इंटरपोल (INTERPOL) क्या है

हमारे देश में कई ऐसे अपराधी है, जो अपराध करनें के बाद दूसरे देश भाग जाते है | भारत में ऐसे लोगो को संख्या एक दो नहीं बल्कि सैकड़ों में है | अभी कुछ समय पहले लगभग 14 हजार करोड़ रुपये के पीएनबी बैंक घोटाले में नीरव मोदी और मेहुल चौकसी का नाम सामने आया, लेकिन जब इस घोटाले की जानकारी हुई तो यह दोनों मुख्य आरोपी भारत छोड़कर विदेश जा चुके थे |

अंतरराष्ट्रीय नियमों के अनुसार किसी भी देश की पुलिस अपनें देश के आलावा दूसरे देश में जाकर उसे नहीं पकड़ सकती। ऐसी स्थितियों में इंटरपोल से मदद ली जाती है | ऐसे में प्रश्न यह उठता है, कि आखिर यह इंटरपोल क्या है? तो आईये जानते है, कि इंटरपोल (INTERPOL) क्या है, इसका फुल फॉर्म, कार्य और  इंटरपोल के बारे में पूरी जानकारी |

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इंटरपोल का फुल फार्म (Interpol Full Form)

इण्टरपोल (Interpol) का अंग्रेजी में फुल फार्म International Criminal Police Organization (इंटरनेशनल क्रिमिनल पुलिस आर्गेनाइजेशन) है, जिसे हिंदी में अंतर्राष्ट्रीय आपराधिक पुलिस संगठन कहते है | यह एक अंतर्राष्ट्रीय संस्था है जिसे 1956 से ‘इंटरपोल’ के नाम से जाना जाता है |

Interpol Full Form In EnglishInternational Criminal Police
इण्टरपोल फुल फार्म इन हिंदीअंतर्राष्ट्रीय आपराधिक पुलिस संगठन

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इंटरपोल का क्या मतलब होता है ?

इंटरपोल अर्थात इंटरनेशनल क्रिमिनल पुलिस ऑर्गनाइजेशन एक ऐसी संस्था है, जो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सभी देशों की पुलिस के बीच समन्वय का कार्य करती है | इस संस्था में इंटरपोल से सदस्य देशों की पुलिस शामिल होती है और यह संस्था वर्ष 1923 से कार्य कर रही है | इंटरपोल का मुख्यालय फ्रांस के लियोन शहर में स्थित है |

इंटरपोल का मुख्य उद्देश्य दुनिया को रहने के लिए एक सुरक्षित स्थान बनाना है | यह अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर फैले आतंकवाद से लड़ने तथा अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर होने वाले साइबर अपराधों को रोकने और संगठित अपराधियों के विरुद्ध सभी देशों की पुलिस को मिलाकर सशक्त बनाने के लिए कार्य करना है | भारत इस अंतर्राष्ट्रीय संस्था अर्थात इंटरपोल का सदस्य वर्ष 1949 में बना था | हालाँकि नार्थ कोरिया जैसे कई देश ऐसे है, जिन्होनें इंटरपोल के सदस्य नहीं है |

सभी सदस्य देशों में इंटरपोल का एक ऑफिस होता है, जिसे नेशनल सेंट्रल ब्यूरो (एनसीबी) के नाम से जाना जाता है | यह ऑफिस उस देश के पुलिस को अन्य सदस्यों के साथ जोड़ती है और इसी के माध्यम से वह आपस में सूचनाओं का आदान-प्रदान करते है |   

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इंटरपोल का इतिहास (History Of Interpol)

प्रथम विश्व-युद्ध की समाप्ति के बाद यूरोप में अपराध करनें वाले लोगो की संख्या में काफी तेजी से बढनें लगी और ऑस्ट्रिया के कुछ अपराधी दूसरे देशों में चले गये | नियमों के अनुसार ऑस्ट्रिया की पुलिस दूसरे देश की सीमा में नहीं जा सकती थी | इन स्थितियों में अपराधियों को पकड़ने के लिए वर्ष 1923 में ऑस्ट्रिया की राजधानी वियना में अनेक देशों के पुलिस अधिकारियों की एक बैठक का आयोजन किया गया, जिसमें 20 देशों ने मिलकर अपराधों को रोकनें में सहयोग देनें के लिए इंटरपोल की स्थापना की थी |

वर्ष 1938 में ऑस्ट्रिया पर जर्मनी नें हमला कर दिया और इसी के साथ इंटरपोल का भी नामों निशान ख़त्म हो गया | द्वितीय विश्व युद्ध के बाद बेल्जियम के एक पुलिस इंस्पेक्टर ‘जनरल क्लोरेंट लुवागे’ ने इंटरपोल को पुनः जीवित किया | हालाँकि बेल्जियम में सुविधाओं की कमी के कारण इसका मुख्यालय नहीं बन पाया, जिसे बाद में पेरिस के ल्यों शहर में बनाया गया | वर्ष 1955 में इंटरपोल के 55 देश देश सदस्य बन चुके थे, और वर्ष 1956 में इंटरपोल का नया संविधान बनाया गया |

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इंटरपोल के कार्य (Interpol Functions)

वर्तमान में इंटरपोल के सदस्य देशों की संख्या 194 है, जिसमें भारत भी शामिल है | इंटरपोल 194 सदस्य देशों में पुलिस को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अपराध से लड़ने के लिए मिलकर काम करने में सक्षम बनाता है | इंटरपोल सभी सदस्य देशों के साथ-साथ अंतर्राष्ट्रीय संगठनों जैसे संयुक्त राष्ट्र और यूरोपीय संघ के साथ मिलकर काम करता है ताकि अंतरराष्ट्रीय अपराध से मुकाबला किया जा सके | इंटरपोल के मुख्य कार्य इस प्रकार है-

1.वैश्विक स्तर पर पुलिस संचार सेवाओं की सुरक्षा करना (Securing Global Police Communication Services)

इंटरपोल द्वारा एक वैश्विक पुलिस संचार प्रणाली 24×7 विकसित की गयी है, जिसके माध्यम से कोई भी सदस्य देश सुरक्षित तरीके से सूचनाओं का आदान-प्रदान कर सकता है | इस प्रणाली से संपर्क ब्यूरो अर्थात लायसन ब्यूरो जुड़ा है, जिसके माध्यम से किसी भी देश के उच्च अधिकारी इंटरपोल सेवाओं को प्राप्त कर सकते हैं जैसे- डीएनए फ़िंगरप्रिंट, खोया हुआ यात्रा दस्तावेज, नकली भुगतान कार्ड, मोटर वाहन की चोरी और विशिष्ट पेंटिंग्स की चोरी आदि से जुड़ी जानकारी साझा कर सकते है |

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2.नये प्रकार के अपराधों पर रोक लगाना (Ban New Types of Crimes)

आज जिस प्रकार तकनीक का विकास हो रहा है, उसी प्रकार अपराधी भी हाईटेक होते जा रहे है | अपराधी अपराध को अंजाम देने के बाद वह देश छोड़कर दूसरे देश भाग जाते है | ऐसे अंतर्राष्ट्रीय सीमाओं को पार करने वाले भगोड़े अपराधियों को ढूंढना और गिरफ्तार (जैसे भारत सरकार इस्लामिक प्रचारक जाकिर नायक को गिरफ्तार करने के लिए इंटरपोल की मदद ले रही है ) करना और मानव तस्करी को रोकना भी इंटरपोल के कार्यों में शामिल है |

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3.वैश्विक एकजुटता बनाये रखना (Maintaining Global Solidarity)

इंटरपोल के कार्यों में अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक एकजुटता बनाना तथा परमाणु और विस्फोटक खतरों से निपटने के लिए उपाय करना शामिल हैं |

4.साइबर अपराध से निपटनें के लिए उपाय करना (Measures to deal with Cyber Crime)

साइबर अपराध आज यह किसी एक देश की समस्या नहीं है, बल्कि यह लगभग सभी देशों की समस्या है | वैश्विक स्तर पर इस प्रकार की उभरती हुई चुनौतियों की पहचान कर उनकी जाँच करना और साइबर अपराध के विरुद्ध नई प्रौद्योगिकियों का विकास करके साइबर अपराध से होने वाले खतरों से निपटने के लिए युक्ति बनाना आदि |

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5.वैश्विक अपराधियों के खिलाफ नोटिस जारी करना (Issuing Notice Against Global Criminals)

अंतरराष्ट्रीय सूचना प्रणाली द्वारा इंटरपोल जघन्य अपराध करनें वाले लोगो से सम्बंधित डेटा को सदस्य देशों तक पहुचता है |  जब कोई सदस्य देश अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सहयोग या सचेत करने का आवेदन करता है, तब नेशनल सेंट्रल ब्यूरो के आग्रह पर इंटरपोल का जनरल सेक्रेट्रिएट चार आधिकारिक भाषाओं अरबी, अंग्रेजी, फ्रेंच और स्पैनिश में नोटिस जारी करता है | इंटरपोल आठ प्रकार के नोटिस जारी करता है, जो अपने रंगों से पहचाने जाते हैं |

  • रेड नोटिस- रेड नोटिस मुख्य रूप से किसी अपराधी की गिरफ्तारी और उसके प्रत्यपर्ण के लिए जारी की जाती है।
  • ब्लू नोटिस-  ब्लू नोटिस किसी व्यक्ति के बारे में अतिरिक्त प्राप्त करनें या सूचना देने के लिए जारी कि जाती है।
  • ग्रीन नोटिस- ग्रीन नोटिस ऐसे व्यक्तियों के बारें में जो किसी जघन्य अपराध को अंजाम दे चुके है, और वह दूसरे देश में जाकर वहाँ भी अपराध कर सकते हैं।
  • येलो नोटिस- येलो नोटिस मुख्य रूप से गुमशुदा नाबालिगों के बारे में सूचनाएं देने के लिए प्रकाशित की जाती है।
  • ब्लैक नोटिस- ब्लैक नोटिस किसी लाश की शिनाख्त न होने पर जारी की जाती है।
  • ऑरेंज नोटिस-  ऑरेंज नोटिस बमों, पार्सल बमों आदि की सूचना देने के लिए जारी की जाती है।
  • पर्पल या बैंगनी रंग का नोटिस- इस रंग का नोटिस अपराध करनें के तरीके, वस्तुएं, डिवाइस और अपराधियों द्वारा बचने के लिए प्रयोग किये तरीकों के इस्तेमाल के लिए जारी किया जाता है |

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यहाँ आपको इंटरपोल (INTERPOL) की जानकारी से अवगत कराया गया है | इस प्रकार की अन्य जानकारी के लिए आप https://hindiraj.com पर विजिट कर सकते है | अगर आप दी गयी जानकारी के विषय में अपने विचार या सुझाव अथवा प्रश्न पूछना चाहते है, तो कमेंट बॉक्स के माध्यम से संपर्क कर सकते है |

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