ही कम खर्च करने से भी ज्यादा फायदा होता है।

जीभ भी जली और स्वाद भी न पाया

किसी को बहुत ही अच्छी चीज सिर्फ थोड़ी मात्रा में खाने के लिए दिया जाए।

जीये न मानें पितृ और मुए करेंश्राद्ध

यह लोकोक्ति कुपात्र संतानों के लिए कही गई है जो जिंदा रहते हुए तो अपने माता पिता की सेवा नहीं करते हैं परंतु उनके मर जाने के पश्चात उनकी संतान हर साल उनके नाम पर श्राद्ध करते हैं।

जी ही से जहान है

अगर हमारा जीवन है तभी सब कुछ है। इसलिए हमें हर प्रकार से अपने प्राण को बचाने का प्रयास करना चाहिए।

जुत-जुत मरें बैलवा, बैठे खाय तुरंग

जब किसी व्यक्ति के द्वारा कठिन मेहनत की जाए और उसकी मेहनत का फल कोई दूसरा व्यक्ति उठाता है ,तब इस लोकोक्ति को कहा जाता है। जैसे कि गरीब आदमी मेहनत मजदूरी करता है और उसका फायदा पूंजीपति व्यक्ति को मिलता है।

जूँ के डर से गुदड़ी नहीं फेंकी जाती

सामान्य सी तकलीफ या नुकसान के डर से कोई भी व्यक्ति काम को नहीं छोड़ता है।

जेठ के भरोसे पेट

यह लोकोक्ति तब कहीं जाती है जब कोई इंसान गरीब होता है और उसकी पत्नी का पालन पोषण उसका बड़ा भाई अर्थात महिला का जेठ करता है।

जेते जग में मनुज हैं तेते अहैं विचार

दुनिया में जितने भी इंसान हैं उन सभी की प्रकृति, प्रवृत्ति और अभिरुचि अलग-अलग होती है।

जैसा ऊँट लम्बा, वैसा गधा खवास

जब दो मूर्ख व्यक्ति एक साथ मिल जाते हैं तब इस प्रकार की लोकोक्ति कही जाती है।

जैसा कन भर वैसा मन भर

थोड़ी सी चीज की भी जांच करने से यह बात पता चल जाती है की राशि कैसी है।

जैसा काछ काछे वैसा नाच नाचे

आदमी को वैसे ही काम करना चाहिए जैसा उसका वेश है।

जैसा तेरा ताना-बाना वैसी मेरी भरनी

तुम जिस प्रकार से मेरे साथ पेश आओगे, उसी प्रकार से मैं तुम्हारे साथ व्यवहार करूंगा।

जैसा देश वैसा वेश

जिस जगह का जैसा रीति रिवाज है वैसे ही वहां पर रहना चाहिए और आचरण करना चाहिए।

जैसामुँह वैसा तमाचा

जो आदमी जैसे स्वभाव का होता है उसके साथ वैसा ही व्यवहार करना चाहिए।

जैसी औढ़ी कामली वैसा ओढ़ा खेश

जिस प्रकार की परिस्थिति हो, व्यक्ति को उसी परिस्थिति के हिसाब से अपना रहन सहन कर लेना चाहिए।

जैसी चले बयार, तब तैसी दीजे ओट

परिस्थिति और समय के अनुसार ही इंसान को काम करना चाहिए।

जैसे कन्ता घर रहे वैसे रहे विदेश

लफंगे आदमी के घर में निवास करने से ना तो कोई फायदा होता है ना ही उसके बाहर रहने से किसी भी प्रकार का नुकसान होता है।

जैसे को तैसा मिले, मिले डोम को डोम, दाता को दाता मिले, मिले सूम को सूम

जो व्यक्ति जिस प्रकृति का होता है उसे अपनी जिंदगी में वैसी ही प्रकृति के लोग अधिक मिलते है।

फलों का नाम हिंदी और अंग्रेजी में

FAQ

अपनी-अपनी डफली, अपना-अपना राग लोकोक्ति का मतलब क्या है ?

किसी भी काम को सही प्रकार से नहीं करना।

अमानत में खयानत लोकोक्ति का मतलब क्या है ?

किसी के पास सुरक्षित रखी गई चीज को खर्च कर देना।

अस्सी की आमद, चौरासी खर्च

इनकम से ज्यादा खर्चा करना।

अति सर्वत्र वर्जयेत्

किसी भी काम में हमें सीमा बनाकर रखनी चाहिए और मर्यादा पार नहीं करनी चाहिए।

वस्तु की आकृति का नाम हिंदी व अंग्रेज़ी में

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