टैली (Tally) क्या होता है ?



दोस्तों, हम सभी को पता है कि आज के समय में कंप्यूटर का विशेष योगदान है|  बिना कंप्यूटर के किसी भी काम को आसानी के साथ नहीं किया जा सकता है | ऐसे में कंप्यूटर की भाषा को समझने के लिए कई प्रकार  के कोर्स होते हैं जिसके माध्यम से आगे बढ़ा जा सकता है |



कंप्यूटर की इसी कड़ी को आगे बढ़ाते हुए  आज हम आपको  टैली [Tally] के बारे में विस्तृत रूप से जानकारी देने वाले हैं, टेली नामक इस कंप्यूटर प्रोग्राम का उपयोग पूरी दुनिया में किया जाता है क्योंकि यह एक सरल और सुगम एप्लीकेशन है इस सोफ्टवेयर को अच्छी तरह से सीखने के बाद यह हमारी आय का भी एक मुख्य जरिया हो सकता है तो आइए जानते हैं।

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टैली [Tally] क्या है?

टेली [Tally] एक सॉफ्टवेयर है जिसका उपयोग भारत में अकाउंटिंग संबंधी कार्यों के लिए व्यापक रूप से किया जाता है।  यह सॉफ्टवेयर मुख्य रूप से टैली सॉल्यूशन प्राइवेट लिमिटेड नाम की मल्टीनेशनल कंपनी ने बनाया है | आज के समय में लाखों लोग हैं, जो मुख्य रूप से टैली का इस्तेमाल करते आ रहे हैं।



ऐसे में टैली के माध्यम से मुख्य रूप से अपने अकाउंट से जुड़े हुए काम को सही तरीके से किया जा सकता है जिसमें अकाउंटिंग के साथ-साथ गणना करना, बिल्स बनाना और उन्हें सांझा किया जा सकता हैं।

यही वजह है कि अक्सर आपने गौर किया होगा कि जब भी हमारे दिमाग में अकाउंटिंग की बात आती है तो सबसे पहले हम टेली सॉफ्टवेयर का ही इस्तेमाल करते हैं। जिस पर बिना किसी परेशानी के ग्राफ या  कॉलम बनाते हुए अपने काम को आसान कर सकते हैं। इसके  माध्यम से अपने डेटा का रिकॉर्ड बनाकर भी रखा जा सकता है |

 टैली ( Tally) का फुल फॉर्म

ज्यादातर हम इसे शॉर्ट फॉर्म में ही इस्तेमाल करते हैं लेकिन इस का फुल फॉर्म “Transactions Allowed is a line yards” है |

 टैली ( Tally) का मुख्य इतिहास

सबसे पहले टैली ( Tally) का निर्माण 1986 में श्याम सुंदर गोयंका और भारत  गोयंका  ने किया था, उस समय उनका व्यापार इतना बड़ा नहीं था और वह एक कंपनी को चलाने का काम किया करते थे साथ ही साथ दूसरे लोगों को कच्चा माल और मशीन के पार्ट को सप्लाई करने का काम करते थे |

दोनों ही बाप बेटे कार्य के प्रति ईमानदार और मेहनती थे लेकिन ऐसा कुछ करना चाहते थे जिसके माध्यम से भारत के अन्य लोगों को भी लाभ पहुंचाया जा सके |

तो काउंटिंग के सभी कार्यों को आसान बनाने की इसी उद्देश्य के साथ भरत गोयंका ने टैली सॉल्यूशन के नाम से इस सॉफ्टवेयर को वर्ष 1986 में लांच किया। लेकिन बाद में 1988 में उन्होंने इस  प्रोडक्ट  का नाम बदलकर “टैली” रख दिया था, हालांकि 1999 में फिर से कंपनी का नाम  बदलकर “टैली सॉल्यूशन” रख दिया गया था। इस प्रकार से धीरे-धीरे करके  टैली के विभिन्न संस्करण पर ध्यान दिया गया जिसमें पहले से ज्यादा कहीं सुविधाएं और विशेषताओं को रखा गया था ताकि लोग इस सॉफ्टवेयर का सरलता पूर्वक उपयोग कर सकें।

 टैली ( Tally) के विभिन्न संस्करण

जैसे जैसे समय बदलता चला गया वैसे-वैसे इस के संस्करण में भी काफी परिवर्तन देखा गया। आने वाले नए संस्करण में नई सुविधाएं दी गई साथ ही साथ जिसके माध्यम से कार्य को पहले से कहीं ज्यादा आसान बना दिया गया था | ऐसे में आज तक कई सारे संस्करण तैयार किए गए हैं जिसके माध्यम से लोगों को सही तरीके से सारी जानकारी प्राप्त हो सकती है |

  • टैली 4.5 — जब टैली ( Tally) की शुरुआत हुई थी उस समय सबसे पहला संस्करण या वर्जन  टैली 4.5 था।  इसे सबसे पहले 1990 में बना कर लोगों के सामने पेश किया गया था |  जो कि एमएस डॉस सॉफ्टवेयर पर आधारित था जिसका लोगों ने ज्यादा इस्तेमाल नहीं किया क्योंकि इसके बारे में सभी लोगों को पर्याप्त जानकारी नहीं थी। और जाहिर सी बात है क्योंकि तब विंडोज उपयोगकर्ता इसका उपयोग नहीं कर पाते थे तो इसे ऑपरेट करना भी कठिन था।
  • टैली 5.4— यह बदलते हुए समय का नया संस्करण टैली 5.4 था। जिसे 1996 में लोगों के सामने जारी किया गया था जिसमें इसे एक ग्राफिक इंटरफ़ेस की तरह दिखाया गया था जिसके माध्यम से भी कई सारे कामों को आसान  किया  जा सकता था |
  •  टैली 6.3— यह टैली ( Tally) का तीसरा संस्करण था जिसे 2001 में जारी कर दिया गया था। यह वर्जन  या संस्करण  विंडो के ऊपर आधारित था | इसे मुख्य रूप से इसीलिए जाना गया था क्योंकि इसके माध्यम से वेट के साथ  प्रिंटिंग  किया जा सकता था जो उस समय कार्यों को अलग प्रकार से गति देने का कार्य कर रहा था |
  • टैली 7.2— टैली ( Tally) के इस वर्जन को आसानी के साथ 2005 में लांच किया गया था। इसमें खास बात यह रखी गई थी कि इसके माध्यम से  वेट के नियमों को भी लागू किया गया था साथ ही साथ उनकी विशेषताओं को भी जोड़ा गया था ताकि लोगों को इससे संबंधित समस्या ना हो सके |
  • टैली 8.1— टैली ( Tally) का यह नया संस्करण भी लोगों को पसंद आने लगा क्योंकि इसके अंतर्गत कई प्रकार से विकास किए गए थे ,जिसमें मुख्य रुप से डेटा संरचना को जगह दी गई थी। इसमें पॉइंट ऑफ सेल एवं पैरोल की नई सूची और विशेषता के साथ भी लोगों के सामने लाने की बात की गई थी |
  • टैली 9— पिछले सारे संस्करणों की अपेक्षा टैली 9 का ज्यादा इस्तेमाल किया जाने लगा जो 2006 में जारी किया गया था। पिछले संस्करण में देखा गया कि कुछ खामियां नजर आ रही थी उन खामियों को दूर करते हुए इस संस्करण को बनाया गया था जिसमें मुख्य रुप से TDS,पैरोल,E–TDS,FBT को आवश्यक रूप से डाला गया था |
  • ERP 9 — टैली ( Tally) में अब तक का यह सबसे नया संस्करण है जिसे 2009 में जारी किया गया था। कई सारे कार्यों को आसान बनाना इसका मुख्य उद्देश रखा गया था जिसके अंतर्गत बड़े कामों से लेकर छोटे कामों में भी इसका उपयोग किया जाने लगा था साथ ही साथ इसमे जीएसटी की नई सुविधाओं का भी उल्लेख किया गया था। ऐसे में इसका इस्तेमाल करना ज्यादा सरल जान पड़ रहा था |

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 टैली ( Tally)  में मुख्य रूप से इस्तेमाल किए जाने वाले टर्म

आज हम आपको टैली में इस्तेमाल किए जाने वाले मुख्य टर्म के बारे में बताएंगे, जो आपके लिए फायदेमंद होंगे |

Transaction

जब भी आप टैली का इस्तेमाल करते हैं तो ज्यादा से ज्यादा इस वर्ड के बारे में आपने सुना होगा। इसका इस्तेमाल सर्विस या प्रोडक्ट के लेन-देन के  समय होता है | जिस का समुचित उपयोग करते हुए आगे बढा़ जाता है |

Discount

इस टर्म का इस्तेमाल उस समय किया जाता है जब कंपनी मालिक अपने प्रोडक्ट क्षमता को बढ़ाने के लिए अपने ग्राहकों से थोड़ी रकम कम कर लेता है  और अपना लाभ प्राप्त करता है | यह दो प्रकार के होते हैं जिसमें पहला ट्रेड डिस्काउंट और दूसरा कैश डिस्काउंट होता है |

Liability

इसका इस्तेमाल उस समय किया जाता है जब किसी व्यक्ति या कंपनी से सामान को कर्ज के रूप में लिया जाता है और बाद में फिर उसे वापस कर दिया जाता है |

Capital

इसका इस्तेमाल उस समय निश्चित रूप से किया जाता है, जब कोई भी व्यक्ति अपना पैसा अपने बिजनेस में लगाता है तो उस पैसे को “कैपिटल” कहा जाता है साथ ही साथ इसे “इक्विटी” भी कहा जा सकता है |

Assets

जब भी आप किसी बिजनेस की शुरुआत करते हैं तो उसमें कई सारे चीजों का इस्तेमाल होता है। ऐसे में बिजनेस से जुड़ी सारी चीजों को एक साथ “एसेट” कहा जाता है जिसका ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल भी होता है |

टैली ( Tally) सीखने का तरीका

आज के समय में कंप्यूटर के लिए टैली ( Tally) को सबसे ज्यादा आवश्यक माना जाता है। ऐसे में अगर आप भी टैली से संबंधित ज्ञान हासिल करना चाहते हैं, तो इसके लिए आप किसी मान्यता प्राप्त कंप्यूटर इंस्टिट्यूट में जाकर कोर्स कर सकते हैं।

इसके अलावा सोशल मीडिया में कई सारे ऐसे प्लेटफार्म है, जो फ्री में ही आपको इंस्टिट्यूट का लाभ देते हैं जिसके माध्यम से आप घर बैठे भी टैली का कोर्स पूरा कर सकते हैं।

टैली ( Tally) कोर्स के लिए फीस

अगर आप टैली कोर्स करना चाहते हैं, तो यह आपके भविष्य के लिए बहुत ही अच्छा होगा लेकिन इसकी फीस अलग-अलग इंस्टिट्यूट में अलग-अलग होती है। ऐसे में अगर आप सारे इंस्टिट्यूट को कंपेयर करके ही सही तरीके से इस कोर्स को करें तो आपके लिए फायदेमंद साबित होगा। ऐसे में आपको प्रति महीने 3000 से लेकर ₹5000 तक टैली कोर्स के लिए देना होगा |

टैली ( Tally) कोर्स के बाद मिलने वाली सैलरी

अगर आपने किसी अच्छे इंस्टिट्यूट से टैली का कोर्स किया हो, तो यह आपके लिए फायदेमंद होता है क्योंकि इसके माध्यम से आपको महीने के ₹10,000 से ₹15,000 की सैलरी आसानी से प्राप्त हो जाती है।

लेकिन अगर आप किसी कंपनी में कार्यरत हैं और आपका अनुभव ज्यादा है ऐसी स्थिति में आपको महीने के ₹25000 से ₹30000 भी आसानी के साथ प्राप्त हो सकते हैं |

टैली ( Tally) के विभिन्न प्रकार के वाउचर

अगर आप टैली का इस्तेमाल करते हैं, तो आपको विभिन्न प्रकार के वाउचर उपलब्ध होते हैं जिनका आप समय-समय पर उपयोग कर सकते हैं |

  • Sales voucher.
  • Purchase voucher.
  • Receipt voucher.
  • Contra voucher.
  • Payment voucher.
  • Journal voucher.
  • Debit note voucher.
  • Credit note voucher.

टैली ( Tally) का उपयोग

  • जैसा कि हमने पूर्व में भी बताया है कि आज के समय में ज्यादा से ज्यादा टैली को जरूरी माना गया है, तो आज हम आपको इसके उपयोग के बारे में जानकारी देंगे |
  • अगर आपने टैली का कोर्स किया है, तो आप आसानी से ही कंप्यूटर की भाषा को समझ सकते हैं और उसमें होने वाले अकाउंटिंग मेथड को भी समझा जा सकता है |
  •  जब भी कंप्यूटर में काम किया जाता है तो एक बात गौर की जाती है कि इसमें ट्रांजैक्शन होता है | ऐसे में टैली का उपयोग ट्रांजैक्शन में भी होता है |
  • अपने किसी भी अकाउंट को मेंटेन करने के लिए टैली उपयोगी है |
  •  टैली के माध्यम से payroll banana, stock manage, GST Tax calculate, inventory create भी आसानी  के साथ  किया जा सकता है |

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