Digital Address Code (DAC) क्या है ?



भारत में वर्ष 2014 से सभी क्षेत्रों में डिजिटल रूप से संचालित करने के लिए बढ़ावा दिया जा रहा है, इसी कड़ी में भारत सरकार द्वारा देश में डिजिटल एड्रेस कोड यानि Digital Address Code (DAC) लाने की प्रक्रिया की जा रही है | इसकी सहायता से बिना एड्रेस डाले ही Online Shopping का सामान आपके घर पहुंचेगा। यानि कि अब आपको ऑनलाइन माध्यम से डिलीवरी आर्डर करने या संपत्ति टैक्स का भुगतान करने हेतु, बार – बार प्रदान करने की आवश्यकता नहीं होगी।

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इसके लिए बस आपको आधार की तरह अपने पते के लिए एक यूनिक कोड की जरूरत होगी। यह सम्पूर्ण देश में प्रत्येक एड्रेस हेतु एक डिजिटल एड्रेस कोड (डीएसी) के माध्यम से संभव हो पायेगा। यहाँ आपको Digital Address Code (DAC) क्या है तथा डीएसी कोड कैसे कार्य करेगा इसके बारे में जानकारी उपलब्ध कराई गई है |

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Digital Address Code (DAC) क्या है ?

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भारत सरकार के डाक विभाग के द्वारा Digital Address Code (DAC) का निर्माण किया जा रहा है। इस व्यवस्था के अन्तर्गत हर एक मकान का अपना एक अलग कोड होगा। यह आधार कार्ड के नम्बर के जैसा ही एक यूनीक कोड होगा जो भारत के प्रत्येक नागरिक को उनके address के हिसाब से दिया जाएगा। सरल शब्दों में समझा जाए, अगर कोई दो मंजिला बिल्डिंग है, और उसमें 10 फ्लैट है, तो प्रत्येक फ्लैट का अपना एक अलग कोड होगा। यदि कोई दो मंजिला घर है, और उसमें दो परिवार रहते हैं तो दोनों परिवारों के अलग अलग कोड बनेंगे। अब तो आप समझ ही गए होंगे कि DAC और कुछ नहीं बल्कि आपके एड्रेस का एक यूनिक कोड है, जिससे आने वाले समय में आपको ऑनलाइन डिलीवरी समेत कई प्रकार की सुविधाओं में सहायता प्राप्त होगी।

Digital Address Code (DAC) को कैसे बनाया जा रहा है?

Digital Address Code को बनाने के लिए देश के प्रत्येक address को आइडेंटिफाइ किया जाएगा। address को आइडेंटिफाइ करने के बाद उसे geospatial coordinates से लिंक कर दिया जाएगा। ऐसा करने से देश के प्रत्येक नागरिक के एड्रेस को उसके सड़क या मोहल्ले से नहीं बल्कि यूनिक नंबर्स और अक्षरों वाले कोड से पहचाना जा सकेगा। हाल ही में डाक विभाग ने अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर Digital Address Code के ड्राफ्ट के अप्रोच पेपर को रिलीज किया है। ताकि स्टेकहोल्डर्स इस पर अपनी प्रतिक्रिया और सुझाव दे सकें। अगर DAC को अप्रूवल मिल जाता है, तो यह देशवासियों के लिए बहुत अधिक फायदेमंद साबित होगा।

डीएसी कोड कैसे कार्य करेगा?

डीएसी कोड को आप टाइप करके इस्तेमाल कर सकेंगे या फिर आप क्यूआर कोड की तरह इसे स्कैन करके घर की सटीक लोकेशन हासिल कर पाएंगे। DAC कोड के आने के बाद किसी भी काम के लिए आपको एड्रेस फीड करने की झंझट से छुटकारा मिल जाएगा। आप DAC कोड की मदद से डिजिटल मैप्स भी देख सकेंगे।

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Digital Address Code (DAC) के लाभ

Digital Address Code (DAC) को अनुमति मिल जाने के उपरांत, इस प्रकार के बहुत सारे लाभ देखने को मिल सकते है:- 

  • इसके माध्यम से प्रत्येक घर का ऑनलाइन पते का सत्यापन (Address Verification) आसानी से हो पायेगा। इसके अलावा बैंकिंग, बीमा, टेलिकॉम के ई-केवाईसी (E – KYC) की प्रक्रिया बेहद आसान हो जाएगी।
  • ई-कॉमर्स कम्पनी तथा एनबीएफसी (NBFC) कंपनियों की सर्विस हेतु DAC बहुत अधिक मददगार बन सकता है।
  • भारत सरकार तथा राज्य सरकारो की ओर से जारी सरकारी योजनाओं को जारी करने में Digital Address Code बेहद मददगार सिद्ध होगा। इसके अलावा वर्तमान में हो रही फ्रॉड की घटनाओं को रोकने में सहायता प्रदान करेगा।
  • इसके अलवा सम्पति (Property), टैक्सेशन, आपदा प्रबंधन और जनगणना तथा जनसंख्या रजिस्टर को बनाने में मदद प्राप्त होगी। Digital Address Code (DAC) वन नेशन वन एड्रेस (One Nation One Address) के सपने को साकार करने में सहायता प्रदान करेगा।

Digital Address Code (DAC) क्यों जरूरी है?

DAC कोड एक पर्मानेंट कोड की काम करेगा जिसके आने के बाद से ई-कॉमर्स जैसी सर्विस काफ़ी आसान हो जाएगी। साथ ही टैक्स फाइल करना, eKYC और address verification जैसे अनेक कार्य बिना एड्रेस फीड किए ही DAC कोड से आसनी से हो जाएंगे।

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