सूर्य नमस्कार (Surya Namaskar) क्या है

हमारे देश में प्रतिदिन योग से जुड़े हुए कई आसन करते है और योग के तहत सूर्य नमस्कार भी किया जाता है | दर असल सूर्य नमस्कार को योग के सभी आसनों में सर्वश्रेष्ठ माना जाता है, क्योंकि यह आसन शरीर को सही आकार देने के साथ ही मन को शांत व स्वस्थ बनाये रखता है | सूर्य नमस्कार अकेला एक ऐसा अभ्यास है, जो व्यक्ति को पूर्ण योग व्यायाम का लाभ पहुँचाता है। खासकर यह ऐसे लोगो के लिए बहुत ही उपयोगी है, जिनके पास समय का आभाव होता है | 

इस आसन को प्रतिदिन सुबह के समय सूर्य के सामने करने से शरीर को विटामिन डी भरपूर मात्रा प्राप्त होती है, जिसके कारण आपका शरीर पूरा दिन चुस्त दुरुस्त बना रहता है | सूर्य नमस्कार (Surya Namaskar) क्या है, इसके फायदे और नुकसान के बारे में आपको यहाँ विस्तार से बता रहे है |

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सूर्य नमस्कार का क्या मतलब होता है (Surya Namaskar)

हिंदू धर्म में सूर्य को भगवान के रूप में माना गया है और इस सृष्टि के लगातार चलने के लिए सूर्य देव ही उत्तरदायी है | सबसे खास बात यह है कि विश्व में ऊर्जा का सबसे बड़ा व एकमात्र स्रोत सूर्य ही है, जिनसे हमें प्रतिदिन की ऊर्जा की प्राप्ति होती है और हम दैनिक कार्यों को संपन्न कर पाते है | ‘सूर्य नमस्कार’ का शाब्दिक अर्थ सूर्य को नमस्कार करना है | यह एक प्रकार की शारीरिक क्रिया होती है, जो सूर्य उदय के समय की जाती है | इस व्यायाम के दौरान सूर्य भगवान की पूजा की जाती है |  

‘सूर्य नमस्कार’ 12 योगासनों को मिलाकर बनाया गया है और प्रत्येक आसान का अपना एक अलग महत्व है | इस आसन को करनें से अनेक प्रकार के रोगों से मुक्ति मिलती है, साथ ही शरीर में खून का संचार भी दुरुस्त होता है | यह एक ऐसा आसन है, जिसके द्वारा आप अपना तनाव कम कर सकते हैं |

संस्कृत श्लोक अर्थ सहित

सूर्य नमस्कार मंत्र (Surya Namaskar Mantra)

आदित्यस्य नमस्कारन् ये कुर्वन्ति दिने दिने।

आयुः प्रज्ञा बलम् वीर्यम् तेजस्तेशान् च जायते॥

अर्थ-  ऐसे लोग जो लोग प्रतिदिन सूर्य नमस्कार करते हैं, उनकी आयु, प्रज्ञा, बल, वीर्य और तेज बढ़ता है |

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सूर्य नमस्कार कब व कहाँ करे (When &where to do Surya Namaskar)

सूर्य नमस्कार सदेव सूर्य उदय होनें या सूर्यास्त के समय ही करना चाहिए। सूर्योदय के समय सूर्य से आने वाली किरणें हमारे स्वास्थ्य के लिए बहुत ही लाभदायक सिद्द होती है | सबसे खास बात यह है कि सूर्य नमस्कार हमेशा खुले स्थल मेंअपना मुख सूर्य देव की ओर रखकर करना चाहहिये |

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सूर्य नमस्कार के 12 आसन (12 Steps of Surya Namaskar)

सूर्य नमस्कार करने की एक पूरी प्रक्रिया बनायी गई है, और इस व्यायाम में कुल 12 आसन शामिल हैं  जो इस प्रकार है- 

1.प्रणाम आसन (Prayer Pose)

सूर्य नमस्‍कार की शुरुआत प्रणाम मुद्रा से होती है | इस आसन को करने के लिए आप सबसे पहले सावधान की मुद्रा में खड़े हो जाये और अपने दोनों हाथों को कंधे के समानांतर उठाते हुए दोनों हथेलियों को ऊपर की ओर ले जाए। हाथों के अगले भाग को एक-दूसरे से चिपका लीजिए फिर हाथों को उसी स्थिति में सामने की ओर लाकर नीचे की ओर गोल घूमते हुए नमस्कार की मुद्रा में खड़े हो जाइए |

2.हस्तउत्तानासन (Hastauttanasana)

हस्तउत्तानासन में सांस लेते हुए दोनों हाथों को ऊपर की ओर उठाया जाता है, और कमर से पीछे की ओर झुकते हुए भुजाओं और गर्दन को पीछे की ओर झुकाएं | इस आसन के दौरान गहरी और लंबी सांस भरने से फेफड़ों की क्षमता बढ़ती है |

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3.हस्तपाद आसन (Hasta Padasana)

सूर्य नमस्कार की इस तीसरी अवस्‍था में श्वास को धीरे-धीरे बाहर निकालते हुए आगे की ओर झुकना होता है | इसके साथ ही इस इस आसन में हम अपने दोनों हाथों से अपने पैर के अंगूठे को पकड़ते हैं |

4.अश्व संचालन आसन (AshwaSanchalanasana)

इस आसन को करते समय पैर का पंजा खड़ा हुआ रहना चाहिए और अपनें हाथों को जमीन में रखकर सांस लेते हुए दाहिने पैर को पीछे की तरफ ले जाना होता है | इसके बाद सीने को आगे खीचते हुए गर्दन को ऊपर उठाएं | इस आसन को करते समय यह ध्यान रखे कि कमर झुकनी नहीं चाहिए | 

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5.दण्डासन (Dandasana)

इस आसन को करते समय बाएँ पैर को पीछे किया जाता है और शरीर सीधी रेखा का आकार ले लेता है |

6.अष्टांग नमस्कार (AshtangaNamaskara)

इस आसन में आपको जमीन की ओर मुह करके लेटना होता है और घुटने, सीने और ठोड़ी को जमीन पर लगा कर जांघों को थोड़ा ऊपर उठाते हुए सांस को छोडना होता है।

7.भुजंग आसन (Bhujangasana)

भुजंग आसन करनें के दौरान आपके शरीर का उपरी हिस्सा उठा रहता है, जबकि शेष भाग  जमीन से लगा रहता हैं और आपको ऊपर की ओर देखना होता है | इसके साथ ही हाथो कि सहायता से अपने शरीर को ऊपर को ओर उठाना होता है |

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8.पर्वतासन (Parvatasana)

पर्वतासन करने के दौरान सिर्फ आपके हाथ और पैर ही जमीन पर लगे होते हैं बाकी शरीर का हिस्सा ऊपर कि ओर होता है | पर्वतासन में आपके पूरे शरीर का भार हाथों और पैरों पर होता है |

9.अश्वसंचालन आसन (AshwaSanchalanasana)

अश्वसंचालन आसन चौथे नंबर पर किये गए आसन की तरह किया जाता है |

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10.हस्तपाद आसन (Hasta Padasana)

हस्तपाद आसन तीसरे नंबर पर किये गये आसन को पुनः एक बार किया जाता है |

11.हस्तउत्थान आसन (Hastauttanasana)

हस्तउत्थान आसन ठीक दूसरे नंबर पर किये गये आसन की तरह ही है |

12.प्रणाम आसन (Prayer Pose)

यह आसन पहले आसन की भांति ही है अर्थात प्रणाम करनें की मुद्रा | इन 12 मुद्राओं को करनें के पश्चात पुन: विश्राम की स्थिति में खड़े हो जाएं और प्रणाम आसन को एक बार फिर से करे | यहाँ आपको यहाँ ध्यान रखना है, कि सूर्य नमस्कार शुरुआत में चार से पांच बार और अंत में इसे बढ़ाकर कम से कम 12 से 15 बार तक करे |

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सूर्य नमस्कार के फायदे

सूर्य नमस्कार करनें से एक दो नहीं बल्कि इससे अनगिनत लाभ हैं, इनमें से कुछ इस प्रकार है- 

  • प्रतिदिन नियमतः सूर्य नमस्कार करनें से शरीर में रक्त के परिसंचरण में सुधार होता है।
  • सूर्य नमस्कार करनें से हमारा संपूर्ण शरीर स्वस्थ रहनें के साथ ही रोग-मुक्त रहने में मदद करता है |
  • सूर्य नमस्कार करनें से पाचन शक्ति में वृद्धि होती है |
  • सूर्य नमस्कार धीमी गति से करनें से हमारा शरीर लचीला बनता है और यदि मध्यम गति से करें तो मांसपेशियों को टोन करने में मदद करता है |
  • यदि आप सूर्य नमस्कार तेज गति से करें तो यह एक हर्ट-रेट बढानें वाला व्यायाम है, इसके साथ ही इससे वज़न घटाने में मदद मिलती है |
  • शरीर की सभी प्रणालिया जैसे कि पाचन, श्वसन, प्रजनन, तंत्रिका और अन्तःस्त्रावी ग्रंथि को संतुलित करता है |
  • सूर्य नमस्कार व्यायाम मानसिक शांति देने के साथ ही धैर्य प्रदान करता है |

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सूर्य नमस्कार करने से जुड़ी सावधानियां (Precautions for Surya Namaskar)

सूर्य नमस्कार करते समय कुछ सावधानी बरतना आवश्यक होता है, जो इस प्रकार है- 

  • मासिक धर्म और गर्भावस्था के बाद चार माह तक महिलाओं को इस क्रिया को नहीं करना चाहिए |
  • सूर्य नमस्कार करने के तुरंत बाद स्नान करनें से परहेज करे यह व्यायाम करने के कम से कम 15 मिनट बाद ही स्नान करना चाहिए |
  • यदि किसी व्यक्ति को किसी प्रकार की चोट लगी हो या फिर उसकी रीढ़ की हड्डी में कोई दिक्कत हो तो उसे ये व्यायाम नहीं करना चाहिए |
  • हाई ब्लडप्रेशर, हर्निया,ह्रदय रोग से ग्रषित व्यक्ति को सूर्य नमस्कार नहीं करना चाहिए |
  • बुखार या जोड़ो में दर्द होनें के अवस्था में यह व्यायाम नहीं करना चाहिए |

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यहाँ आपको सूर्य नमस्कार (Surya Namaskar) के बारे में जानकारी दी गई है | यदि इससे संतुष्ट है, या फिर इससे समबन्धित अन्य जानकारी प्राप्त करना चाहते है तो कमेंट करे और अपना सुझाव प्रकट करे, आपकी प्रतिक्रिया का निवारण किया जायेगा | अधिक जानकारी के लिए hindiraj.com पोर्टल पर विजिट करते रहे |

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