5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था का अर्थ

किसी भी देश को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए उसमें बड़े सुधार की आवश्यकता होती है | विश्व के कई देशों की अर्थव्यवस्था 5 ट्रिलियन डॉलर से कई गुना अधिक है जिस कारण वहां पर संसाधनों की कमी नहीं है | इन देशों में लोग एक उच्च जीवन व्यतीत कर रहे है | यह सभी देश विकसित है, भारत भी विकासशील से विकसित देश बनने का प्रयास कर रहा है |

भारतीय प्रधानमंत्री के द्वारा भारत की अर्थव्यवस्था को 5 ट्रिलियन डॉलर करने का संकल्प लिया गया है, इसलिए 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था के विषय में जानकारी होना अत्यंत आवश्यक है |

भारतीय अर्थव्यवस्था में कोर सेक्टर क्या है

अर्थव्यवस्था को किस प्रकार मापते (Measure) है?

किसी देश की अर्थव्यवस्था को उसकी कुल सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के द्वारा मापा जाता है | इसका अर्थ है कि देश का कुल सकल घरेलू उत्पाद जितना अधिक होगा उस देश की अर्थव्यवस्था उतनी ही बड़ी होगी |

सकल घरेलू उत्पाद (GDP)

एक वित्तीय वर्ष में देश की सीमा के अंदर कुल उत्पादित वस्तुओं और सेवाओं के जोड़ को सकल घरेलू उत्पाद (GDP) कहा जाता है | जीडीपी को इस प्रकार से मापते हैं-

सकल घरेलू उत्पाद (GDP) = (खपत+निजी निवेश+सरकारी खर्च+निर्यात)-आयात |

जीडीपी में निजी निवेश, सरकारी खर्च और निर्यात को जोड़ने के बाद उसमें से आयात को घटाया जाता है |

8 प्रतिशत की जीडीपी (GDP) दर

भारत को 5 लाख करोड़ डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के लिए भारत की जीडीपी को 8 प्रतिशत की दर से आगे बढ़ाना होगा | यह दर अगले पांच साल तक लगातार बनी रहनी चाहिए | इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए निवेश बढ़ाने का प्रयास करना होगा | भारत को एक लाख करोड़ डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने में 55 वर्ष लग चुके है और पिछले पांच वर्षों में भारत सरकार ने एक लाख करोड़ डॉलर की बढ़ोत्तरी की है | वर्तमान समय में भारत की अर्थव्यवस्था 2.7 लाख करोड़ डॉलर है इससे पांच वर्ष पहले यह 1.850 लाख करोड़ थी |

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चुनौतियाँ

  • भारत ऊर्जा क्षेत्र में अभी भी बहुत ही पीछे है, वह अपनी आवश्यकता के लिए अन्य देशों पर निर्भर रहता है | केंद्र को राज्य सरकारों के साथ मिलकर टैरिफ नीति में सुधार करना चाहिए | टैरिफ नीति से उद्योगों एवं बड़े उपभोक्ताओं को लाभ प्राप्त हो सकेगा | इससे कृषि क्षेत्र एवं घरेलू उपभोक्ताओं को भी लाभ प्राप्त होगा, कृषि क्षेत्र सिंचाई संकट से जूझ रहा है |
  • भारत ने पिछले एक दशक में नवीकरणीय ऊर्जा में सात गुना वृद्धि दर्ज की है, परन्तु वह अभी भी मुख्य रूप से कोयला आधारित ऊर्जा पर निर्भर है | कोयला संयत्रों के द्वारा 80 प्रतिशत ऊर्जा का उत्पादन किया जाता है |
  • भारत में वैश्विक स्तर के इन्फ्रास्ट्रक्चर की कमी है, वर्तमान समय में ग्रामीण एवं दूरदराज़ के क्षेत्र कनेक्टिविटी से दूर हैं | अंतर्देशीय जलमार्ग के क्षेत्र में सुधार किया जा रहा है, लेकिन इसमें बड़े स्तर पर कार्यवाही करने की आवश्यकता है |
  • किसी भी देश की अर्थव्यवस्था में पूंजीगत सहयोग उस देश की बैंकिंग व्यवस्था द्वारा दिया जाता है | भारत में बैंकिंग क्षेत्र गैर-निष्पादित संपत्ति (NPA) की समस्या से जूझ रहा है, पहले की तुलना में NPA में सुधार किया गया है | भारतीय रिज़र्व बैंक को बैंकों की सेहत सुधारने के अधिक प्रयास करना होगा |

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