X- Ray क्या है?



आज हम इस आर्टिकल के माध्यम से आपको X – Ray क्या होता है | X – Ray से क्या पता चलता है | एक्स रे और अल्ट्रासाउंड में क्या अंतर है ? के बारे में जानकारी दी गई है। 

अक्सर हड्डियों से जुड़ी समस्याओं जैसे, हड्डी टूटना, पैर में मोच आना इसके अलावा चेस्ट इन्फेक्शन से जुड़ी समस्याओं के लिए डॉक्टर द्वारा X Ray कराने की सलाह दी जाती है।  X-Ray द्वारा मरीज के उस प्रभावित अंग की बाहरी और अंदरूनी तस्वीरें ली जाती हैं, जिस अंग में पेसेंट को प्रॉब्लम होती है। 

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अगर आप X – Ray के बारे में और अधिक जानकारी प्राप्त करना चाहते हैं, तो X – Ray से जुड़ी सभी महत्वपूर्ण जानकारियाँ आपको आगे दी गई हैं।

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X-Ray क्या होता है?

Table of Contents



What is X-ray: X-Ray एक सामान्य इमेजिंग टेस्ट है, जो कि रेडियोलॉजी का एक प्रकार है, इसमें एक्सरे किरणों की मदद से शरीर के अंदरूनी अंगों की पिक्चर्स यानि तस्वीरें लेकर मरीज की बीमारी अथवा प्रॉब्लम का पता लगाया जाता है। एक्सरे की खोज विलहोम रोंगटन ने की थी। ये बहुत ही उच्च आवृत्ति रेंज 1016 हर्ट्ज से 1020 हर्ट्ज है।

एक्सरे का उपयोग सदियों से बीमारियों के निदान के लिए किया जाता है, इसके माध्यम से मरीज को क्या प्रॉब्लम है बिना किसी चीरे या कट लगाए डॉक्टर आसानी से मरीज के अंदरूनी अंगो की इमेज लेकर उन्हें देखकर पता कर सकते है।

Xray एक आम इमेजिंग टेस्ट तो है ही साथ ही इसके माध्यम से कई बीमारियों के इलाज में भी मदद मिलती है और मरीज की बीमारी का पता लगाकर जल्द से जल्द उसे उचित उपचार देकर ठीक करने का प्रयास भी किया जाता है। बदलते समय के साथ X Ray के क्षेत्र में भी कई इन्वेंशन हुए हैं, जिसमें आजकल कई एडवांस मशीनें X Ray की जांच के लिए उपलब्ध हैं।

X Ray दर्द रहित होता है, लेकिन अलग अलग प्रकार के X Ray कराने का उद्देश्य भी अलग-अलग होता है, जो कि मरीज की परेशानी और बीमारी पर निर्भर करता है, जैंसे:

  • Standard Computed Tomography 
  • Chest X Ray
  • Lungs Xray
  • Teeth And Bones X Ray
  • Abdomen X-Ray
  • Kidney, Ureter And Bladder X Ray

ऊपर दिए गए एक्सरे के प्रकार मरीज की परेशानी और बीमारी पर निर्भर है और डॉक्टर्स को जो उचित लगता है उस प्रकार के एक्सरे कराने की सलाह मरीज को दे सकते हैं।

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X -Ray से क्या पता चलता है? 

X Ray Kyu Kiya Jata Hai: किसी भी इंसान के शरीर से जुड़ी विभिन्न प्रकार की बीमारियों का आसानी से पता लगाने के लिए अक्सर डॉक्टर एक्सरे कराने की सलाह देते हैं, ताकि पेशेंट को जल्दी से जल्दी ठीक किया जा सके। और पेशेंट को उसकी बीमारी से जुड़ी दवा दी जा सके। नीचे मरीज के शरीर में होने वाली विभिन्न परेशानियों अथवा कुछ अलग-अलग बीमारियों के बारे में बताया गया, जिनके लिए X Ray कराने की आवश्यकता होती है, जैसे:

  • इंसान के किस अंग में क्या बीमारी है,इसका पता लगाने के लिए। 
  • ऑस्टियोपोरोसिस जैसी बीमारियों के निदान के लिए।
  • फेफड़ों की समस्याएं।
  • इन्फेक्शन।
  • टूटी हड्डियों का पता लगाने के लिए।
  • पेट में दर्द।
  • कैंसर। 
  • अर्थराइटिस।
  • फेफड़ों का कैंसर।
  • हड्डियों का कैंसर।
  • दांतों मैं सड़न।
  • पाचन क्रिया गड़बड़ हो जाना।
  • दबी हुई नशों का पता लगाना।

आदि जैसी बीमारियों का पता X Ray के माध्यम से आसानी से लगाया जा सकता है, इसके लिए डॉक्टर के द्वारा रोगी की जरूरत के हिसाब से एक्सरे किए जाते हैं।

एक्स रे और अल्ट्रासाउंड में क्या अंतर है ?

Difference Between X Ray and Ultrasound in Hindi: एक्सरे ओर अल्ट्रासाउंड दोनों अलग-अलग जांच है, जिनका अलग-अलग उपयोग चिकित्सकीय क्षेत्र मे किया जाता है, इनमें क्या अंतर है, आईये इसके बारे में जानते हैं, जैंसे:

  • एक्सरे में किसी अंग की इमेज कैप्चर की जा सकती है, जबकि अल्ट्रासाउंड मे किसी अंग की Ontime विडियो देखी जा सकती है                 
  • एक्सरे विद्युत चुंबकीय तरंगे है, जबकि अल्ट्रसाउंड को यांत्रिक ध्वनिक तरंग के रूप मे वर्गीकृत किया गया है।
  • एक्सरे की आवृत्ति रेंज 1016 हर्ट्ज से 1020 हर्ट्ज है, जबकि अल्ट्रासाउंड तरंगों की आवृत्ति रेंज 20 किलोहर्ट्ज से ऊपर होती है | 
  • एक्सरे परमाणुओं और अणुओं को आयनित कर सकते है, जबकि अल्ट्रासाउंड में ऐंसा नहीं कर सकते है। 
  • एक्सरे मे ऊतक प्रवेश क्षमता होती है, जबकि अल्ट्रासाउंड में ऐसा संभव नहीं हैं।
  • एक्सरे मे उच्च ऊर्जा है, जो मानव शरीर को नुकसान पहुंचा सकती है, जबकि अल्ट्रासाउंड उपयोग करने की दृष्टि से सुरक्षित है। 
  • एक्सरे के रेडिएशन से कैंसर का खतरा रहता है, जबकि अल्ट्रासाउंड से ऐंसा कोई खतरा नहीं है। 
  • एक्सरे में सभी अंगों कि जांच आसानी से की जा सकती है, जबकि अल्ट्रासाउंड में प्रमुखतः पेट से संबंधित जांचे की जाती है।
  • एक्सरे की जांच अल्ट्रासाउंड की अपेक्षा सस्ती है, जबकि अल्ट्रासाउंड थोड़ी महंगी जांच है।

Xray और अल्ट्रासाउंड का उपयोग अपने-अपने क्षेत्र में विशिष्ट है,जो कि मरीज की परेशानी और बीमारी पर निर्भर करता है, जिसमें मरीज के लिए जो भी जांच महत्वपूर्ण होती है उसे कराने की सलाह डॉक्टर द्वारा दी जाती है।

X Ray कराने के फायदे

पेशेंट की परेशानी और जरूरत के हिसाब से और मरीज को शरीर के जिस भी भाग में परेशानी होती है, उसका पता लगाने के लिए डॉक्टर X Ray कराने की सलाह देते हैं ताकि अंग विशेष में जो परेशानी है उसका इलाज किया जा सके और रोगी को जल्द से जल्द ठीक किया जा सके। 

एक्सरे के माध्यम से यह पता लगाया जा सकता है, कि शरीर का जो हिस्सा प्रभावित है, वह कितना प्रभावित है या इसके अलावा उस अंग से जुड़े कोई और अंग तो प्रभावित नहीं हैं।

फ्रैक्चर, चोट, हड्डियों में उपजी असमानता सहित कई समस्याओं का निदान करने के लिए डॉक्टर द्वारा एक्सरे कराने की सलाह दी जाती है।

X Ray कराने के नुकसान

Xray कराने से कोई खास नुकसान नहीं है लेकिन कुछ सावधानियां बरतनी जरूरी होती है, जैसे:

  • यदि पेट का एक्सरे है, तो एक्सरे के एक या दो घंटे पहले तक कुछ नहीं खाना चाहिए। 
  • एक्सरे कराते समय कोई भी धातु जैंसे गहने, कड़े आदि नहीं पहनने चाहिए।
  • यदि किसी टूटी हड्डी या चोट से संबंधित जगह का एक्सरे करना होता है, तो थोड़ा बहुत दर्द का अनुभव हो सकता है।
  • बहुत ही दुर्लभ मामलों में रेडिएशन के कारण गंभीर साइड इफेक्ट हो सकते हैं। 
  • कुछ गंभीर स्थितियों में जब आपका एक्सरे किया जा रहा हो तब आपको किसी एक ही पोजीशन में रहने के लिए कहा जा सकता है, जिससे आपको थोड़ी परेशानी हो सकती है।
  • रेडिएशन की वजह से आपको थोड़ी परेशानी हो सकती है।
  • प्रेगनेंट महिलाओं को एक्सरे कराने की सलाह नहीं दी जाती है, क्योंकि रेडिएशन की वजह से गर्भ से संबंधित समस्या हो सकती हैं।

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Conclusion

उपरोक्त आर्टिकल के माध्यम से हमने आपको एक्सरे और अल्ट्रासाउंड से जुड़ी लगभग सभी जानकारियां साझा कर दी हैं, जिसमें एक्सरे और अल्ट्रासाउंड दोनो के उपयोग और जांच संबंधी सभी तथ्य शामिल है। उम्मीद है, आपको आर्टिकल पसंद आया होगा। धन्यवाद।

FAQ’s 

अल्ट्रासाउंड क्या होता है? 

अल्ट्रासाउंड एक प्रकार का मेडिकल परिक्षण है, जिसमें उच्च आवृति की ध्वनि तरंगों द्वारा शरीर के अंदर की ऑनटाइम इमेज ली जाती है, इसके अलावा इनकी वीडियो रिकॉर्डिंग भी की जा सकती है। अल्ट्रासाउंड मे आवृति रेंज 20 किलोहर्ट्ज से ऊपर होती है। इतना ही नहीं दिल के कक्षों के माध्यम से रक्त स्पंदन की जांच भी की जा सकती है। अल्ट्रासाउंड सामान्यतः गर्भवती महिलाओं की जांच के लिए की जाती है, इसे सोनोग्राफी के नाम से भी जाना जाता है। अल्ट्रासाउंड अत्यधिक घनी वस्तुओं जैंसे हड्डियों या हवा से भरे अंगों जैंसे कि फेफड़ों आदि देखने के लिए नहीं किया जाता 

X-Ray कैसे किया जाता है?

X Ray कराने के लिए किसी विशेष तैयारी की आवश्यकता नहीं होती है, जब X Ray किया जाता है, तो मरीज को एक बड़ी सी टेबल पर लिटाया जाता है और शरीर के जिस भी अंग का X Ray करना होता है उसके सामने X Ray ट्यूब लटका दिया जाता है, जिससे टेबल के एक दराज के नीचे एक चित्र बनता है और टेक्नीशियन द्वारा उस अंग की इमेज ली जाती है जो कि अंग के अंदरूनी भाग की होती है।

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