Official Secrets Act in Hindi

हमारे देश में आज भी बहुत से लोग ऐसे है, जो अपनें देश की गोपनीय जानकारी सिर्फ कुछ पैसो की लिए अन्य देशों को बेंच देते है | अभी तक ऐसे कई प्रकरण सामनें आ चुके है, इनमें राफेल डील से सम्बंधित दस्तावेज, डिफेन्स से जुड़ी अहम् जानकारी और अन्य कई ऐसे दस्तावेज है, जिन्हें सार्वजनिक करना देश के हित में नहीं है, उन्हें सार्वजानिक कर दिया गया | हाल ही में एक भारतीय पत्रकार भी इस प्रकार के कार्य में लिप्त पाया गया है, जो आज-कल काफी सुर्ख़ियों में है |  यदि कोई व्यक्ति देश की सुरक्षा या हित के खिलाफ किसी भी कार्य में लिप्त पाया जाता है, तो उसके विरुद्ध ऑफिसियल सीक्रेट एक्ट 1923 के अंतर्गत कार्यवाही किये जानें का प्रावधान है | आईये जानते है ऑफिसियल सीक्रेट एक्ट 1923 क्या है ? इस एक्ट के बारें में पूरी जानकारी आपको इस पेज पर विस्तार से दे रहे है |      

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ऑफिशियल सीक्रेट एक्ट 1923 क्या है (What is the Official Secret Act 1923)

ऑफिशियल सीक्रेट एक्ट को शार्ट में ओएसए (OSA) कहा जाता है । ऑफिशियल सीक्रेट एक्ट 1923 भारत का जासूसी-विरोधी अधिनियम है, जो अंग्रेजी शासनकाल से जुड़ा है । इस एक्ट के अंतर्गत भारत के खिलाफ दुश्मन देश की मदद करना अपराध है |  वर्ष 1889 में अंग्रेजी शासनकाल के दौरान इंडियन ऑफिशल सीक्रेट एक्ट (Act XIV) नाम से लाया गया था | अंग्रेजो द्वारा इस कानून को लागू करनें का मुख्य उद्देश्य उस दौरान देश में छपने वाले अख़बारों की आवाज को दबाना था, क्योंकि अख़बार के माध्यम से लोगों के अन्दर राजनीतिक जागरूकता को बढ़ावा मिल रहा था, जो अंग्रेजी राज के लिए एक बड़ा ख़तरा बन कर उभर रहा था ।

ऑफिशियल सीक्रेट एक्ट 1923 भारत का जासूसी-विरोधी एक्ट के अंतर्गत कोई भी व्यक्ति सरकार द्वारा प्रतिबंधित क्षेत्र में न जा सकता है, न ही उसकी जांच कर सकता है और न उसके आसपास से गुजर सकता है | इस एक्ट के तहत यदि कोई व्यक्ति दोषी पाया जाता है अर्थात  यह पाया जाता है, कि वह व्यक्ति भारत में या भारत के बाहर रह रहे विदेशी एजेंट के संपर्क में है तो उसके विरुद्ध कड़ी कार्रवाई करनें का प्रावधान है | इस कानून के मुताबिक सरकार की किसी भी गोपनीयता को जनता के बीच उजागर नहीं किया जा सकता ।

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ऑफिशियल सीक्रेट एक्ट की प्रमुख धाराएँ (Major Sections of Official Secret Act)

ऑफिशियल सीक्रेट एक्ट अर्थात ओएसए कानून मुख्य रूप से दो मामलों में हस्तक्षेप करने का अधिकार रखता है । ओएसए के सेक्शन 3 के प्रावधन के अंतर्गत जासूसी करने और सेक्शन 5 के अंतर्गत गोपनीय जानकारी, पासवर्ड, स्केच, योजनाओं आदि को सार्वजनिक करने पर सजा दिए जानें का प्रावधान है । सबसे खास बात यह है कि दस्तावेजों के संबंध में कार्रवाई को लेकर संबंधित मंत्रालय ओएसए (OSA) नहीं बल्कि अपने 1994 के दिशा निर्देशों का पालन करता है। इसके तहत देश की सुरक्षा तथा राष्ट्रहित के विरुद्ध कार्य के उद्देश्य से निम्नलिखित को दंडनीय माना गया है –

  • सरकार द्वारा प्रतिबंधित क्षेत्र में किसी निषिद्ध स्थान में प्रवेश करना, उसके निकट जाना, उसका निरीक्षण करना, उसका ऐसा रेखाचित्र, प्लान, मॉडल या नोट बनाना जो देश के लिए खतरा बन सकता है ।
  • किसी ऐसी सूचना को प्रकाशित करना अथवा नोट, लेख अथवा दस्तावेज़ के माध्यम से ऐसी सूचना देना जो किसी दशा में शत्रु के लिये उपयोगी सिद्ध हो सकती है ।
  • ऐसी कोई भी सूचना या जानकारी जिसके प्रकाशन से देश की सार्वभौमिकता व एकता, सुरक्षा अथवा अन्य राष्ट्रों के साथ मैत्रीपूर्ण संबंधों पर विपरीत प्रभाव पड़ता है ।
  • कोई ऐसा व्यक्ति जो अपनें देश के अन्दर की ख़ुफ़िया जानकारी देश की सुरक्षा के खिलाफ प्रयोग करे या ऐसे लेख, मानचित्र, मॉडल आदि अपने पास रखे जिन्हें रखने का वह अधिकारी न हो अथवा अपने अधिकार क्षेत्र के ऐसे दस्तावेज़ों की सावधानीपूर्वक रक्षा न करे जिससे उनके शत्रु के हाथ में पड़ जाने का खतरा हो तो उसे सज़ा हो सकती है ।

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आरटीआई और ओएसए में वरीयता (RTI And OSA Preferred)

आरटीआई अर्थात सूचना के अधिकार के सेक्शन-22 ओएसए सहित अनेको प्रतिबंध लगाने वाले कानून पर वरीयता रखता है । ऐसे में यदि कोई जानकारी ऑफिशियल सीक्रेट एक्ट अर्थात ओएसए का हवाला देकर नहीं साझा की जाती है, ऐसे में आरटीआई उस कानून के प्रभाव को खत्म कर देता है । 

हालांकि सूचना के अधिकार के सेक्शन 8 और 9 के  अंतर्गत सरकार के पास अधिकार है कि वह जानकारी देने से इनकार कर दे । हालांकि, यदि सरकार किसी दस्तावेज को गोपनीय मानती है और वह ओएसए के सेक्शन 6 के प्रभाव क्षेत्र में आता है, तो उसे आरटीआई के दायरे से बाहर रखा जाता है ।

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ऑफिशियल सीक्रेट एक्ट कब-कब लागू किया गया (When was the OSA Implemented)

स्वतंत्र भारत में 1985 में प्रधानमंत्री कार्यालय और राष्ट्रपति भवन में कार्यरत 12 सदस्यों के विरुद्ध इस कानून के अंतर्गत कार्यवाही की गयी, और वर्ष 2002 में उन सभी 12 सदस्यों को 10 वर्ष की सजा सुनाई गई | इन लोगों को दूसरे देशों को गोपनीय दस्तावेज साझा करने का दोषी पाया गया था । इसके अतिरिक्त  एक और हाईप्रोफाइल केस सामने आया, जिसमें इसरो में जासूसी की बात सामने आई । इसरो वैज्ञानिक एस नंबी नारायण को भी ओएसए के तहत ट्रायल से गुजरना पड़ा ।    

वर्ष 2018 में इस्लामाबाद में कार्यरत माधुरी गुप्ता को पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI को गोपनीय दस्तावेज देने के आरोप में तीन साल की सजा सुनाई गई । इसके अलावा कश्मीर टाइम्स के पत्रकार इफ्तकार गिलानी को भी OSA के तहत 2002 में गिरफ्तार किया गया था ।

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