आरएसएस (RSS) संघठन क्या है

आरएसएस (RSS) भारत का प्रमुख स्वयंसेवी संगठन कहा जाता है इसका मुख्य उद्देश्य  भारत को खुशहाल रखना , समृद्धशाली, सनातन संस्कृति के मूल्यों  को बनाये रखने का होता है | यह ऐसा संगठन है, जिसने हमेशा समाज में वर्ग भेद, जाति भेद व ऊँच-नीच का भेदभाव  को खत्म  करने का प्रयास किया | इसके साथ ही इस संगठन में रक्षक समता, मण्डल समता, गण समता, दण्ड प्रदर्शन, योगासन, नियुद्ध व घोष का प्रदर्शन  भी होता  है |

यह संगठन हमेशा  देश में आने वाली सभी आपदाओं का सामना करने के लिए तैयार रहता  है | यहाँ पर आरएसएस (राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ) संगठन क्या है | इसकी विस्तृत जानकारी दी जा रही है |

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आरएसएस का फुल फॉर्म

RSS का  फुल फॉर्म “Rashtriya Swayamsevak Sangh” होता  है | इसे हिंदी भाषा में “राष्ट्रिय स्वयंसेवक संघ” कहते है | संघ का नामकरण 17 अप्रैल 1926 को किया गया, जिसमें इसका  नाम ‘ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ’ रखा गया था |

आरएसएस क्या है?

राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ का प्रमुख उद्देश्य लोगों  को सनातन धर्म के बारे में पूरी जानकारी देना और उन्हें जागरूक  करके धर्म के साथ  जोड़ने का होता हैं |  इसके साथ ही यह संघ देश में सामाजिक, आर्थिक, नागरिक, पर्यावरण और अन्य  सभी चुनौतियों का सामना करते हुए उनका समाधान करने का काम करता है | जब आरएसएस का संघठित किया गया था, तो उस समय इसमें केवल 17 लोग ही शामिल हुए थे  परन्तु, वर्तमान समय में इस संघ के साथ सम्पूर्ण भारत  के लाखों लोग  है | वहीं संघ में शामिल होने वाले सदस्यों में हेडगेवार के साथ विश्वनाथ केलकर, भाऊजी कावरे, अन्ना साहने, बालाजी हुद्दार, बापूराव भेदी प्रमुख लोग मौजूद थे |

संघ का नामकरण   

इस संघ का नामकरण करने से पहले इस पर काफी विचार- विमर्श किया गया कि, इस संघ का क्या नाम तय किया जाए, जिसके लिए तीन  नामो राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, जरीपटका मंडल और भारतोद्वारक मंडल का सुझाव दिया गया | संघ  नामकरण के समय वहां पर  26 सदस्य  मौजूद थे | इसके बाद विचार-विमर्श  किया गया और वहां मौजूद लोगों से वोटिंग कराई गयी थी, जिसमें  से 26 सदस्यों में  20 वोट राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पक्ष में थे ,  और 6 वोट अन्य दोनों नाम के लिए किये गए थे | इसलिए इस प्रकार से संघ का नाम राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ रख दिया गया था |

संघ की स्थापना

संघ की स्थापना केशव बलराम हेडगेवार ने  27 सितंबर 1925 को विजयदशमी के दिन की थी | आरएसएस द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, संघ परिवार में 80 से अधिक समविचारी या आनुषांगिक संगठन हैं, यह सम्पूर्ण विश्व के 40 देशों में सक्रीय है | इस समय संघ की 56 हजार 569 दैनिक शाखाएं है | इसके  साथ ही करीब  13 हजार 847 साप्ताहिक मंडली और 9 हजार मासिक शाखाएं भी हैं | अगर हम पंजीकरण की बात करे तो इसमें  पंजीकरण नहीं होता है | वहीं जानकारी देते हुए बताया गया है  कि, “50 लाख से अधिक स्वयंसेवक नियमित रूप से शाखाओं में आते हैं | इसकी शाखा प्रत्येक तहसील और लगभग 55 हजार गांवों में है |”

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संघ के प्रमुख कार्य

राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ सदैव देश के हित के बारे में सोचते हुए काम करता है | संघ ने सभी लोगों को सनातन धर्म के प्रति जागरूक किया और साथ ही  लोगों को हिन्दुओं  के साथ जोड़ने का मुख्य काम किया है |

1963 – स्वामी विवेकानन्द ने जन्मशताब्दी के अवसर पर विवेकानन्द शिला स्मारक निर्मित का संकल्प  लिया और इसके बाद सम्पूर्ण देश के जन मानस को  जागरूक करते हुए विवेकानन्द स्मारक का निर्माण कराया गया |

1964 –  विश्व हिन्दू परिषद् की स्थापना की गई थी |

1969 –   उड्डपी में आयोजित धर्म सभा में अस्पृश्यता अमान्य कर दिया गया तथा धर्म  के किसी भी स्थान पर छुआछूत की कोई जगह  न होने का ऐलान  किया गया   |

1986-  श्रीराम जन्मभूमि आन्दोलन द्वारा हिन्दू समाज का स्वाभिमान जाग्रत किया गया  |

आरएसएस का उद्देश्य 

आरएसएस का प्रमुख उद्देश्य राष्ट्रवादी व्यक्तित्व का निर्माण करना है | आरएसएस सनातन समाज को संगठित करके भारत को उन्नति के शिखर पर ले जाना है, और देश को प्रगति के क्षेत्र में आगे बढ़ाने के कार्य में संलग्न है | देश में कोई आपदा या समस्या आ जाने पर संघ, लोगों को आर्थिक और शारारिक रूप से मदद प्रदान करता है |

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