नाग पंचमी क्या होता है

हिन्दू धर्म में कई ऐसे पर्व होते है, जो बहुत ही धूमधाम के साथ मनाये जाते है | इसी तरह सावन में नाग पंचमी का एक पर्व बहुत ही धूमधाम के साथ मनाया जाता है |  नांग पंचमी का यह पर्व हर साल सावन शुक्ल पक्ष की पंचमी के दिन मनाया जाता है | इस बार नागपंचमी का यह पर्व कल शनिवार 25 जुलाई को मनाया जाएगा |  इस दिन नागदेव की पूजा करने की परंपरा निभाई जाती है | इस दिन सभी घरों में नाग देवताओं की पूजा की जाती है | वहीं, मान्यता है कि, नाग पंचमी के दिन पूरे विधि-विधान के साथ सर्पों की पूजा करने से नाग देवताओं का आशीर्वाद प्राप्त होता है। जिससे जीवन की सभी समस्याओं का निवारण हो जाता है | हिन्दू धर्म में इस दिन का अत्याधिक महत्व माना जाता है | इसलिए यदि आपको नाग पंचमी के इस पर्व के विषय में अधिक जानकारी नहीं है और आप इसके विषय में जानने की इच्छा रखते है, तो यहाँ पर आपको नाग पंचमी क्या होता है, नाग पंचमी क्यों मनाई जाती है, नाग पंचमी के बारे में जानकारी प्रदान की जा रही है |

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  नाग पंचमी मानाने का शुभ मुहूर्त

कल सावन शुक्ल पक्ष की पंचमी है और इस दिन नागदेव  की पूजा करने की परंपरा सदियों से चली आ रही है | नाग पंचमी के दिन सभी लोग अपने दरवाजे पर नाग बनाकर उसकी पूजा करते है और वहीं बहुत से ऐसे लोग भी होते है, जो जीवित सर्पों को भी नाग पंचमी के दिन दूध पिलाते है | 

  • नागपंचमी 2020 : 25 जुलाई
  • पूजा मुहूर्त- 5 बजकर 43 मिनट से 8 बजकर 25 मिनट तक
  • पंचमी तिथि प्रारंभ- 24 जुलाई के दोपहर 2 बजकर 33 मिनट पर
  • पंचमी तिथि समाप्ति- 25 जुलाई 12 बजकर 01 मिनट पर

नाग पंचमी क्या होता है ?

नाग पंचमी एक पर्व है, जिसे सावन महीने में ही मनाया जाता है | वहीं हिन्‍दू धर्म में नाग को शिव शंकर के गले का हार और सृष्टि के पालनकर्ता श्री हरि विष्‍णु की शैय्या माना जाता है। इसलिए मान्यता है कि, नाग पंचमी के इस शुभ अवसर पर नागों की पूजा करने से भोले बाबा और विष्णु भगवान प्रसन्न हो जाते हैं।  सावन के महीने में वर्षा होती है, जिस कारण सांप जमीन के अंदर से निकलकर बाहर आ जाते हैं। इसके बाद नाग पंचमी के दिन इन्हे दूध पिलाकर इनसे अपनी मनोकामना को पूरी करने के लिए प्रार्थना करते है | 

ऐसे में माना जाता है कि, अगर नाग देवता को दूध पिलाया जाए और उनकी पूजा की जाए तो वे किसी को नुकसान नहीं पहुंचाते हैं। इसके अलावा कुंडली दोष को दूर करने के लिए भी नागपंचमी का दिन बहुत ही शुभ माना जाता है। ज्‍योतिष शास्‍त्र के अनुसार, काल सर्प दोष को दूर करने के लिए नाग पंचमी के दिन नाग देवता की पूजा और रुद्राभिषेक करना चाहिए।

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पूजन विधि

नागपंचमी के दिन सुबह जल्दी उठकर नित्य कर्मों से निवृत्त होकर सबसे पहले भगवान शंकर का ध्यान करना चाहिए | इसके बाद नाग-नागिन के जोड़े की प्रतिमा (सोने, चांदी या तांबे से निर्मित) के सामने इस मन्त्र को पढ़ना शुभ माना जाता है |   

मन्त्र 

अनन्तं वासुकिं शेषं पद्मनाभं च कम्बलम्।

शंखपाल धार्तराष्ट्रं तक्षकं कालियं तथा।।

एतानि नव नामानि नागानां च महात्मनाम्।

सायंकाले पठेन्नित्यं प्रात:काले विशेषत:।।

तस्मै विषभयं नास्ति सर्वत्र विजयी भवेत्।।

इसके बाद व्रत-उपवास एवं पूजा-उपासना का संकल्प लिया जाता है और फिर नाग-नागिन के जोड़े की प्रतिमा को दूध से स्नान करवाया जाता है |  इसके बाद शुद्ध जल से स्नान कराकर गंध, पुष्प, धूप, दीप से पूजन करें तथा सफेद मिठाई का भोग लगाने का विधान पूरा किया जाता है और साथ ही में सफेद कमल का फूल पूजा में रखकर यह प्रार्थना करनी चाहिए | 

श्लोक

सर्वे नागा: प्रीयन्तां में ये केचित् पृथिवीतले।

ये च हेलिमरीचिस्था येन्तरे दिवि संस्थिता।।

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नागपंचमी कथा 

पौराणिक कथा के मुताबिक, एक समय एक सेठ हुआ करते थे |  उनके 7 बेटे थे | सेठ ने अपने सातों  बेटों की शादी कर दी थी | सेठ के सबसे छोटे बेटे की पत्नी श्रेष्ठ चरित्र की विदूषी और सुशील थी, लेकिन उसका कोई भाई नहीं था | एक दिन बड़ी बहू ने घर लीपने के लिए पीली मिट्टी लाने के लिए सभी बहुओं को चलने को कहा | इस पर शेष सभी बहुएं उनके साथ चली गईं और डलिया और खुरपी लेकर मिट्टी खोदने लगीं, तभी वहां एक नाग निकला | इससे डरकर बड़ी बहू ने उसे खुरपी से मारना शुरू कर दिया |  इस पर छोटी बहू ने उसे रोका | इस पर बड़ी बहू ने सांप को छोड़ दिया और वह नाग पास ही में जा बैठा | छोटी बहू उसे यह कहकर चली गई कि, हम अभी लौटते हैं, तुम जाना मत, लेकिन वह काम में व्यस्त हो गई और नाग को कही अपनी बात को भूल गई | अगले दिन उसे अपनी बात याद आई, तो वह भागी-भागी उस ओर गई, देखा तो नाग वहीं बैठा था | छोटी बहू ने नाग को देखकर कहा…

सर्प भैया को मेरा नमस्कार…

नाग ने कहा- ‘तूने भैया कहा तो तुझे माफ करता हूं, नहीं तो झूठ बोलने के अपराध में अभी डस लेता | ‘छोटी बहू ने उससे माफी मांगी तो सांप ने उसे अपनी बहन बना लिया | कुछ दिन बाद वह सांप इंसानी रूप लेकर छोटी बहू के घर पहुंचा और बोला कि ‘मेरी बहन को भेज दो | सबने कहा कि ‘इसके तो कोई भाई नहीं था’, तो वह बोला- ‘मैं दूर के रिश्ते में इसका भाई हूं, बचपन में ही बाहर चला गया था’ | उसके विश्वास दिलाने पर घर के लोगों ने छोटी बहू को उसके साथ भेज दिया |

रास्ते में नाग ने छोटी बहू को बताया कि, वह वही नाग है और उसे डरने की जरूरत नहीं, जहां चला न जाए मेरी पूंछ पकड़ लेना | बहन ने भाई की बात मानी और वे जहां पहुंचे वह सांप का घर था | वहां धन-ऐश्वर्य को देखकर वह चकित हो गई और फिर एक दिन भूलवश छोटी बहू ने नाग को ठंडे की जगह गर्म दूध दे दिया, इससे उसका मुंह जल गया | इस पर सांप की मां बहुत गुस्सा हुई, तब सांप को लगा कि बहन को घर भेज देना चाहिए, इस पर उसे सोना, चांदी और खूब सामान देकर घर भेज दिया |

इसके साथ ही में सांप ने छोटी बहू को हीरे-मणियों का एक अद्भुत हार दिया था | उसकी प्रशंसा खूब फैल गई और रानी ने भी सुनी | रानी ने राजा से उस हार की मांग की | राजा के मंत्रि‍यों ने छोटी बहू से हार लाकर रानी को दे दिया | छोटी बहू ने मन ही मन अपने भाई को याद किया और कहा- ‘भाई, रानी ने हार छीन लिया, तुम ऐसा करो कि जब रानी हार पहने तो वह सांप बन जाए और जब लौटा दे तो फिर से हीरे और मणियों का हो जाए | सांप ने अपनी बहन की बात को मानते हुए वैसा ही किया |

रानी से हार वापस तो मिल गया, लेकिन बड़ी बहू ने उसके पति के कान भर दिए | पति ने अपनी पत्नी को बुलाकर पूछा- ‘यह धन तुझे कौन देता है?’ छोटी बहू ने सांप को याद किया और वह प्रकट हो गया, इसके बाद छोटी बहू के पति ने नाग देवता का सत्कार किया | इसके बाद से उसी दिन से नागपंचमी पर महिलाएं नाग को भाई मानकर उसकी पूजा करती हैं | 

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