आपातकाल (Emergency) क्या है

दुनिया में भारत की गिनती लोकतान्त्रिक देशो में की जाती है और यहाँ की सरकार जनता द्वारा चुनी जाती है, जो देश का शासन चलाती है | कभी-कभी देश में कुछ ऐसी परिस्थितियां उत्पन्न हो जाती है, जिसके कारण आपातकाल (Emergency) लागू करना आवश्यक हो जाता है | भारतीय संविधान के भाग 18 में अनुच्छेद 352 से 360 तक आपातकालीन प्रावधानों की व्यवस्था की गई है |

देश में आपातकाल या इमरजेंसी लागू होनें की स्थिति में केंद्र सरकार को बेशुमार शक्तियां प्राप्त हो जाती है, इसके साथ ही देश के सभी राज्य केंद्र सरकार के पूर्ण नियंत्रण में आ जाते हैं | आपातकाल (Emergency) क्या है,राष्ट्रीय आपातकाल 352, और आपातकाल क्यों लगाया जाता है ? इसके विभिन्न महत्वपूर्ण पहलुओं के बारें में यहाँ पूरी जानकारी दे रहे है | 

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आपातकाल क्या होता है (What is An Emergency)

भारतीय संविधान के भाग 18 में अनुच्छेद 352 से 360 तक आपातकालीन का प्रावधान किया गया है | भारतीय संविधान में आपातकाल (Emergency) एक ऐसा प्रावधान है, जिसका उपयोग उस समय किया जाता है, जब देश को किसी बाह्य, आन्तरिक या आर्थिक रूप से किसी प्रकार के खतरे की संभावना होती है |  जैसे कि हमारे देश पर यदि कोई दूसरा देश अचानक हमला कर देता है, तो ऐसी स्थिति में सरकार को पार्लियामेंट में कोई बिल पास करानें की आवश्यकता नहीं होती है अर्थात वह बिना बिल पास किये ही निर्णय ले सकती है | 

भारत सरकार यदि कोई बड़ा निर्णय लेती है और उसे लागू करना चाहती है, तो उन्हें सबसे पहले पार्लियामेंट में बिल पास कराना होता है | लेकिन आपातकाल लागू करनें के लिए सरकार की संसद से किसी भी तरह का बिल पास करवाने की आवश्यकता नहीं होती है | आपातकाल की स्थिति में केंद्र सरकार के पास असीमित शक्ति आ जाती है | ऐसे में वह देश के हित के लिए कोई भी अहम् निर्णय ले सकती है | इमरजेंसी लागू होते ही आम नागरिकों के अधिकार समाप्त हो जाते हैं | आपको बता दें, कि देश में आपातकाल सिर्फ राष्ट्रपति के द्वारा ही लागू किया जा सकता है |      

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भारतीय संविधान में आपातकाल का प्रावधान (Provision Of Emergency In Indian Constitution)

भारतीय संविधान में 3 प्रकार के आपातकाल का प्रावधान किया गया है, जो इस प्रकार है-

1.राष्ट्रीय आपातकाल – अनुच्छेद 352 (National Emergency)

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 352 (1) के अंतर्गत राष्ट्रीय आपातकाल की उद्घोषणा राष्ट्रपति द्वारा की जाती है | जब राष्ट्रपति पूर्ण रूप से संतुष्ट हो जाते है, कि वास्तव में देश के ऊपर गहरा संकट उत्पन्न हो सकता है या देश में ऐसी गंभीर स्थिति आ गई है जिससे युद्ध जैसे हालात बन सकते है | तो ऐसी स्थिति में वह उद्घोषणा द्वारा पूरे देश या संभावित क्षेत्र में इमरजेंसी लगा सकते है | इमरजेंसी के दौरान केंद्र सरकार के पास असीमित अधिकार शक्ति प्राप्त हो जाती है, जिसका उपयोग वह किसी भी रूप में कर सकती है |

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2.राष्ट्रपति शासन या स्टेट इमरजेंसी – अनुच्छेद 356 (State Emergency)

भारतीय संविधान के आर्टिकल 356 के राजनीतिक संकट (Political Crisis) उत्पन्न होनें के कारण राज्यों में राष्ट्रपति शासन लगाया जाता है | इसे संवैधानिक आपातकाल (Constitutional Emergency) या राज्य आपातकाल(State Emergency) के नाम से भी जाना जाता है | हालाँकि भारतीय संविधान में इस प्रकार की स्थिति के लिए आपातकाल शब्द का प्रयोग नहीं किया गया है |  

जब किसी राज्य की राजनीतिक और संवैधानिक व्यवस्था (Political And Constitutional System) विफल हो जाती है या राज्य संसद के निर्देशों का पालन करने में असमर्थ हो जाता है, तो ऐसी स्थिति में केंद्र सरकार की सिफारिश पर राष्ट्रपति द्वारा राष्ट्रपति शासन लगाया जाता है | इस दौरान न्यायिक कार्यों (Judicial functions) को छोड़कर केंद्र सरकार सभी र्पकर के राज्य प्रशासन से सम्बंधित अधिकार अपने हाथों में ले लेती है |

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3. आर्थिक आपातकाल -अनुच्छेद 360 (Economic Emergency)

वैसे तो अभी तक तक देश में आर्थिक आपातकाल लागू नहीं किया गया है, परन्तु भारतीय संविधान के अनुच्छेद 360 के अंतर्गत आर्थिक आपातकाल का प्रावधान किया गया है | आर्थिक आपातकाल उस समय लगाया जा सकता है, जब देश की अर्थव्यवस्था पूर्ण रूप ध्वस्त होने की स्थिति में आ जाए | इस इमरजेंसी के अंतर्गत देश में रहनें वाली जनता के धन और संपत्ति पर देश का अधिकार हो जाएगा | आपको बता दें, कि संविधान में जिन 3 आपातकाल स्थितियों का प्रावधान किया गया है, इसमें से आर्थिक आपातकाल को छोड़कर शेष दोनों आपातकाल लागू हो चुके है | 

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भारत में आपातकाल की जानकारी (Emergency Information in India)

भारत में अब तक 3 बार आपातकाल की घोषणा की जा चुकी है, इसका विवरण इस प्रकार है-

पहला आपातकाल (First Emergency)

भारत में सबसे पहले आपातकाल को 26 अक्तूबर 1962 में भारत-चीन युद्ध के समय लगाया गया था | इस पहले आपातकाल को 10 जनवरी 1968 को खत्म कर दिया गया था |

दूसरा आपातकाल (Second Emergency)

देश में दूसरा आपातकाल भारत और पाकिस्तान युद्ध के समय 3 दिसम्बर 1971 में श्रीमती इंदिरा गांधी के कहनें पर तत्कालीन राष्ट्रपति फ़ख़रुद्दीन अली अहमद द्वारा लगाया गया था |

तीसरा आपातकाल (Third Emergency)

देश में तीसरा आपातकाल भी श्रीमती गांधी द्वारा ही 25 जून 1975 को लगवाया गया था | 21 मार्च 1977 को इन दोनों आपातकालों को एक साथ समाप्त किया गया था |

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आपातकालसे सम्बंधित महतवपूर्ण जानकारी (Important Information Related To Emergency)

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 352 के आधार पर राष्ट्रपति तब तक राष्ट्रीय आपातकाल की उद्घोषणा नहीं कर सकता जब तक संघ का मंत्रिमंडल लिखित रूप से ऐसा प्रस्ताव उसे न भेज दे | यदि किसी करणवश आपात स्थिति घोषित की जाती है, तो आपातकाल की घोषणा के एक माह के अन्दर संसद के प्रत्येक सदन के समक्ष रखा जाता है | हालाँकि शुरुआत में यह समय 2 माह का होता था, परन्तु 1948 के 44वें संशोधन में इसकी समयसीमा घटाकर एक माह कर दी गयी | 

लोकसभा भंग होनें की दशा में यदि इमरजेंसी की उद्घघोषणा की जाती है, तो ऐसी स्थिति में लोकसभा के पुनः गठित होनें पर पहली बैठक में आपातकाल पर निर्णय होगा | आपातकाल की घोषणा लोकसभा के पुनर्गठन के बाद पहली बैठक से 30 दिनों तक जारी रहेगी | यदि संसद के दोनों सदनों से इमरजेंसी का अनुमोदन हो जाने पर आपातकाल 6 माह तक विधिवत जारी रहेगा | प्रत्येक 6 माह में संसद के अनुमोदन से इसे अनिश्चितकाल तक के लिए बढ़ाया जा सकता हैं |

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यहां आपको आपातकाल (Emergency) के बारे में जानकारी दी गई है | यदि इस जानकारी से रिलेटेड आपके मन में किसी प्रकार का प्रश्न या विचार आ रहा है, अथवा इससे सम्बंधित अन्य कोई जानकारी प्राप्त करना चाहते है, तो कमेंट बाक्स के माध्यम से पूँछ सकते है, हम आपके द्वारा की गयी प्रतिक्रिया और सुझावों का इंतजार कर रहे है |

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