थर्ड पार्टी इन्शुरन्स क्या होता है



हमारे देश में प्रतिवर्ष लाखों की संख्या में सड़क दुर्घटनाएं होती हैं, और इतनी बड़ी संख्या में दुर्घटनाएं होनें के बाद भी लोग अपनें वाहन के इंश्योरेंस पर ध्यान नहीं देते हैं | दरअसल हमारे देश में बहुत से लोग इंश्योरेंस से होने वाले लाभ और बचत से अनजान होते है, और इसे लेकर वह सिर्फ चालान से बचने का एक जरिया समझते है | हालाँकि देश में किसी भी प्रकार वाहन को सार्वजानिक स्थानों पर चलनें के लिए वाहन बीमा अनिवार्य है |

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यदि आप बिना इंश्योरेंस के वाहन ड्राइव कर रहे है, तो मोटर व्हीकल एक्ट 1988 के अनुसार यह एक दण्डनीय अपराध है | इसके लिए आपको सजा और जुर्माना दोनों हो सकते है | हाल ही में सरकार नें मोटर वाहन अधिनियम के नये नियम के अनुसार कार, बाइक, स्कूटर या किसी भी प्रकार की कमर्शियल गाड़ी के लिए थर्ड पार्टी इंश्योरेंस अनिवार्य कर दिया है | आखिर यह थर्ड पार्टी इन्शुरन्स क्या होता है, इसके बारें में आपको इस पेज पर विस्तार से जानकारी दे रहे है | 

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थर्ड पार्टी इंश्योरेंस का क्या मतलब होता है?

मोटर व्हीकल एक्ट के अनुसार वाहन द्वारा किसी प्रकार की दुर्घटना होनें की स्थिति में मोटर इंश्योरेंस पॉलिसी आपको दो तरह से कवर करती है। इस इंश्योरेंस में पहला इंश्योरेंस करवाने वाले का नुकसान और दूसरा जो किसी थर्ड पार्टी के नुकसान की क्षतिपूर्ति होती है | थर्ड पार्टी इंश्योरेंस के अंतर्गत फर्स्ट पार्टी इंश्योरेंस करवानें वाला व्यक्ति और सेकेंड पार्टी बीमा कम्पनी और थर्ड पार्टी वह शख्स जिसको दुर्घटना के दौरान चोट, किसी प्रकार की टूट –फूट या उसकी मृत्यु हो गयी हो |



दूसरे शब्दों में थर्ड पार्टी का मतलब यह है, जिस किसी दूसरे वाहन या किसी व्यक्ति से दुर्घटना होती है और जब हमारी गलती से हुए एक्सीडेंट से उस थर्ड पार्टी का जो भी नुकसान होता है, तो उसकी भरपाई थर्ड पार्टी इंश्योरेंस द्वारा किया जाता है |

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थर्ड पार्टी इंश्योरेंस में क्या-क्या कवर होता है (What Is Covered In Third Party Insurance)

यदि थर्ड पार्टी को दुर्घटना में किसी प्रकार की चोट लग जाती है, उसके वाहन को किसी प्रकार क्षति होती है, वह व्यक्ति दुर्घटना में हमेशा के लिए विकलांग हो जाता है या उसकी मृत्यु हो जाती है, तो ऐसी स्थिति में इंश्योरेंस कंपनी सभी तरह के कानूनी दावों से निपटती है | इसका सबसे बड़ा लाभ यह है, कि दुर्घटना के लिए आपको किसी प्रकार का हर्जाना नहीं देना पड़ता है | 

हालांकि इस दुर्घटना में आपके वाहन को क्षति होती है या आपको नुकसान पहुंचता है, तो आपको किसी भी प्रकार की क्षतिपूर्ति नहीं मिलती है| इसके अलावा यदि वाहन चलाने वाला व्यक्ति ड्राइविंग के दौरान किसी भी प्रकार के नशीले पदार्थों के प्रभाव में पाए जानें पर थर्ड पार्टी इंश्योरेंस के लिए क्लेम नहीं किया जा सकता है |

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थर्ड पार्टी इंश्योरेंस की प्रीमियम (Third Party Insurance Premium)

बीमा नियामक इरडा नें कार और दो पहिया वाहनों की कुछ श्रेणियों के लिए अनिवार्य थर्ड पार्टी इंश्योरेंस पालिसी की कीमत में 21 प्रतिशत की वृद्धि कर दी है, जो कि 16 जून 2020 से लागू हो चुकी हैं | भारतीय बीमा नियामक एवं विकास प्राधिकरण (इरडा) के आदेशानुसार 1000 सीसी से कम क्षमता वाली छोटी कारों के लिए थर्ड पार्टी पालिसी की प्रीमियम 2072 रुपये और 1000सीसी से लेकर 1500 सीसी के वाहनों की बीमा प्रीमियम  3221 रुपये निर्धारित कि गयी है | जबकि 1500 सीसी से ऊपर के वाहनों के प्रीमियम में कोई संशोधन नहीं किया गया है |

यदि हम दो पहिया वाहनों की बात करे, तो 75 सीसी से कम के वाहनों के लिए 482 रुपये,75 से 150 सीसी के बीच दोपहिया वाहन के लिए 752 रुपये,150 से 350 सीसी क्षमता वाले वाहनों के लिए 1193 रुपये की प्रीमियम निर्धारित की गयी है |

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थर्ड पार्टी क्‍लेम करनें की प्रक्रिया (Third Party Claim Procedure)

थर्ड पार्टी क्‍लेमके मामले में पार्टी निर्धारित करने के लिए एक विशेष अदालतस्थापित की गयी है, इसे मोटर दुर्घटना दावा ट्रिब्यूनल अर्थात एमएसीटी कहते है | इस प्रकार के क्‍लेम से जुड़े निर्णय एमएसीटी द्वारा ही किये जाते है।थर्ड पार्टी क्‍लेम करनें हेतु स्टेप्स इस प्रकार है-

1.दुर्घटना होनें पर सबसे पहले पुलिस को सूचित करे और एफआईआर दर्ज करवायें | हालाँकि एफआईआर दर्ज करवानें के लिए आपको कुछ जानकारी देनी होगी जो इस प्रकार है-

  • जिस वाहन का एक्सीडेंट हुआ है, उसका रजिस्ट्रेशन नंबर |
  • वाहन चालक का लाइसेंस नंबर |
  • यदि दुर्घटना के समय कोई गवाह है, तो उनका नाम और मोबाइल नंबर |
  1. एफआईआर कापी के आधार पर इंश्योरेंस कम्पनी को सूचित करे |
  2. सबसे महत्वपूर्ण बात यह है, कि दुर्घटना स्थल से वाहन हटानें से पहले उस वाहन कि एक फोटो अवश्य ले लेना चाहिए ताकि क्लेम लेनें में किसी प्रकार की समस्या ना हो |    
  3. क्‍लेम फॉर्म में घटना के बारे में सभी जानकारी जैसे ऐक्सिडेंट की तारीख और समय, दुर्घटना की जगह, दुर्घटना में शामिल गाड़ियों के नाम, नंबर और मॉडल, और ऐक्सिडेंट होनें का कारण आदि का विवरण विस्तार से अंकित होनी चाहिए।
  4. एफआईआर दर्ज होनें के बाद पुलिस द्वारा चार्जशीट बनायीं जाएगी और इसी चार्जशीट और दस्तावेजो के साथ थर्ड पार्टी बीमा के लिए मोटर दुर्घटना दावा ट्रिब्यूनल अर्थात एमएसीटी में वकील के माध्यम से केस दर्ज कराना होगा |
  5. यहाँ आपको थर्ड पार्टी क्लेम से जुड़े दस्तावेजों के साथ-साथ वाहन की आरसी जमा करना होगा, जिससे नुकसान सुनिश्चित किया जा सके |
  6. दुर्घटना के दौरान घायल होनें या मृत्यु होनें कि दशा में इंश्योरेंस कम्पनी द्वारा कितनी राशि का भुगतान किया जायेगा यह निर्धारित नहीं है, इसका निर्धारण कोर्ट द्वारा किया जाता है |

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यहाँ आपको थर्ड पार्टी इन्शुरन्स (Third Party Insurance) के बारे में जानकारी उपलब्ध कराई है | यदि इस जानकारी से संतुष्ट है, या फिर इससे समबन्धित अन्य जानकारी प्राप्त करना चाहते है तो कमेंट करके अपना सुझाव दे सकते है, आपकी प्रतिक्रिया का जल्द ही उत्तर दिया जायेगा | अधिक जानकारी के लिए hindiraj.com पोर्टल पर विजिट करते रहे |

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