एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) क्या है



Air Quality Index Explained: भारत ही नहीं बल्कि दुनिया के अधिकांश देश वायु प्रदूषण की बढ़ती समस्या से ग्रसित है | वायु प्रदूषण वैश्विक समाज के लिए एक प्रमुख चुनौती के रूप में उभरा है । वर्तमान में वैश्विक स्तर पर हालात इस तरह है कि विश्व की लगभग 90 प्रतिशत से अधिक जनसँख्या प्रदूषित  वायु में साँस लेने के लिये विवश है | जबकि वैश्विक स्तर पर इसे लेकर प्रयास भी किये गए हैं, परन्तु इसके बावजूद यह विश्व की अधिकांश आबादी को प्रभावित कर रहा है।



सर्दियों के मौसम में यह समस्या और भी गंभीर हो जाती है | भारत में दिल्ली एक ऐसा राज्य है, जहाँ पिछले कई वर्षो से एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) सबसे खतरनाक स्तर पर पहुँच जाता है | ऐसे में प्रश्न यह उठता है, कि आखिर एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) क्या है, और यह लोगो के जीवन को कैसे प्रभावित करता है ? 

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एयर क्वालिटी इंडेक्स क्या होता है (What is Air Quality Index) ?

AQI Meaning in Hindi: एयर क्वालिटी इंडेक्स मुख्य रूप से वायु की गुणवत्ता की माप के लिए बनाये गए हैं | इंडेक्स से हमें यह जानकारी प्राप्त होती है, कि जिस हवा में हम जीवन जी रहे हैं, उसमें कितनी शुद्धता है | हवा में पीएम 10, 2.5, कार्बन मोनोऑक्साइड (CO), सल्फर डाइऑक्साइड (SO2) और नाइट्रोजन डाइऑक्साइड (NO2) सहित 8 प्रदूषकों की मात्रा वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन (WHO) द्वारा निर्धारित किए गए मानकों के तहत है अथवा नहीं | वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) मुख्य रूप से 8 प्रदूषकों से मिलाकर बनाया जाता है, इसमें PM10, PM2.5, NO2, SO2, CO, O3, NH3, और Pb शामिल है | 



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एयर क्वालिटी इंडेक्स केटेगरी (Air Quality Index Category)

Air Quality Index List: वायु की गुणवत्ता के आधार पर इस इंडेक्स में 6 केटेगरी अच्छी, संतोषजनक, थोड़ा प्रदूषित, खराब, बहुत खराब और गंभीर बनायीं गई हैं | जैसे-जैसे वायु की गुणवत्ता ख़राब होती जाती है, उसकी गुणवत्ता के अनुसार रैंकिंग अच्छी से ख़राब और फिर गंभीर की श्रेणी में आती जाती है :-

  • 0 से 50 के बीच एक्यूआई को अच्छा
  • 51 से 100 के बीच संतोषजनक
  • 101 से 200 के बीच मध्यम
  • 201 से 300 के बीच खराब
  • 301 और 400 के बीच ‘बेहद खराब’
  • 401 से 500 के बीच ‘गंभीर’ माना जाता है | 

पीएम 2.5 और पीएम 10 क्या है (What is PM 2.5 and PM 10) ?

PM 10 and PM 2.5 in Hindi: पीएम (PM) को पर्टिकुलेट मैटर या कण प्रदूषण भी कहते है, यदि हम पीएम 2.5 कि बात करे तो यह हवा में घुलने वाले ऐसे कण होते है, जिनका व्यास 2.5 माइक्रोमीटर या उससे कम होता है | वायु में पीएम 2.5 कि मात्रा अधिक होनें पर धुंध बढ़ जाती है और विजिबिलिटी (Visibility) का स्तर गिरता चला जाता है | यह कण इतनें छोटे होते है जिसे हम अपनी आँखों से नहीं देख सकते है | इसका अनुमान इस प्रकार लगा सकते है एक व्यक्ति का बाल लगभग 100 माइक्रोमीटर का होता है, इसलिए इसकी चौड़ाई पर पीएम 2.5 के लगभग 40 कणों को रखा जा सकता है |

यदि हम पीएम 10 कि बात करे तो इनके कणों का व्यास 10 माइक्रोमीटर या उससे कम होता है |  इसमें धूल के साथ-साथ धातु के सूक्ष्म कण भी शामिल होते हैं | पीएम 2.5 और 10 धूल, निर्माण कार्य, कूड़ा और पराली जलाने से सर्वाधिक बढ़ता है | आपको बता दें, कि पीएम 2.5 का सामान्य स्तर  60 माइक्रो ग्राम क्‍यूबिक मीटर (एमजीसीएम) तथा पीएम 10 का सामान्‍य माइक्रो ग्राम क्‍यूबिक मीटर होना चाहिए | 

आपको यहाँ एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) के विषय में जानकारी उपलब्ध करायी गई है | अब आशा है आपको जानकारी पसंद आयी होगी | यदि आप इससे संतुष्ट है, या फिर अन्य कोई जानकारी प्राप्त करना चाहते है तो कमेंट करके पूंछ सकते है, और अपना सुझाव प्रकट कर सकते है | आपकी प्रतिक्रिया का जल्द ही जवाब देने का प्रयास किया जायेगा | अधिक जानकारी के लिए hindiraj.com पोर्टल पर विजिट करते रहे |

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